बजट से पहले 'महंगाई का हंटर': कमर्शियल LPG सिलेंडर में एक महीने में दोहरी चोट, लेकिन बजट में मध्यम वर्ग को कुछ नहीं मिला
बजट से ठीक पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। 1 फरवरी से 50 रुपये और इससे पहले जनवरी में 111 रुपये की बढ़ोतरी ने महंगाई के मुद्दे को फिर केंद्र में ला दिया है। इससे कारोबार और आम जनता पर असर पड़ने की आशंका है।
बजट से पहले 'महंगाई का हंटर': कमर्शियल LPG सिलेंडर में एक महीने में दोहरी चोट, लेकिन बजट में मध्यम वर्ग को कुछ नहीं मिला
सरकार के दावे vs जमीनी हकीकत: आम आदमी और कारोबारियों पर बढ़ता बोझ
बजट 2026-27 पेश होने से ठीक कुछ घंटे पहले, मोदी सरकार ने एक बार फिर महंगाई का 'हंटर' चलाया। 1 फरवरी 2026 से कमर्शियल LPG सिलेंडर की
कीमत में ₹49 की बढ़ोतरी कर दी गई । इससे पहले 1 जनवरी 2026 को ₹111 की बढ़ोतरी हो चुकी थी । यानी एक ही महीने में गैस के दामों पर दोहरी मार – कुल ₹160 की वृद्धि। दूसरी तरफ, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जो बजट पेश किया, उसमें मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा और छोटे व्यापारियों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली ।

यह विरोधाभास सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है: क्या विकास के नाम पर आम आदमी की जेब काटना जायज है?
कमर्शियल LPG पर दोहरी चोट: एक महीने में ₹160 की वृद्धि
कीमतों का गणित:
| तारीख | वृद्धि | दिल्ली में नई कीमत (19 kg) |
|---|---|---|
| 31 दिसंबर 2025 | – | ₹1,580.50 |
| 1 जनवरी 2026 | +₹111 | ₹1,691.50 |
| 1 फरवरी 2026 | +₹49 | ₹1,740.50 |
| कुल बढ़ोतरी (एक महीने में) | +₹160 | 10.1% वृद्धि |
किसे हो रहा नुकसान?
कमर्शियल LPG सिलेंडर का उपयोग करते हैं:
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होटल और रेस्टोरेंट
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ढाबे और छोटे भोजनालय
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कैटरिंग व्यवसाय
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छोटे खाद्य उद्योग
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सड़क किनारे खाने की दुकानें
प्रभाव:
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एक रेस्टोरेंट जो महीने में 10 सिलेंडर इस्तेमाल करता है, उसकी लागत ₹1,600 प्रति माह बढ़ गई।
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सालाना आधार पर यह ₹19,200 का अतिरिक्त बोझ है।
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छोटे व्यापारियों के लिए यह मार्जिन पर सीधा प्रहार है ।
2025 में पहले राहत, अब दोहरी मार

पिछले साल क्या हुआ था?
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अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 के बीच सरकार ने कमर्शियल LPG की कीमतों में कुल ₹223 की कटौती की थी
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यह चुनावी राज्यों (महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा) में चुनाव से पहले की राहत थी।
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उद्योग जगत ने इसे "सांस लेने की जगह" माना।
अब क्या हो रहा है?
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चुनाव खत्म होते ही राहत का दौर खत्म।
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जनवरी-फरवरी में दोहरी बढ़ोतरी ने वह सारी राहत वापस ले ली।
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अब दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर ₹1,740.50 पर – अप्रैल 2025 के लगभग बराबर ।
यह रणनीति साफ दिखाती है:
चुनाव से पहले = राहत दो
चुनाव के बाद = वसूली शुरू करो
बजट 2026: मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर पानी
1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना 9वां बजट पेश किया। लेकिन आम आदमी को जो उम्मीदें थीं, वे पूरी नहीं हुईं।
क्या नहीं मिला?
| मांग | हकीकत |
|---|---|
| इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव | कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹1 लाख | नहीं बढ़ाया गया |
| 30% स्लैब की सीमा बढ़ाना | यथावत रखी गई |
| HRA और होम लोन राहत | कोई बड़ी घोषणा नहीं |
| Section 80C की सीमा ₹2 लाख | नहीं बढ़ाई गई |
| महंगाई भत्ता/राहत | बजट में कहीं नहीं |
| GST दरों में कटौती | यथावत |
| पेट्रोल-डीजल पर टैक्स राहत | कोई घोषणा नहीं |
क्या मिला?
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MSME के लिए क्रेडिट गारंटी ₹10 करोड़
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स्टार्टअप फंड ₹10,000 करोड़
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फुटवियर सेक्टर में रोजगार योजना
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इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹12.2 लाख करोड़ (पिछले बजट की तरह)
निष्कर्ष:
बजट बड़े उद्योग, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है। सैलरी क्लास, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारी के लिए कुछ खास नहीं।
महंगाई + वसूली + मार: सरकार की तिहरी रणनीति
1. महंगाई लगातार बढ़ रही है
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गैस सिलेंडर (कमर्शियल): एक महीने में ₹160 की बढ़ोतरी
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घरेलू LPG: ₹1,103 (दिल्ली) – कोई राहत नहीं
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पेट्रोल-डीजल: ₹94-96/₹87-89 के आसपास स्थिर, लेकिन बजट में कोई कटौती नहीं
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खाद्य पदार्थ: टमाटर, प्याज, दाल, चावल – सभी महंगे
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शिक्षा और स्वास्थ्य: लगातार बढ़ता खर्च
2. टैक्स की वसूली जारी
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इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदले
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GST यथावत
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सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाया गया: Futures पर 0.02% से 0.05%, Options पर 0.15%
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मध्यम वर्ग पर बढ़ती महंगाई + स्थिर टैक्स = दोहरी मार

