चीन का अमेरिका को सख्त संदेश, अगर लड़ना है तो आख़िर तक लड़ेंगे
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनातनी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनातनी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, अगर अमेरिका लड़ना चाहता है तो हम आख़िर तक लड़ेंगे। अगर बातचीत करनी है तो धमकियां देना बंद करे।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चीनी स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी प्रोडक्ट्स पर भारी शुल्क लगाने के बाद आया है। चीन ने इसे आर्थिक दबाव की रणनीति बताते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करार दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस टकराव का असर वैश्विक बाज़ारों, आपूर्ति शृंखला और भारत जैसे विकासशील देशों पर भी पड़ेगा। अमेरिका और चीन दोनों ही एक-दूसरे के लिए बड़े व्यापारिक साझेदार रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाएं नए शीत युद्ध की आहट दे रही हैं।
जिनपिंग-ट्रम्प की मुलाकात रद्द हो सकती है
मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि अगर ये तनाव कम नहीं हुआ तो इस महीने के आखिर में दक्षिण कोरिया में होने वाली जिनपिंग और ट्रम्प की मुलाकात रद्द हो सकती है। हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि मुलाकात होगी।
वहीं दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तनातनी से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चिता का माहौल बन गया है। व्यापारियों को डर है कि अगर ये विवाद आगे बढ़ा तो ट्रेड वॉर जैसे हालात बन सकते हैं।
भारत की भूमिका
भारत अब इस तनावपूर्ण माहौल में एक रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि आधिकारिक रूप से भारत ने कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को इस संघर्ष में सावधानी से कदम रखने होंगे, क्योंकि वह दोनों देशों से गहराई से जुड़ा है—आर्थिक और सामरिक रूप से।
क्या होगा आगे?
अमेरिका के इस टैरिफ फैसले से जहां अमेरिकी घरेलू उद्योग को थोड़ी राहत मिल सकती है, वहीं वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और कीमतों में उछाल की आशंका भी बढ़ गई है। चीन की चेतावनी के बाद दुनिया की निगाहें अब अगले अमेरिकी कदम पर टिकी हैं।

