राहुल गांधी - “मेरा गद्दार दोस्त बोल रहा है।” , रवनीत सिंह बिट्टू कौन हैं? कांग्रेस छोड़ BJP में क्यों गए ?
पंजाब की राजनीति के चर्चित चेहरे और पूर्व कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। बेअंत सिंह के पोते बिट्टू लंबे समय तक राहुल गांधी के करीबी माने जाते रहे, लेकिन पार्टी नेतृत्व, संगठनात्मक असंतोष और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका की चाह ने उन्हें बीजेपी तक पहुंचा दिया। हालिया बयानों और संसद परिसर की घटनाओं ने कांग्रेस-बिट्टू टकराव को और तीखा कर दिया है।
सस्पेंड सांसदों के प्रदर्शन के बीच सियासी टकराव, रवनीत सिंह बिट्टू के बयान पर राहुल गांधी का पलटवार
नई दिल्ली। संसद परिसर में सस्पेंड सांसदों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उस वक्त सियासी माहौल और गर्म हो गया, जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे सांसदों पर तीखा हमला बोल दिया। बिट्टू ने आरोप लगाया कि “ये लोग देश के दुश्मन हैं”, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
रवनीत सिंह बिट्टू के इस बयान पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तुरंत पलटवार करते हुए उन्हें “मेरा गद्दार दोस्त” कह दिया। राहुल गांधी की यह टिप्पणी सोशल मीडिया से लेकर संसद गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई।

क्या था पूरा घटनाक्रम?
संसद के मौजूदा सत्र के दौरान विपक्ष के कई सांसदों को निलंबित किया गया है। इसी के विरोध में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद संसद परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू वहां पहुंचे।
बिट्टू ने प्रदर्शन को देशविरोधी करार देते हुए कहा कि विपक्ष संसद को बाधित कर रहा है और “जो लोग संसद का अपमान करते हैं, वे देश के हित में नहीं हैं।” इस बयान के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

राहुल गांधी का जवाब क्यों अहम है?
राहुल गांधी ने बिट्टू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“मेरा गद्दार दोस्त बोल रहा है।”
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं बल्कि कांग्रेस की उस लाइन को दोहराता है, जिसमें पार्टी बार-बार यह आरोप लगाती रही है कि सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज को देशद्रोह के फ्रेम में पेश कर रहा है।

राजनीतिक संदेश और गहराता ध्रुवीकरण
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में संवाद के बजाय टकराव की तस्वीर सामने रख दी है।
एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष को राष्ट्रविरोधी ठहराने की कोशिश करता दिख रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहा है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है।
रवनीत सिंह बिट्टू कौन हैं?
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति का जाना-माना नाम हैं।
वे दिवंगत बेअंत सिंह के पोते हैं, जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और आतंकवाद के दौर में सख़्त फैसलों के लिए पहचाने जाते थे।
राजनीतिक प्रोफाइल
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लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी में रहे
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लोकसभा सांसद रह चुके हैं
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पंजाब में कांग्रेस के सक्रिय और मुखर नेताओं में गिने जाते थे
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राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे, कई बार खुलकर पार्टी लाइन का बचाव करते दिखे
कांग्रेस में रहते हुए क्या बदला?

2022 के बाद कांग्रेस की पंजाब इकाई में हालात तेजी से बदले—
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पार्टी की लगातार चुनावी हार
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नेतृत्व को लेकर असंतोष
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स्थानीय नेताओं की अनदेखी का आरोप
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संगठनात्मक फैसलों में भ्रम
सूत्रों और उनके बयानों के मुताबिक, बिट्टू को लगने लगा कि
कांग्रेस में न तो स्पष्ट नेतृत्व है और न ही पंजाब के लिए ठोस रणनीति।
बीजेपी में क्यों गए?

2024 के आम चुनाव से ठीक पहले रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन कर ली।
उनके बीजेपी जाने के मुख्य कारण माने जाते हैं:
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कांग्रेस नेतृत्व से मोहभंग
बिट्टू ने संकेत दिए कि पार्टी जमीनी नेताओं की सुन नहीं रही। -
राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका की चाह
बीजेपी में शामिल होने से उन्हें केंद्र की राजनीति में जगह मिली। -
सिक्योरिटी और नेशनलिज़्म नैरेटिव
बेअंत सिंह के परिवार से होने के कारण
आतंकवाद, राष्ट्रवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर
बीजेपी का नैरेटिव उनसे मेल खाता है—ऐसा माना जाता है। -
राजनीतिक भविष्य की गणना
पंजाब में कांग्रेस कमजोर,
आम आदमी पार्टी सत्ता में,
ऐसे में बिट्टू ने खुद को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ना बेहतर समझा।
बीजेपी में शामिल होने के बाद क्या मिला?
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बीजेपी ने उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया
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पार्टी के प्रवक्ता और आक्रामक चेहरे के रूप में आगे किया
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कांग्रेस और राहुल गांधी पर खुलकर हमला करने की भूमिका दी गई
यहीं से उनका कांग्रेस के खिलाफ रुख और तीखा हो गया।
सस्पेंड सांसदों का मुद्दा अब केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा।
रवनीत सिंह बिट्टू और राहुल गांधी के बीच हुई इस तीखी नोक-झोंक ने इसे एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की कोई जमीन बन पाती है या संसद का माहौल और अधिक टकरावपूर्ण होता जाएगा।
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