गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की दर्दनाक मौत: ऑनलाइन गेमिंग की लत ने फिर खड़े किए गंभीर सवाल
गाजियाबाद में एक ही परिवार की तीन नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रारंभिक जांच में ऑनलाइन गेमिंग की लत, डिजिटल एडिक्शन और मानसिक दबाव जैसे पहलू सामने आए हैं। पुलिस मोबाइल और डिजिटल डेटा की गहन जांच कर रही है।
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत ने उठाए ऑनलाइन गेमिंग और पैरेंटल निगरानी पर गंभीर सवाल
गाजियाबाद |
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। भारत सिटी सोसाइटी के बी-1 टावर में रहने वाले एक परिवार की तीन नाबालिग बेटियों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, तीनों बहनों के शव सोसाइटी परिसर में मिले, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मृतक बहनों की पहचान 16 वर्षीय निशिका (विशिका), 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी के रूप में हुई है। तीनों सगी बहनें थीं और अपने माता-पिता के साथ फ्लैट नंबर 907 में रहती थीं। घटना के समय माता-पिता घर पर ही मौजूद थे।
प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया

पुलिस की शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों के मुताबिक, तीनों बहनें लंबे समय से मोबाइल गेमिंग में अत्यधिक रुचि रखती थीं। परिवार का कहना है कि कोरोना काल के दौरान मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स के प्रति उनकी लत बढ़ती गई थी। इसको लेकर घर में कई बार समझाइश और विवाद भी हुआ।
पुलिस को मौके से एक नोट भी मिला है, जिसमें माता-पिता से माफी मांगने जैसे भावनात्मक शब्द लिखे होने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाज़ी होगी और नोट की हैंडराइटिंग व डिजिटल एंगल से जांच की जा रही है।
मोबाइल और डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
तीनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और उन्हें डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
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वे किन ऐप्स और गेम्स का इस्तेमाल कर रही थीं
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किसी तरह का ऑनलाइन दबाव, टास्क या साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन तो नहीं था
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हाल के दिनों में उनके व्यवहार में क्या बदलाव आए
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग या किसी विशेष ऐप को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना जांच पूरी होने से पहले सही नहीं होगा।
परिवार सदमे में
मृतक बहनों के पिता चेतन कुमार का कहना है कि बेटियां पढ़ाई से दूर होती जा रही थीं और मोबाइल पर काफी समय बिताती थीं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि परिवार उन्हें रोकने और समझाने की कोशिश करता रहा, लेकिन हालात धीरे-धीरे बिगड़ते चले गए। घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है।
क्यों यह मामला गंभीर है

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि बढ़ती डिजिटल लत, बच्चों की मानसिक सेहत और पैरेंटल निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किशोरावस्था में बच्चे भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं और ऑनलाइन दुनिया का प्रभाव उन पर तेजी से पड़ता है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार:
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अत्यधिक गेमिंग से बच्चों में आइसोलेशन, चिड़चिड़ापन और अवसाद बढ़ सकता है
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वर्चुअल दुनिया कई बार वास्तविक जीवन से ज्यादा “महत्वपूर्ण” लगने लगती है
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समय रहते बातचीत और काउंसलिंग न हो, तो हालात गंभीर हो सकते हैं
पुलिस की अपील
गाजियाबाद पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखें, उनसे खुलकर बातचीत करें और किसी भी तरह के व्यवहारिक बदलाव को हल्के में न लें। मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।
संदेश (Social Message)
यह घटना हमें जगाने के लिए
मोबाइल और इंटरनेट आज ज़रूरत हैं, लेकिन बिना संवाद और निगरानी के ये बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
माता-पिता से अपील:
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बच्चों के फोन “चेक” नहीं, “समझ” के साथ देखें
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डांट नहीं, संवाद कीजिए
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अकेलेपन, चुप्पी, गुस्से को नज़रअंदाज़ न करें
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ज़रूरत पड़े तो काउंसलर से मदद लें
अगर किसी बच्चे या किशोर में आत्मघाती विचार दिखाई दें, तो तुरंत पेशेवर मदद लें।
☎️ हेल्पलाइन
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किरण मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 9152987821
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चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
एक समय पर की गई बातचीत, एक पूरी जिंदगी बचा सकती है।
(यह रिपोर्ट पुलिस के प्रारंभिक बयानों, परिजनों की जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।)
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