जोधपुर–हैदराबाद बस रूट पर नशे की नई खेप, हरी मिर्च की आड़ में स्मैक–एमडी की तस्करी का खुलासा
जोधपुर से हैदराबाद जाने वाली बसों के जरिए मथानिया की हरी मिर्च की आड़ में स्मैक और एमडी जैसे मादक पदार्थों की तस्करी का खुलासा। युवाओं पर बढ़ते नशे के खतरे ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जोधपुर–हैदराबाद बस रूट पर नशे की नई खेप, हरी मिर्च की आड़ में स्मैक–एमडी की तस्करी का खुलासा
जोधपुर से हैदराबाद जाने वाली निजी बसों के ज़रिये मथानिया की हरी मिर्च के नाम पर स्मैक और एमडी जैसे घातक मादक पदार्थों की तस्करी किए जाने की गंभीर जानकारी सामने आई है। इस खुलासे ने न सिर्फ पुलिस तंत्र, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, तस्कर मथानिया क्षेत्र की प्रसिद्ध हरी मिर्च की खेप में मादक पदार्थ छिपाकर बसों के जरिए तेलंगाना तक पहुंचा रहे हैं। सब्ज़ी के कार्टन और बोरियों में नशे की पुड़िया इस तरह छुपाई जाती हैं कि सामान्य जांच में पकड़ में आना मुश्किल हो जाता है।

बसें बनीं नशे की सप्लाई चेन
बताया जा रहा है कि जोधपुर–हैदराबाद रूट पर चलने वाली कुछ बसें अब नशा तस्करी की सुरक्षित सप्लाई चेन बन चुकी हैं। बस स्टाफ की मिलीभगत या लापरवाही से खेप बिना किसी बड़ी रोक-टोक के शहरों और राज्यों की सीमाएं पार कर रही है।
यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि नशे का नेटवर्क अब ग्रामीण इलाकों से निकलकर अंतरराज्यीय स्तर पर गहराई से फैल चुका है।
युवाओं पर सबसे खतरनाक असर
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस नशे का सीधा असर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रहा है। कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र और शहरी बस्तियों में स्मैक और एमडी की बढ़ती उपलब्धता ने एक पूरी पीढ़ी को खतरे में डाल दिया है।
समाजसेवियों और शिक्षाविदों का कहना है कि नशे की गिरफ्त में फंसा युवा न सिर्फ अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है, बल्कि परिवार और सामाजिक ढांचे को भी अंदर से खोखला कर रहा है।

शासन-प्रशासन पर खड़े हो रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल लगातार उठ रहे हैं कि आखिर शासन और प्रशासन इस बढ़ते खतरे को लेकर कितनी गंभीरता से काम कर रहा है?
क्या तस्करी के इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए ठोस रणनीति है, या फिर कार्रवाई केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक ही सीमित रह जाएगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मादक पदार्थों के निर्माण, तस्करी और वितरण में शामिल पूरे नेटवर्क पर कठोरतम कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी।
कठोर कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि
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बस रूट्स पर सघन जांच अभियान चलाया जाए
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अंतरराज्यीय नशा तस्करी में शामिल गिरोहों की पहचान कर उन्हें जड़ से खत्म किया जाए
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युवाओं को नशे से बचाने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियान तेज किए जाएं
नशे के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं।

अब सवाल सिर्फ तस्करी का नहीं है—
सवाल हमारे युवाओं, हमारे भविष्य और समाज की आत्मा को बचाने का है।
Hindu Solanki 
