पिता ने बेटी को दिया अनोखा तोहफा, 3 किलो चांदी से बना 25 लाख का कार्ड वायरल, जानिए खासियत

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पिता ने बेटी को दिया अनोखा तोहफा, 3 किलो चांदी से बना 25 लाख का कार्ड वायरल, जानिए खासियत

राजस्थान की शाही शादियों में परंपरा, आस्था और वैभव का संगम हमेशा से देखने को मिलता है। जयपुर के शिव जौहरी ने अपनी बेटी श्रुति जौहरी की शादी के लिए ऐसा अनोखा निमंत्रण पत्र बनवाया है, जो सिर्फ एक कार्ड नहीं, बल्कि विरासत और कला का चलता‑फिरता नमूना बन गया है।

3 किलो चांदी से बना शाही निमंत्रण पत्र

जयपुर निवासी शिव जौहरी ने अपनी बेटी की शादी के निमंत्रण के लिए 3 किलो शुद्ध चांदी से विशेष बॉक्सनुमा कार्ड बनवाया है।

  • यह कार्ड 8x6.5 इंच साइज और 3 इंच गहराई का है, जिसे एक खूबसूरत चांदी के बॉक्स के रूप में डिजाइन किया गया।

  • पूरे निमंत्रण पत्र पर 65 देवी‑देवताओं की बेहद बारीक मूर्तियां उकेरी गई हैं, जिन्हें अनुभवी कारीगरों ने हाथ से तैयार किया।

  • इस खास कार्ड को 128 अलग‑अलग चांदी के टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है, जो इसे एक अनोखी थ्री‑डी संरचना का रूप देता है।

शिव जौहरी के अनुसार, इस निमंत्रण पत्र को तैयार करने में केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि भावनाएं और आस्था भी निवेश की गई हैं। यह कार्ड किसी सामान्य शादी कार्ड की तरह कुछ दिनों में भुला नहीं दिया जाएगा, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी के लिए एक स्मृति बन कर रहेगा।

6 महीने की सोच, 1 साल की मेहनत

शिव जौहरी बताते हैं कि जब बेटी श्रुति का रिश्ता निश्चत हुआ, तो उनके पिता ने उनसे कहा कि “बच्ची को ऐसी नायाब चीज दोगे, जिसे उसकी आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें।”

  • इसी एक प्रेरणा ने उन्हें एक साधारण कार्ड के बजाय कुछ अनोखा, परंपरागत और धार्मिक महत्व वाला निमंत्रण पत्र बनाने के लिए प्रेरित किया।

  • वे बताते हैं कि केवल यह सोचने और कॉन्सेप्ट तय करने में ही लगभग 6 महीने का समय लग गया।

  • इसके बाद करीब एक वर्ष तक लगन, कला और सूक्ष्म कारीगरी के साथ इस सिल्वर इंविटेशन बॉक्स पर काम हुआ।

शिव जौहरी का कहना है कि यह सिर्फ बेटी की शादी का कार्ड नहीं, बल्कि उनके परिवार की आस्था, परंपरा और शिल्पकला के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

25 लाख रुपये की लागत, केवल चांदी का इस्तेमाल

इस अनोखे निमंत्रण पत्र को तैयार करने में लगभग 25 लाख रुपये का खर्च आया।

  • पूरे बॉक्स में लगभग 3 किलो चांदी का उपयोग किया गया, और खास बात यह है कि इसमें चांदी के अतिरिक्त किसी अन्य धातु का प्रयोग नहीं किया गया।

  • कार्ड की संरचना, बॉर्डर, उकेरी गई मूर्तियां, सभी कुछ चांदी से ही निर्मित हैं, जिससे यह एक प्रीमियम, कलेक्टेबल और लंबे समय तक संरक्षित रहने योग्य कला‑वस्तु बन जाती है।

यह निवेश केवल वैभव दिखाने के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसी स्मृति बनाने के लिए किया गया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां अपने पारिवारिक इतिहास के हिस्से के रूप में संजोकर रख सकें।

