बजट 2026-27: बड़ी घोषणाएँ, बड़े दावे — लेकिन क्या आम आदमी को मिली राहत?

यह बजट बताता है: सरकार का भरोसा अभी भी ट्रिकल-डाउन इकॉनमी पर है पहले विकास, बाद में राहत चुनावी लोकलुभावन घोषणाओं से दूरी लेकिन सवाल यह है: जब महंगाई आज है, तो राहत कल क्यों?

बजट 2026-27: बड़ी घोषणाएँ, बड़े दावे — लेकिन क्या आम आदमी को मिली राहत?

महंगाई, टैक्स और रोजगार के सवालों के बीच मोदी सरकार का बजट

नई दिल्ली |

देश की अर्थव्यवस्था जिस दौर से गुजर रही है, उसमें बजट 2026-27 को आम जनता, मध्यम वर्ग, किसान, युवा और कारोबारी वर्ग सभी बड़ी उम्मीदों से देख रहे थे। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किया गया यह बजट एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया—

 क्या यह बजट जनता की जेब तक पहुंचेगा या सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रहेगा?

 नौवां बजट, तीसरी सरकार और बड़ी जिम्मेदारी

यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है:

  • निर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट (मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए)

  • मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का अहम आर्थिक दस्तावेज

  • 2029 के आम चुनाव से पहले मिड-टर्म रोडमैप

सरकार का दावा है कि यह बजट:

विकास को रफ्तार देगा
 इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेगा
 निवेश बढ़ाएगा
 भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगा

लेकिन जमीनी हकीकत इससे कितनी मेल खाती है, यही इस रिपोर्ट का केंद्र है।

 बजट 2026-27 का कुल ढांचा (Big Picture)

सेक्टर आवंटन / नीति
कुल कैपेक्स (Infrastructure) ₹12.2 लाख करोड़ (रिकॉर्ड)
टैक्स रेवेन्यू लक्ष्य ₹44 लाख करोड़+
Fiscal Deficit नियंत्रित रखने का दावा
इनकम टैक्स स्लैब कोई बड़ा बदलाव नहीं 
GST यथावत
कृषि/ग्रामीण सीमित संरचनात्मक समर्थन
रोजगार अप्रत्यक्ष आश्वासन

 इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च — विकास या कॉरपोरेट बजट?

सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹12.2 लाख करोड़ खर्च का ऐलान किया है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 8–9% ज्यादा है।

 किन क्षेत्रों में जाएगा पैसा?

  • हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

  • मेट्रो और शहरी परिवहन

  • नेशनल हाईवे

  • लॉजिस्टिक्स पार्क

  • पोर्ट और एयरपोर्ट विकास

 फायदे

  • निर्माण क्षेत्र में रोजगार

  • निजी निवेश आकर्षित

  • GDP ग्रोथ को सपोर्ट

 सवाल

  • क्या ये नौकरियां स्थायी होंगी?

  • क्या ग्रामीण भारत को इसका सीधा फायदा मिलेगा?

  • क्या छोटे ठेकेदार और लोकल लेबर को हिस्सा मिलेगा?

 पिछले 5 बजटों का रिकॉर्ड बताता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ा, लेकिन बेरोजगारी दर में अपेक्षित गिरावट नहीं आई।

 इनकम टैक्स: सबसे बड़ा झटका मध्यम वर्ग को

 कोई नई टैक्स छूट नहीं

  • इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ी राहत नहीं

  • स्टैंडर्ड डिडक्शन पर भी स्पष्ट घोषणा नहीं

  • महंगाई के हिसाब से स्लैब रिवीजन नहीं

 पिछले बजटों से तुलना

वर्ष टैक्स स्लैब राहत
2022 नई टैक्स रिजीम
2023 सीमित राहत
2024 कोई बड़ी कटौती नहीं
2025 मामूली संशोधन
2026 लगभग यथास्थिति 

 लगातार पांचवां साल, जब मध्यम वर्ग को बड़ी टैक्स राहत नहीं मिली।

 असर

  • सैलरी क्लास पर बोझ

  • बचत घटेगी

  • उपभोग (consumption) प्रभावित

  • महंगाई के बीच आम आदमी की क्रय-शक्ति कमजोर

 महंगाई बनाम बजट — जमीन पर राहत क्यों नहीं?

