राजस्थान JE भर्ती में दोबारा पेपर लीक, SOG का बड़ा खुलासा | संगठित गिरोह सक्रिय
राजस्थान JE भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का बड़ा खुलासा। SOG जांच में सामने आया कि दिसंबर 2020 में निरस्त परीक्षा के बाद 12 सितंबर 2021 की पुनः परीक्षा का प्रश्नपत्र भी लीक हुआ था। संगठित गिरोह, करोड़ों की वसूली और PWD अधिकारी तक जांच के घेरे में।
राजस्थान की सरकारी भर्ती परीक्षाओं पर एक बार फिर पेपर लीक का गंभीर संकट सामने आया है। विशेष कार्य दल (SOG) की गहन जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कनिष्ठ अभियंता (JE) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 दिसंबर में निरस्त होने के बावजूद, वही संगठित गिरोह 12 सितंबर 2021 को हुई पुनः परीक्षा में भी सक्रिय रहा। जांच में यह भी सामने आया कि यही गिरोह सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 में भी लिप्त था। SOG के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल के अनुसार, जब पहली निरस्त परीक्षा में सफल रहे अभ्यर्थी दूसरी परीक्षा में भी टॉप रैंक में पाए गए, तब शक गहराया और जांच में सामने आया कि दूसरी परीक्षा का प्रश्नपत्र भी पहले ही लीक हो चुका था।

दिसंबर 2020 में आयोजित JE भर्ती परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद RPSC को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और सांगानेर थाने में FIR दर्ज की गई थी। इससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया और सरकार को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। इसके बावजूद 12 सितंबर 2021 को हुई पुनः परीक्षा में भी वही गिरोह सक्रिय रहा और कोचिंग सेंटरों के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र पहले ही उपलब्ध करा दिए गए।
19 जनवरी 2026 को SOG ने इस मामले में नया FIR दर्ज कर जगदीश विश्नोई (निवासी सांचौर, जालौर) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पेपर लीक की पूरी साजिश स्वीकार की। जांच में गणपतलाल विश्नोई का नाम भी सामने आया, जो लोक निर्माण विभाग (PWD) में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत है। गणपतलाल ने JE भर्ती में 12वीं रैंक हासिल की थी और बाद में पदोन्नति भी पाई, जिससे उसकी मेरिट और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
SOG के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय है और प्रति अभ्यर्थी 5 से 25 लाख रुपये तक वसूली करता था। अनुमान है कि यह काला कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक फैल चुका है। राजस्थान में पिछले वर्षों में पटवार, REET, JE, SI और अन्य परीक्षाओं में हुए पेपर लीक से 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं और सरकारी खजाने को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है।
राजस्थान सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, बार-बार सामने आ रहे मामलों ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था, कोचिंग माफिया और सिस्टम में मौजूद भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। SOG अब पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने में जुटी है और अभ्यर्थी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
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