64–65 देवी‑देवताओं की मूर्तियां: आस्था से जुड़ा डिज़ाइन

शिव जौहरी ने इस कार्ड का धार्मिक कॉन्सेप्ट रामायण से प्रेरित होकर तैयार कराया।

  • उनका कहना है कि जैसे अयोध्या के राजा श्रीराम और मिथिला की जनक पुत्री सीता के विवाह में राजा जनक ने 64 देवी‑देवताओं को विवाह में निमंत्रण दिया था, उसी परंपरा और भावना को ध्यान में रखते हुए इस कार्ड पर भी 64 देवी‑देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं।

  • इसमें विभिन्न देवी‑देवताओं की सूक्ष्म नक्काशी की गई है, जो न केवल धार्मिकता को दर्शाती है, बल्कि भारतीय शिल्पकला की गहराई को भी सामने लाती है।

कार्ड पर देवी‑देवताओं को उकेरने के पीछे उद्देश्य केवल सजावट नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि विवाह सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, परंपराओं और देवताओं की साक्षी में होने वाला पवित्र संस्कार है।

बिना कील‑पेंच, पूरी तरह पारंपरिक शिल्पकला

धातु से कोई भी संरचना बनाते समय आमतौर पर कील, पेंच या जोड़ने के लिए अन्य सहायक धातुओं का प्रयोग किया जाता है।

  • लेकिन इस अनोखे निमंत्रण पत्र की विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की कील या पेंच का इस्तेमाल नहीं किया गया।

  • पूरा बॉक्स 128 चांदी के टुकड़ों को पारंपरिक शिल्प तकनीकों से जोड़कर तैयार किया गया है, जिससे यह एक मजबूत, सटीक और कलात्मक संरचना के रूप में सामने आता है।

यह शैली राजस्थान की पारंपरिक कारीगरी और मेटलक्राफ्ट की श्रेष्ठता को दर्शाती है, जिसमें बिना आधुनिक मशीनरी के भी अत्यंत बारीक और सूक्ष्म काम किया जाता है।

जयपुर की शिल्प विरासत और यह अनोखा कार्ड

जयपुर पहले से ही अपनी ज्वैलरी, मिनिएचर पेंटिंग, नक्काशी और मेटलवर्क के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।

  • यह चांदी का निमंत्रण पत्र इस बात का प्रमाण है कि शहर के कारीगर आज भी परंपरा और आधुनिक जरूरतों को मिलाकर नायाब चीजें तैयार कर सकते हैं।

  • ऐसा कार्ड सिर्फ शादी का निमंत्रण नहीं, बल्कि जयपुर की शिल्प विरासत का चलता‑फिरता उदाहरण है, जो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी खूब चर्चा का विषय बन रहा है।

राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी कहलाने वाले जयपुर के लिए यह निमंत्रण पत्र गर्व की बात है, जो वैश्विक स्तर पर भी “रॉयल वेडिंग इन्विटेशन” के रूप में पहचान बना सकता है।

परिवार, परंपरा और पीढ़ियों तक चलने वाली स्मृति

शिव जौहरी ने अपनी बेटी के लिए जो सिल्वर कार्ड बनवाया है, वह केवल एक शादी की औपचारिकता नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक निवेश है।

  • वे स्वयं कहते हैं कि उनकी इच्छा थी कि यह “नायाब चीज” उनकी बेटी की आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें और अपने पूर्वजों की सोच और परंपरा को महसूस कर सकें।

  • ऐसे समय में जब अधिकतर शादियों के कार्ड कुछ दिनों या हफ्तों में कूड़े में चले जाते हैं, यह चांदी का कार्ड परिवार की धरोहर बनकर ट्रंक, लॉकर या शोकेस में पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेगा।

यह उदाहरण आज के समय में उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो अपनी शादियों को केवल खर्चीला कार्यक्रम नहीं, बल्कि परंपरा, कला और संस्कृति को जोड़ने वाला अवसर मानते हैं।