डमी कैंडिडेट और बैक-डेट मार्कशीट से बने सरकारी टीचर, अब होंगे SOG की गिरफ्त में!

जयपुर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां दो विश्वविद्यालयों पर बैक-डेट के साथ मार्कशीट और डिग्री जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) इस मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में अवैध लाभ के लिए किया गया। जांच में कई संदिग्ध विश्वविद्यालय, एजेंट और लाभार्थी अभ्यर्थी रडार पर हैं।

डमी कैंडिडेट और बैक-डेट मार्कशीट से बने सरकारी टीचर, अब होंगे SOG की गिरफ्त में!

जयपुर में शैक्षणिक घोटाला! बैक-डेट मार्कशीट मामले में दो यूनिवर्सिटी SOG के रडार पर

जयपुर : राजधानी जयपुर में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा शैक्षणिक घोटाला सामने आया है, जिसमें दो विश्वविद्यालयों पर बैक-डेट के साथ मार्कशीट जारी करने के आरोप लगे हैं और यह मामला अब राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में है। इस मामले ने शिक्षा प्रणाली में भेदभाव और धोखे से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से छात्रों और भर्ती अभ्यर्थियों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी या अन्य विश्वविद्यालयों ने प्रमाणपत्रों और मार्कशीट्स को असल तारीख के बजाय पिछली तारीख (back-date) के साथ जारी किया। इन मार्कशीट्स का इस्तेमाल सरकारी भर्ती परीक्षाओं, रोज़गार आवेदन और अन्य शैक्षणिक जरूरतों में किया गया, जिससे भर्ती प्रक्रियाओं में अवैध लाभ मिला। इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए पुलिस ने SOG जांच शुरू की और पाया कि यह शैक्षणिक दस्तावेज़ धोखाधड़ी का एक भाग है, जिसमें बैक-डेटेड मार्कशीट और डिग्रियों के दुरुपयोग के सिलसिले में जांच बढ़ाई जा रही है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ लोग रोज़गार, भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में सच्चे उम्मीदवारों से आगे निकलने के लिए मार्कशीट्स को पिछली तारीख के साथ पेश कर रहे थे, जिससे उन्हें फ़ायदा हासिल हो सके। इस तरह के दस्तावेज़ों से भर्ती बोर्ड, विश्वविद्यालय और परीक्षा एजेंसियों के नियमों की हद तक अनुपालना कमजोर होती है, और इसका फायदा अक्सर अनुचित तरीके से नौकरी या शिक्षा प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को मिलता है। इसी तरह के धोखाधड़ी के मामलों में अक्सर फर्जी डिग्री या मार्कशीट का नेटवर्क बनाया जाता है, जैसा पहले दिल्ली में पुलिस ने फर्जी डिग्री रैकेट में 275 से अधिक दस्तावेज जब्त किए थे और पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।

इस तरह के “बैक-डेट” दस्तावेज़ का फ़ायदा उन कुछ अभ्यर्थियों को मिलता है जिन्होंने गलत तरीके से भर्ती परीक्षाओं में आवेदन किया या नौकरी पाने में लाभ उठाया।और इसका सबसे बड़ा नुकसान इमानदार छात्रों और उम्मीदवारों को होता है, क्योंकि उचित प्रक्रिया का पालन करने वाले लोग पीछे रह जाते हैं।  कृत्यों से शैक्षणिक प्रतिष्ठा और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता घटती है, जिससे देश के शिक्षा सेक्टर की छवि प्रभावित होती है। भर्ती प्रक्रियाओं में भेदभाव और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है, जिससे शासन-प्रशासन पर सवाल उठते हैं।

SOG ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज़ कर दी है और कई संदिग्ध यूनिवर्सिटी तथा उनके अधिकारी/मध्यस्थों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। पुलिस की नजर उन अभ्यर्थियों पर भी है जिन्होंने इन दस्तावेज़ों का उपयोग किया है, ताकि भर्ती नियमों के उल्लंघन में उचित कार्रवाई की जा सके।