3. आम आदमी को कोई राहत नहीं
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कमर्शियल LPG बढ़ा → खाने के दाम बढ़ेंगे
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टैक्स राहत नहीं → बचत घटेगी
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रोजगार योजना अस्पष्ट → बेरोजगारी जारी
छोटे व्यापारियों पर असर: जमीनी रिपोर्ट
एक छोटे ढाबे के मालिक की कहानी:
राजू शर्मा, ढाबा मालिक, दिल्ली-जयपुर हाईवे
"जनवरी में गैस ₹111 बढ़ी, अभी फिर ₹49 बढ़ गई। मैं महीने में 8 सिलेंडर इस्तेमाल करता हूं। अब मेरा खर्च ₹1,280 प्रति महीने बढ़ गया। अगर मैं थाली का दाम बढ़ाऊं तो ग्राहक कम हो जाते हैं। अगर न बढ़ाऊं तो मेरा मुनाफा खत्म। सरकार बजट में MSME की बात कर रही है, लेकिन हमारे जैसे छोटे कारोबारियों को कौन देख रहा है?"
रेस्टोरेंट एसोसिएशन की चिंता:
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने चेतावनी दी है कि:
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कमर्शियल LPG की लगातार बढ़ोतरी से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ेगी ।
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छोटे रेस्टोरेंट मार्जिन प्रेशर में हैं।
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अगर यह जारी रहा तो मेन्यू की कीमतें 5-10% बढ़ सकती हैं।
सरकार पर सवाल: आखिर प्राथमिकता किसकी?
सवाल 1: बजट से ठीक पहले गैस क्यों बढ़ाई?
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1 फरवरी को बजट पेश हुआ ।
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उसी दिन सुबह कमर्शियल LPG ₹49 बढ़ाया गया ।
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यह टाइमिंग संदेहास्पद है – क्या सरकार बजट में "राहत के दावे" करते हुए पीछे के दरवाजे से जेब काट रही है?
सवाल 2: जनवरी की बढ़ोतरी का औचित्य क्या था?
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1 जनवरी को ₹111 की बढ़ोतरी को "वैश्विक तेल कीमतों" से जोड़ा गया ।
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लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतें जनवरी-फरवरी में स्थिर थीं।
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तो फिर एक महीने में दो बार बढ़ोतरी क्यों?
सवाल 3: घरेलू LPG को क्यों नहीं छुआ?
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घरेलू LPG (14.2 kg) की कीमत अप्रैल 2025 से यथावत है ।
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यह चुनावी रणनीति है – घरेलू उपभोक्ता (वोटर) को राहत, कारोबारियों से वसूली।
सवाल 4: बजट में मध्यम वर्ग को क्यों नहीं मिली राहत?
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लगातार 5 साल से इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं ।
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महंगाई सालाना 5-7% बढ़ रही है, लेकिन टैक्स छूट नहीं बढ़ी।
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Section 80C की सीमा 2014 से ₹1.5 लाख पर अटकी है ।
विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश:
"मोदी सरकार 'महंगाई मैन' साबित हो रही है। बजट से पहले गैस बढ़ाना और फिर बजट में कोई राहत न देना – यह दोहरा खेल है। आम आदमी को लूटकर कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाया जा रहा है।"
अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार:
"यह बजट 'ट्रिकल-डाउन इकोनॉमी' का एक और उदाहरण है। सरकार मान रही है कि पहले कॉरपोरेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करो, फिर फायदा नीचे तक पहुंचेगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारी पिस रहे हैं।"
ट्रेड यूनियन नेता तपन सेन:
"कमर्शियल LPG की बढ़ोतरी सीधे खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ाएगी। यह गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर दोहरा बोझ है।"
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तुलनात्मक विश्लेषण: पिछले 5 बजटों में मध्यम वर्ग को क्या मिला?
| वर्ष | इनकम टैक्स राहत | महंगाई नियंत्रण | रोजगार योजना |
|---|---|---|---|
| 2022 | नई टैक्स रिजीम लॉन्च | सीमित | अस्पष्ट |
| 2023 | ₹7 लाख तक टैक्स फ्री (नई रिजीम) | नहीं | नहीं |
| 2024 | ₹12 लाख तक टैक्स फ्री (rebate) | नहीं | नहीं |
| 2025 | स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 | नहीं | सीमित |
| 2026 | कोई बड़ा बदलाव नहीं | नहीं | अस्पष्ट |
'महंगाई मैन' का खेल जारी
Budget 2026 और LPG की दोहरी बढ़ोतरी साफ संदेश देती है:
सरकार की प्राथमिकताएं:
इंफ्रास्ट्रक्चर – ₹12.2 लाख करोड़
कॉरपोरेट और स्टार्टअप – हजारों करोड़ की योजनाएं
राजनीतिक छवि – "विकास पुरुष" का नैरेटिव
जनता को क्या मिला
इनकम टैक्स राहत – नहीं
महंगाई नियंत्रण – नहीं
रोजगार गारंटी – नहीं
गैस, पेट्रोल, खाद्य सामग्री में राहत – नहीं
अंतिम सवाल:
क्या विकास के आंकड़े और कॉरपोरेट मुनाफा ही काफी है, या सरकार को आम आदमी की थाली, जेब और रोजगार की भी चिंता करनी चाहिए?
मोदी सरकार = महंगाई + वसूली + मार
न आम आदमी को राहत, न व्यापार को सहारा – बस लगातार बोझ!
Hindu Solanki 
