जैसलमेर में ई-मित्र वाला हनीट्रैप में फंसा, पाकिस्तान को सीक्रेट जानकारी दे रहा था?
कहानी शुरू होती है सोशल मीडिया से... झाबराराम को फेसबुर्क/इंस्टाग्राम पर एक खूबसूरत पाकिस्तानी महिला से मैसेज आया। पहले दोस्ती... फिर प्यार भरी बातें... फिर वीडियो कॉल... और धीरे-धीरे इमोशनल ब्लैकमेल + पैसे का लालच!
जैसलमेर के ई-मित्र संचालक ने पाकिस्तानी 'जासूसी रानी' के जाल में फंसकर भेजी सेना की गुप्त जानकारी!
जैसलमेर, 25 जनवरी 2026 – रेगिस्तान की रेत पर तिरंगा लहराने से ठीक एक रात पहले... जैसलमेर के नेहड़ान गांव में एक ऐसा सच सामने आया जो किसी जासूसी थ्रिलर से कम नहीं! 25 जनवरी की रात जब पूरा देश गणतंत्र दिवस की तैयारियों में मगन था, तब सुरक्षा एजेंसियों की स्पेशल टीम ने अंधेरे में एक ऐसे शख्स को दबोच लिया जो 4 साल से देशद्रोह की साजिश में लिप्त था!
मिडनाइट ऑपरेशन: जब स्पेशल टीम ने झाबराराम को उठाया
रात के 11 बजे नेहड़ान गांव में सन्नाटा था। अचानक CID-Intelligence की टीम ने ई-मित्र संचालक झाबराराम मेघवाल के घर को घेर लिया। बिना किसी शोर-शराबे के, बिना किसी सूचना के – झाबराराम को हिरासत में ले लिया गया। गांव वालों को सुबह तक पता भी नहीं चला कि उनका "भला आदमी" ई-मित्र संचालक दुश्मन देश का जासूस बन चुका था!
सीन 1: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या
समय: रात 11 बजे स्थान: नेहड़ान गांव, जैसलमेर एक्शन: CID स्पेशल टीम का सरप्राइज रेड 
हनीट्रैप का जाल: जब फेसबुक की 'दोस्त' बनी देश की दुश्मन!
कहानी शुरू होती है सोशल मीडिया से... झाबराराम को फेसबुर्क/इंस्टाग्राम पर एक खूबसूरत पाकिस्तानी महिला से मैसेज आया। पहले दोस्ती... फिर प्यार भरी बातें... फिर वीडियो कॉल... और धीरे-धीरे इमोशनल ब्लैकमेल + पैसे का लालच!
हनीट्रैप की स्क्रिप्ट (जैसे फिल्मों में होता है!)
STAGE 1: मासूम दोस्ती "हाय, आप जैसलमेर से हो? वाह, बहुत खूबसूरत जगह!
STAGE 2: इमोशनल कनेक्शन "तुमसे बात करके बहुत अच्छा लगता है... मुझे तुम पर भरोसा है।STAGE 3: पैसे का ऑफर "जरा अपने इलाके की कुछ फोटो भेजो... ₹5000 मिलेंगे!STAGE 4: ब्लैकमेल "अगर नहीं भेजोगे तो तुम्हारी चैट पत्नी को भेज दूंगी!झाबराराम फंस गया! पहले ₹5000... फिर ₹10,000... फिर लाखों का लालच! और देशद्रोह का रास्ता खुल गया।

क्या-क्या जानकारी भेजी? सेना की हर चाल दुश्मन तक!
झाबराराम के पास ई-मित्र की पहुंच थी – यानी गांव के हर दस्तावेज, हर सरकारी स्कीम, हर व्यक्ति का डेटा उसके पास था। और बॉर्डर एरिया होने की वजह से सेना की गतिविधियां भी उसकी नजर में थीं।
भेजी गई सेंसिटिव जानकारी (CID सूत्र)
| क्या भेजा? | कितना खतरनाक? |
|---|---|
| आर्मी मूवमेंट | बहुत खतरनाक |
| बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) फोटो | गोपनीय |
| सड़क-ब्रिज निर्माण डिटेल | सेंसिटिव |
| मोबाइल टावर लोकेशन | खुफिया |
| स्कूल-हॉस्पिटल की जानकारी | लोकल इंटेल |
| गांव के लोगों का डेटा | निजी जानकारी |

