क्या प्रेम का अर्थ ही कामवासना है - ज्ञानी बाबा का ज्ञान 

शुद्धता और पवित्रता सबसे ऊपर लड़का-लड़की का संबंध शारीरिक आकर्षण से शुरू नहीं होना चाहिए ....कई संत कहते हैं कि आजकल 100 में से मुश्किल से 2-4 लड़कियाँ/लड़के ही पूरी तरह पवित्र रह पाते हैं।

क्या प्रेम का अर्थ ही कामवासना है - ज्ञानी बाबा का ज्ञान 

शुद्धता और पवित्रता सबसे ऊपर लड़का-लड़की का संबंध शारीरिक आकर्षण से शुरू नहीं होना चाहिए ....कई संत कहते हैं कि आजकल 100 में से मुश्किल से 2-4 लड़कियाँ/लड़के ही पूरी तरह पवित्र रह पाते हैं, बाकी बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के चक्कर में पड़ जाते हैं..अगर पहले से कई संबंध बन चुके, तो बाद में एक साथ जीवन भर संतुष्टि नहीं मिल पाती।

प्रेम = त्याग, समर्पण और आत्म-नियंत्रण सच्चा प्रेम दूसरे को पाने की चाह नहीं, बल्कि दूसरे की भलाई और आत्मिक उन्नति की चाह है...ये फिल्मों वाला "लड़का-लड़की मिले, सेक्स, फिर शादी, हैप्पी एंडिंग" नहीं होता...असली प्रेम आध्यात्म में मिलता है, जहां इंसान अहंकार छोड़कर परमात्मा या सत्य से जुड़ता है।

विवाह से पहले संबंध → ज्यादातर नकारात्मक विवाह से पहले रोमांटिक/शारीरिक संबंध को ज्यादातर ज्ञानी पाप या आत्मिक हानि मानते हैं...ये टेढ़ी-मेढ़ी नजरें, बनावटी मुस्कान, चटक-मटक कर चलना जैसी चीजें चरित्रहीनता की निशानी बताई जाती हैं....प्रेम का असली आधार विश्वास, सम्मान और परिवार की स्वीकृति होना चाहिए।

सच्चा प्रेम क्या है? (ज्ञानी दृष्टि से) ये ईश्वर/सत्य के प्रति भक्ति जैसा है — जहां देने में खुशी है, पाने में नहीं....लड़का-लड़की का प्रेम भी तभी सच्चा, जब वो एक-दूसरे को ईश्वर की ओर ले जाए, न कि भटकाए.....अगर प्रेम में ईर्ष्या, कब्जा, सेक्सुअल डिमांड ज्यादा है, तो वो प्रेम नहीं, मोह-माया है

ज्ञानी बाबा कहेंगे — "बेटा/बेटी, प्रेम तो बहुत ऊँचा है, लेकिन वो तब तक प्रेम नहीं जब तक वो शुद्ध, संयमी और ईश्वर-उन्मुख न हो। आज का ज्यादातर 'लव' तो बस कामना का खेल है, जो अंत में दुख ही देता है।"अगर तुम सच्चे प्रेम की तलाश में हो, तो पहले अपने मन को शुद्ध करो, आत्म-नियंत्रण सीखो, और सम्मान + समझदारी से रिश्ता बनाओ।

तुम क्या सोचते हो — आज का प्रेम ज्ञानी बाबा की नजर में कितना सही लगता है? कमेंट करके जरूर बताएं .....