जयपुर में ACB ने किया एक और भ्रष्टाचार उजागर, RTO इंस्पेक्टर रिश्वत गिरोह का हुआ भंडाफोड़
राजधानी जयपुर सहित पूरे राजस्थान के परिवहन विभाग (RTO) में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने RTO अधिकारियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ जांच तेज़ कर दी है। जांच में सेवाओं के बदले अवैध वसूली और आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिले हैं। कई अधिकारियों, एजेंटों और दलालों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
जयपुर समेत राजस्थान के RTO विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, ACB ने जांच तेज़ की
जयपुर : राजधानी जयपुर समेत पूरे राजस्थान के परिवहन विभाग (RTO) में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला फिर से सुर्खियों में आया है, जिसमें एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने RTO अधिकारियों और उनके नेटवर्क से जुड़े भ्रष्टाचार के संकेत मिलने पर जांच तेज़ कर दी है। जांच में पता चला कि कुछ RTO कर्मियों ने काम रोककर और सेवाओं के बदले अवैध वसूली की, साथ ही आय से अधिक संपत्ति भी जुटाई है, जिससे मामला गंभीर भ्रष्टाचार का बन गया है।

ACB ने पिछले साल जयपुर में परिवहन विभाग के सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) संजय शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और रिश्वत के आरोपों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में राजस्थान और उत्तर प्रदेश दोनों में 10 से अधिक ठिकानों पर तलाशी ली गई और करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्ति बरामद हुई, जो कथित तौर पर रिश्वत और भ्रष्टाचार से अर्जित बताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि ये अधिकारी नियमित दस्तावेज़ीकरण और लाइसेंस प्रक्रियाओं में अड़चन पैदा कर मोटी रकम वसूलते थे, और कई शिकायतें ACB तक पहले भी पहुंच चुकी थीं। इसके अलावा राजस्थान के RTO ऑफिसों में भ्रष्टाचार के कई घोषित मामले और शिकायतें पहले भी सार्वजनिक हो चुके हैं, जहाँ बिना पैसे दिए वाहन से संबंधित काम कराना मुश्किल बताया गया है।
हालाकिं RTO विभाग में कई मामलों में दस्तावेज़ क्रियाओं के बदले रिश्वत की मांग सामान्य हो गई थी, जिससे लोग अवैध तरीकों का सहारा ले रहे थे। जिस वजह से कर्मचारियों का नियमों की सख्ती से अनुपालन न करना और एजेंटों पर काम का पूरा नियंत्रण छोड़ देना, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता रहा। इसका असर यह हुआ की कई शिकायतों के बावजूद विभागीय निगरानी और समय पर कार्रवाई का अभाव भ्रष्ट अभ्यास को और फैलाता रहा।
इससे कुछ दस्तावेज़ दलालों और रिश्वतखोर कर्मचारियों को निरंतर अवैध निधि और संपत्ति अर्जित करने का अवसर मिला। आरोपियों ने अपनी आय और नेटवर्क दोनों का विस्तार किया, जिससे भ्रष्ट तंत्र और मज़बूत होता गया। और इसका सीधा असर साधारण जनता को हुआ, क्योंकि लाइसेंस, पंजीकरण और अन्य परिवहन सेवाओं को हासिल करने में लंबा इंतजार और रिश्वत देना पड़ा।

जिससे सरकारी विभागों की छवि और विश्वसनीयता को भारी धक्का लगा। ACB की लगातार कार्रवाइयों के कारण कई अधिकारियों पर मुकदमे और जांचें तेज़ हुईं, जिससे विभाग में अस्थिरता पैदा हुई।

आगे की कार्रवाई में, ACB जांच को जारी रखते हुए दूसरे RTO कर्मियों, एजेंटों और शिकायतकर्ताओं के बयान ले रही है। दोषियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी और विभाग में भ्रष्टाचार रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि आम जनता को निष्पक्ष सेवा मिल सके।