यह सब पाकिस्तान के ISI को भेजा गया! हर छोटी-बड़ी जानकारी जो युद्ध के समय या आतंकी हमले के दौरान घातक साबित हो सकती थी।
CID की कड़ी पूछताछ: जयपुर में खुलेगा राज
फिलहाल झाबराराम को जयपुर CID हेडक्वार्टर ले जाया गया है। यहां Intelligence Bureau (IB) और Military Intelligence (MI) भी शामिल हो सकती हैं।
पूछताछ के मुख्य सवाल
कितनी बार जानकारी भेजी?
कुल कितना पैसा मिला? पाकिस्तानी महिला का असली नाम क्या था? कौन-कौन से प्लेटफॉर्म यूज किए? (WhatsApp/Telegram/Signal) और कोई सदस्य इस नेटवर्क में है? किस ISI हैंडलर से कनेक्शन था?
पुलिस फिलहाल चुप है – क्योंकि बाकी कड़ियां भी फंसानी हैं। अगर पूरा नेटवर्क खुल गया तो बड़ा जासूसी रैकेट पकड़ा जा सकता है।
हनीट्रैप: पाकिस्तान का पुराना हथियार
यह कोई पहला मामला नहीं है। पाकिस्तान की ISI बॉर्डर इलाकों में दशकों से हनीट्रैप चलाती आ रही है।

पिछले 5 साल के बड़े मामले
2021: बीकानेर में BSF जवान फंसा, 7 साल जेल
2022: अमृतसर में ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार
2023: जम्मू में सरकारी कर्मचारी पकड़ा गया
2024: गुजरात बॉर्डर पर दो मछुआरे गिरफ्तार
2026: जैसलमेर में ई-मित्र संचालक (ताजा केस) ✅
हनीट्रैप का फॉर्मूला सेम है: खूबसूरत औरत → इमोशनल अटैचमेंट → पैसा/ब्लैकमेल → जानकारी चुराना।
जैसलमेर: क्यों है इतना सेंसिटिव?
जैसलमेर = भारत-पाक बॉर्डर का सबसे संवेदनशील इलाका!
पाकिस्तान से सिर्फ 100 किमी दूर लोंगेवाला युद्ध का ऐतिहासिक स्थल एयर फोर्स के सीक्रेट बेस आर्मी की रेगुलर पैट्रोलिंग इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस जोन
यहां की हर छोटी जानकारी दुश्मन के लिए सोना है! इसलिए झाबराराम जैसे लोग सोने की चिड़िया थे ISI के लिए।

अब क्या होगा? सजा का इंतजार
अगर झाबराराम दोषी साबित हुआ तो:
UAPA (गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम) Official Secrets Act (राजद्रोह)IT Act (साइबर अपराध) संभावित सजा: आजीवन कारावास या मृत्युदंड
यह सिर्फ "चैटिंग" का मामला नहीं – यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है!

लोकल रिएक्शन: गांव में सदमा
नेहड़ान गांव के लोग हैरान हैं। "झाबराराम तो भला आदमी था... हमारे सारे काम करता था... कभी सोचा नहीं था कि..."
"वो हमारे आधार कार्ड बनाता था...
क्या वो सबका डेटा भी भेजता था?"
- गांव वासी
"यह तो फिल्म जैसा लग रहा है! पर सच है तो बहुत डरावना!"
- स्थानीय युवक
सतर्कता संदेश: आप भी फंस सकते हैं!
कैसे बचें हनीट्रैप से?
1 अनजान लोगों से सोशल मीडिया पर बात न करें
2 कोई पैसे का ऑफर दे तो तुरंत ब्लॉक करें
3 सेंसिटिव जानकारी कभी शेयर न करें
4 वीडियो कॉल में समझौता न करें
5 ब्लैकमेल होने पर पुलिस को सूचित करें
6 कोई पता नहीं चलेगा – यह सोच खतरनाक है!
याद रखें: ISI के पास एडवांस्ड टेक्नोलॉजी है – वो ट्रैक करते हैं, रिकॉर्ड करते हैं, और फंसाते हैं!
देशभक्ति vs देशद्रोह की लड़ाई
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह गिरफ्तारी सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं। यह सुरक्षा एजेंसियों की सफलता है और हनीट्रैप के खिलाफ चेतावनी भी।
देश पहले, बाकी सब बाद में!
पैसे का लालच = देशद्रोह की शुरुआत
सतर्कता ही सुरक्षा है
झाबराराम मेघवाल की कहानी एक सबक है – सोशल मीडिया पर हर दोस्त दोस्त नहीं होता... कुछ दुश्मन भी होते हैं!

