मनोज बाजपेयी की 'घूसखोर पंडत' पर विवाद | कौन है - 'घूसखोर पंडत' जानिए विस्तार से
मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल पर बवाल! ब्राह्मण समाज ने जातिवाद फैलाने का आरोप लगाया, यूजर्स बोले- नाम बदलो या बैन करो। टीजर रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर #BoycottGhooskhorPandat ट्रेंड। पूरी खबर पढ़ें।
- "Netflix के अनुसार आतंकवाद का कोई धर्म नहीं, लेकिन भ्रष्टाचार की जाति जरूर है?"
- "घूसखोर दलित या घूसखोर मुस्लिम नाम रखने की हिम्मत है? नाम तुरंत बदलो!"
- "ब्राह्मण समाज का अपमान है, इसे बैन करो या हम Netflix का बॉयकॉट करेंगे।"
- "ये सॉफ्ट टारगेटिंग है, कोर्ट में मिलेंगे।"

- स्टोरी: फिल्म एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित (जिसे 'पंडत' कहा जाता है) के इर्द-गिर्द घूमती है। मनोज बाजपेयी इस किरदार में हैं, जो रिश्वतखोरी और साजिशों में फंसा हुआ है। एक रात में कई घटनाएं घटती हैं।
- डायरेक्टर: रितेश शाह
- राइटर: नीरज पांडे
- कास्ट: मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरुचा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय, श्रद्धा दास और किकू शारदा।
- प्लेटफॉर्म: Netflix (2026 में रिलीज होने वाली)

- Padmavati → Padmaavat (2018)
राजपूत समुदाय (खासकर Karni Sena) ने विरोध किया कि फिल्म रानी पद्मावती का गलत चित्रण करती है। हिंसा, थिएटर तोड़फोड़ और धमकियों के बाद टाइटल में 'i' हटाकर 'Padmaavat' कर दिया गया। फिल्म रिलीज हुई लेकिन भारी विवाद के साथ। - Laxmmi Bomb → Laxmii (2020)
हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई कि देवी लक्ष्मी का नाम "बॉम्ब" के साथ जोड़ना अपमानजनक है। प्रोटेस्ट के बाद टाइटल बदलकर सिर्फ Laxmii कर दिया गया। - Ram-Leela → Goliyon Ki Raasleela Ram-Leela (2013)
कुछ हिंदू संगठनों ने कहा कि "राम" का नाम इस तरह इस्तेमाल करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। कोर्ट और प्रोटेस्ट के बाद टाइटल में "गोलियों की रासलीला" जोड़ दिया गया। - Billu Barber → Billu (2009)
नाई (बार्बर) कम्युनिटी ने विरोध किया कि "बार्बर" शब्द से उनकी जाति/पेशे का मजाक उड़ाया जा रहा है। प्रोटेस्ट के बाद टाइटल से "Barber" हटा दिया गया। - Loveyatri → Loveyatri (2018)
कुछ हिंदू ग्रुप्स ने टाइटल को धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया। CBFC के साथ चर्चा के बाद टाइटल बदलकर Loveyatri कर दिया गया (हालाँकि बदलाव छोटा था)। - Prithviraj → Samrat Prithviraj (2022)
राजपूत Karni Sena ने माँग की कि "सम्राट" जोड़ा जाए ताकि 12वीं सदी के राजा पृथ्वीराज चौहान का सम्मान हो। PIL और विरोध के बाद टाइटल बदल दिया गया। - Aarakshan (2011)
जाति आधारित रिजर्वेशन पर फिल्म थी। दलित संगठनों ने कहा कि यह रिजर्वेशन को गलत दिखाती है और कुछ शब्द आपत्तिजनक हैं। UP, पंजाब और आंध्र में बैन भी लगा, बाद में रिलीज हुई।
- मार्केटिंग और फ्री पब्लिसिटी (Buzz / Hype पैदा करना)
विवाद = फ्री में खूब चर्चा = ज्यादा लोगों का ध्यान आकर्षित होना = पहले दिन ज्यादा टिकट बिकना।
पुराने जमाने से ही ये ट्रिक चलती है। - राजनीतिक / वैचारिक एजेंडा को आगे बढ़ाना
खासकर पिछले 8-10 सालों में कुछ फिल्में ऐसी आई हैं जो साफ तौर पर एक खास विचारधारा (ज्यादातर हिंदुत्व / राष्ट्रवाद) को सपोर्ट करती दिखती हैं। इनमें से कई को सरकार या सत्ताधारी पार्टी के करीब माना जाता है।
|
फिल्म / वेब सीरीज
|
विवाद का कारण
|
क्या हुआ?
|
संभावित मकसद
|
|---|---|---|---|
|
Laxmmi Bomb → Laxmii
|
लक्ष्मी जी का नाम "बॉम्ब" के साथ
|
टाइटल बदलना पड़ा
|
शुरुआती buzz + ट्रेलर वायरल
|
|
Padmavati → Padmaavat
|
रानी पद्मावती का चित्रण
|
हिंसा, थिएटर तोड़फोड़, टाइटल बदला
|
बहुत बड़ा प्री-रिलीज हाइप
|
|
Ghuskhhor Pandat (2026)
|
"पंडत" को भ्रष्टाचार से जोड़ना
|
अभी विवाद चल रहा है, टाइटल बदलने की मांग
|
संभावित buzz (अभी कन्फर्म नहीं)
|
|
Billu Barber → Billu
|
"बार्बर" से नाई समाज नाराज
|
टाइटल से Barber हटाया
|
शुरुआती चर्चा
|
- The Kashmir Files (2022)
- The Kerala Story (2023)
- Article 370 (2024)
- Swatantra Veer Savarkar (2024)
- Accident or Conspiracy: Godhra
- The Sabarmati Report
- ये सत्ताधारी पार्टी (BJP) के नैरेटिव को सपोर्ट करती हैं
- हिंदू-मुस्लिम विभाजन को बढ़ावा देती हैं
- चुनाव से पहले रिलीज होती हैं ताकि वोटरों में ध्रुवीकरण हो
- कई बार सरकार / BJP नेताओं ने इनकी तारीफ की, फ्री स्क्रीनिंग हुईं
- 80-90% मामलों में विवाद वाला टाइटल या विषय मार्केटिंग ट्रिक के तौर पर चुना जाता है।
(पुरानी फिल्मों में ज्यादातर यही था — Padmaavat, Laxmmi Bomb आदि) - पिछले 5-7 सालों में कुछ फिल्में साफ राजनीतिक एजेंडा के साथ बन रही हैं, खासकर हिंदुत्व / राष्ट्रवाद / एंटी-पाकिस्तान / एंटी-कन्वर्जन जैसे विषयों पर।
इनमें से कई को "प्रोपेगैंडा" कहा जाता है।

- अगर सिर्फ चर्चा के लिए है → तो टाइटल बदल सकते हैं (जैसा पहले कई बार हुआ)
- अगर कोई बड़ा वैचारिक पॉइंट साबित करना है → तो शायद नहीं बदलेंगे और विवाद को चलने देंगे।
Hindu Solanki 
