दिल से काम करता हूं, इसलिए SDM को थप्पड़ मारा , नरेश मीना अब जयपुर की और ..............

टोंक की इस जनसभा ने साफ कर दिया है कि नरेश मीणा का आंदोलन केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि किसानों, ग्रामीणों और कथित प्रशासनिक अन्याय से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में जयपुर कूच राजस्थान की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

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टोंक में भावुक हुए किसान नेता नरेश मीणा, जयपुर कूच का ऐलान— बोले: दिल से काम करता हूं, इसलिए थप्पड़ मारा

टोंक।
किसान नेता नरेश मीणा शुक्रवार को टोंक जिले के कोटड़ी मोड़ पर आयोजित एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए भावुक हो गए। मंच से बोलते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा, आंदोलन और जेल जाने की घटना को याद करते हुए कहा कि वे दिल से राजनीति करते हैं, दिमाग से नहीं

नरेश मीणा ने कहा,

“मैं दिल से काम करता हूं। अगर दिमाग लगाता तो एसडीएम को थप्पड़ नहीं मारता। जो दिल से काम करता है, वह किसी का बुरा नहीं सोच सकता।”

एसडीएम थप्पड़कांड पर फिर बोले मीणा

मीणा ने समरावता गांव की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय एसडीएम द्वारा जबरन वोट दिलवाए जा रहे थे, जिसका उन्होंने विरोध किया था। इसी दौरान गुस्से में उन्होंने एसडीएम को थप्पड़ मार दिया।

उन्होंने कहा कि यह मामला सामान्य धाराओं में दर्ज होना चाहिए था, लेकिन

“पूर्व लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के दबाव में मुझे करीब 8 महीने जेल में रखा गया।”

मीणा ने इसे राजनीतिक प्रताड़ना करार दिया और कहा कि उन्होंने किसी व्यक्तिगत द्वेष में नहीं, बल्कि जनता के हक में आवाज उठाई थी।

जयपुर कूच का ऐलान, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

जनसभा में नरेश मीणा ने जयपुर कूच आंदोलन का औपचारिक ऐलान किया। यह आंदोलन 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया जा रहा है, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • समरावता घटना में पीड़ितों को न्याय

  • पुलिस द्वारा वृद्ध महिला को थाने में पीटने के मामले की निष्पक्ष जांच

  • फसल बीमा योजना में सुधार

  • भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई

  • किसानों और ग्रामीणों से जुड़े स्थानीय मुद्दे

शामिल हैं।

“60 हजार वोट देने वालों के दुख में काम न आया तो राजनीति बेकार”

नरेश मीणा ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा,

“जिन लोगों ने मुझे 60 हजार वोट दिए, उनके दुख में अगर मैं काम न आया तो मेरी राजनीति बेकार है।”

उन्होंने कहा कि राजनीति सत्ता पाने का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम होनी चाहिए।

शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन का दावा

मीणा ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक होगा।
उन्होंने कहा,

“अनुशासन तोड़ने वाला गांधी जी का अपमान करेगा।”

साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की कि आंदोलन को दबाने की बजाय मांगों को गंभीरता से सुना जाए।

प्रशासन से बातचीत विफल, चेतावनी भी दी

मीणा ने बताया कि गुरुवार को जिला कलेक्टर और एसपी से बातचीत हुई थी, लेकिन किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई। प्रशासन को 24 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।

इस पर उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा,

“अगर मांगें नहीं मानी गईं तो सरकार का इंजन पटरी से उतार दूंगा।”

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

नरेश मीणा के इस बयान और जयपुर कूच के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। किसान संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके आंदोलन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।


टोंक की इस जनसभा ने साफ कर दिया है कि नरेश मीणा का आंदोलन केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि किसानों, ग्रामीणों और कथित प्रशासनिक अन्याय से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में जयपुर कूच राजस्थान की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।