सरकार कहती है कि महंगाई काबू में है, लेकिन:

  • खाद्य पदार्थ महंगे

  • गैस सिलेंडर ₹900+ पर

  • शिक्षा

  • स्वास्थ्य खर्च

  • ट्रांसपोर्ट

 बजट में इन पर कोई सीधी राहत नहीं:

 GST दरों में कटौती नहीं
 ईंधन पर टैक्स में राहत नहीं
 रोजमर्रा की वस्तुओं पर सब्सिडी नहीं

नतीजा:

बजट का असर आम रसोई तक नहीं पहुंचता।

 कृषि और ग्रामीण भारत: वादे ज्यादा, पैसा सीमित

 क्या मिला?

  • किसान क्रेडिट कार्ड सुधार

  • डिजिटल एग्रीकल्चर की बातें

  • ग्रामीण इंफ्रा को अप्रत्यक्ष समर्थन

 क्या नहीं मिला?

  • MSP पर ठोस गारंटी

  • कर्ज माफी

  • सिंचाई परियोजनाओं में बड़ा उछाल

  • ग्रामीण रोजगार योजना में बड़ा विस्तार

 पिछले बजटों की तरह यह बजट भी किसान को "भविष्य का भरोसा" देता है, वर्तमान की राहत नहीं।

 स्वास्थ्य और शिक्षा: ज़रूरी लेकिन सीमित

स्वास्थ्य

  • डिजिटल हेल्थ पर फोकस

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की बात

लेकिन:

  • सरकारी अस्पतालों की हालत

  • दवाओं की कीमत

  • ग्रामीण हेल्थ सेंटर

इन पर बजट का असर सीमित दिखता है।

शिक्षा

  • स्किल डेवलपमेंट

  • डिजिटल लर्निंग

लेकिन:

  • सरकारी स्कूल

  • कॉलेजों की फीस

  • प्रतियोगी परीक्षाओं का खर्च

इन मुद्दों पर बजट खामोश है।

 रोजगार: बजट का सबसे कमजोर पक्ष

सरकार रोजगार को लेकर:

  • स्टार्टअप

  • इंफ्रास्ट्रक्चर

  • मैन्युफैक्चरिंग

पर निर्भर दिखती है।

लेकिन: सरकारी नौकरियों की भर्ती योजना नहीं


 युवाओं के लिए सीधा रोजगार पैकेज नहीं


 बेरोजगारी भत्ता नहीं

 रोजगार का सवाल फिर टाल दिया गया।

 किसे फायदा, किसे नुकसान — साफ आकलन

 फायदे में

  • बड़ी कंपनियां

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर

  • कॉरपोरेट निवेशक

  • हाई-इनकम टैक्सपेयर्स (स्थिरता)

नुकसान में

  • मध्यम वर्ग

  • सैलरी क्लास

  • छोटे व्यापारी

  • युवा नौकरीपेशा

  • आम उपभोक्ता

 राजनीतिक संदेश क्या है?

यह बजट बताता है:

  • सरकार का भरोसा अभी भी ट्रिकल-डाउन इकॉनमी पर है

  • पहले विकास, बाद में राहत

  • चुनावी लोकलुभावन घोषणाओं से दूरी

लेकिन सवाल यह है:

जब महंगाई आज है, तो राहत कल क्यों?

विकास का बजट, राहत का नहीं

Budget 2026-27:

 आर्थिक रूप से अनुशासित है
 निवेश-अनुकूल है
 इंफ्रास्ट्रक्चर-फोकस्ड है

लेकिन:

 यह आम आदमी का बजट नहीं
 यह महंगाई से जूझते परिवारों का बजट नहीं
 यह मिडिल क्लास की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता