भारत सरकार लेकर आ रही है नए ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम — ऑनलाइन अश्लीलता, हिंसा और आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाम
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन अश्लीलता और आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट पर रोक लगाने के लिए Draft IT (Digital Code) Rules, 2026 तैयार किए हैं। नए नियमों में सभी डिजिटल कंटेंट की उम्र-आधारित रेटिंग, पैरेंटल कंट्रोल और एज वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है।
डिजिटल अश्लीलता पर सख्ती: केंद्र सरकार लाई Draft IT (Digital Code) Rules 2026, उम्र के हिसाब से कंटेंट रेटिंग अनिवार्य
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने ऑनलाइन अश्लीलता (obscenity) और आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए ड्राफ्ट IT (Digital Code) Rules, 2026 तैयार किए हैं, जिनका प्रस्तावित मसौदा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पेश किया है। इन नियमों का मकसद डिजिटल दुनिया में फैलते अश्लील, भड़काऊ तथा अनुचित कंटेंट को रोकना और समस्त डिजिटल कंटेंट को उम्र के अनुसार वर्गीकृत करना है, ताकि यूजर्स — खासकर नाबालिग — सुरक्षित इंटरनेट अनुभव प्राप्त कर सकें।

प्रस्तावित नियमों के मुख्य बिंदु
नई ड्राफ्ट कोड के अनुसार सभी डिजिटल कंटेंट — जैसे वीडियो, पोस्ट, इमेज, रील, वेब-सीरीज़, ब्लॉग आदि — को पहले उम्र आधार पर रेट करना आवश्यक होगा। इसके लिए कंटेंट को इस प्रकार लक्षित श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा:
U (सभी उम्र के लिए)
7+ (7 वर्ष से अधिक)
13+ (13 वर्ष से अधिक)
16+ (16 वर्ष से अधिक)
Adult-only (केवल वयस्कों के लिए)
और कुछ पेशेवर श्रेणियां भी शामिल होंगी।
उम्र-रेटिंग के साथ-साथ हर कंटेंट पर कंटेंट-डिस्क्रिप्टर भी दिखाना होगा, जैसे हिंसा, सेक्स, नग्नता, भयानक दृश्य या नशीले पदार्थ आदि, ताकि दर्शक पहले से निर्णय ले सकें। रेटिंग U/A 13+ या उससे ऊपर के कंटेंट पर पैरेंटल कंट्रोल का प्रावधान और वयस्क सामग्री पर उम्र सत्यापन (Age Verification) सिस्टम भी लागू होगा।

क्या प्रतिबंधित होगा?
ड्राफ्ट नियमों में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित तरह के कंटेंट को अश्लील, भद्दा या आपत्तिजनक माना गया है और ऐसे कंटेंट पर रोक लगाई जाएगी:
अश्लील या घटिया दृश्यों का प्रसारण
किसी जाति, धर्म, समुदाय, रंग, भाषा या राष्ट्रीयता को अपमानित करने वाला कंटेंट
महिलाओं, बच्चों या दिव्यांगों का अपमान या यौन-उन्मुख सामग्री
हिंसा, अपराध या अव्यवस्था को आकर्षक या वांछनीय दिखाने वाला कंटेंट
झूठा, आपत्तिजनक या भड़काऊ संदेश फैलाने वाला कंटेंट
कानूनी आधार

इस ड्राफ्ट नियम को IT Act, 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित किया गया है, और यह नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19(1)(a)) का सम्मान करते हुए, संविधान के तहत सुरक्षित प्रतिबंध (Article 19(2)) लागू करने का प्रयास है। इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जहां मार्च 2025 में इस विषय पर चिंता जताई गई थी और कोर्ट ने उचित नियम बनाने का निर्देश दिया था।
क्यों लाए जा रहे ये नियम?
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील, भड़काऊ और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार बढ़ा है, जिससे नाबालिगों तथा समाज पर नैतिकता से जुड़े दुष्प्रभाव होने की आशंका है। इन नियमों का उद्देश्य है कि इंटरनेट पर उपलब्ध सभी सामग्री स्वच्छ, स्पष्ट और उम्र-अनुरूप हो, जिससे यूजर को अच्छी और सुरक्षित इंटरनेट अनुभव मिले।

