अंता उपचुनाव में त्रिकोणीय संग्राम, भाया बनाम बागी नरेश, भाजपा की चुप्पी ने बढ़ाई हलचल

राजस्थान की अंता विधानसभा सीट का उपचुनाव अब त्रिकोणीय हो गया है। एक ओर कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरों में भरोसा जताते हुए प्रमोद जैन भाया को लगातार पांचवीं बार टिकट दिया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के ही बागी नेता नरेश मीणा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

अंता उपचुनाव में त्रिकोणीय संग्राम, भाया बनाम बागी नरेश, भाजपा की चुप्पी ने बढ़ाई हलचल

राजस्थान की अंता विधानसभा सीट का उपचुनाव अब त्रिकोणीय हो गया है। एक ओर कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरों में भरोसा जताते हुए प्रमोद जैन भाया को लगातार पांचवीं बार टिकट दिया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के ही बागी नेता नरेश मीणा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी अब तक अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं कर पाई है और नाम को लेकर मंथन जारी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर है, जबकि मतदान 11 नवंबर को होगा।

14 अक्टूबर को नरेश मीणा की नामांकन सभा में उमड़ी भारी भीड़ ने कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी। नरेश के समर्थन में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा मंच पर नजर आए, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा — “भाया रे भाया, खूब माल खाया, पहाड़ को खाया, पत्थरों को भी खाया, बालू रेत को खाया…”। गुढ़ा ने दावा किया कि कांग्रेस के दिवंगत विधायक भरत सिंह का आशीर्वाद भी नरेश मीणा के साथ है। मीणा समाज के लगभग चालीस हजार वोटों का बड़ा आधार होने के कारण नरेश की सक्रियता कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गई है।

इसके जवाब में कांग्रेस ने आज अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रमोद जैन भाया की नामांकन रैली में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस सांसद उमेदाराम बेनीवाल और मुरारीलाल मीणा सहित कई दिग्गज नेता मंच पर मौजूद रहे। कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि भाया के नाम पर गहलोत और पायलट, दोनों खेमों में सहमति रही, जिससे पार्टी ने अंदरूनी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है।

हालांकि कोटा से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी रहे प्रहलाद गुंजल और प्रमोद जैन भाया के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है। यही वजह रही कि कांग्रेस के बड़े नेता एक दिन पहले ही अंता पहुंचकर गुंजल से मुलाकात करने गए ताकि भाया के समर्थन में सारे मतभेद दूर किए जा सकें। कांग्रेस को डर है कि आंतरिक कलह कहीं प्रचार अभियान को कमजोर न कर दे।

उधर भाजपा की ओर से अब तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं होना राजनीतिक चर्चाओं का बड़ा विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सिफारिश पर नंदलाल सुमन या प्रभुलाल सैनी में से किसी एक को टिकट मिल सकता है। दोनों ही नाम जातीय समीकरणों और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। अंता क्षेत्र में माली समुदाय के करीब 43 हजार वोट हैं, जबकि मीणा समुदाय की संख्या भी लगभग इतनी ही है। यही जातीय समीकरण तय करेंगे कि इस बार की बाजी किसके हाथ लगती है।

नरेश मीणा का कांग्रेस से मोहभंग नया नहीं है। इसी वर्ष जनवरी में हुए देवली-उनियारा उपचुनाव में उन्होंने कांग्रेस की जमानत जब्त करवा दी थी। उस समय नरेश ने 59 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार केसी मीणा को मात्र 31 हजार वोट मिले। भाजपा के राजेंद्र गुर्जर ने वहां जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2023 विधानसभा में भी नरेश मीणा ने निर्दलीय चुनाव लड़कर छबड़ा विधानसभा में कांग्रेस का खेल खराब किया था, नरेश को चुनाव में लगभग 40000 वोट मिले और कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। नरेश का कहना है कि कांग्रेस हर बार उन्हें दरकिनार करती रही है, इसलिए इस बार वे अंता में पार्टी को सबक सिखाएंगे।

कुल मिलाकर अंता की लड़ाई अब दो दलों से आगे बढ़कर “तीसरी ताकत” के उभार की कहानी बन चुकी है। एक ओर कांग्रेस का मजबूत संगठन और सत्ता में रहने का अनुभव है, तो दूसरी ओर नरेश मीणा का जातीय आधार और बागी तेवर। भाजपा इस समय प्रत्याशी चयन की गुत्थी सुलझाने में जुटी है, लेकिन उसके लिए यह मुकाबला आसान नहीं होगा। जैसा कि अशोक गहलोत ने मीडिया के सवाल पर चुटकी लेते हुए कहा — “अब बीजेपी का कैंडिडेट मैं घोषित करूं क्या? हमारा उम्मीदवार तो दमखम के साथ मैदान में उतर चुका है।”

अंता उपचुनाव की यह लड़ाई केवल एक सीट की नहीं, बल्कि राजस्थान की बदलती राजनीतिक बयार की झलक है। यह उपचुनाव तय करेगा कि जनता पुराने चेहरों पर भरोसा जताती है, बागियों को मौका देती है या फिर भाजपा नए समीकरण बनाकर वापसी करती है। 21 अक्टूबर के बाद नामांकन की तस्वीर साफ होगी, लेकिन अभी से यह तय है कि अंता में मुकाबला गर्म है, दिलचस्प है और पूरी तरह अप्रत्याशित मोड़ लेने वाला है।