ब्रिटेन में भारतीय मूल के घरों की आय और संपत्ति सबसे अधिक — LSE रिपोर्ट में बड़ा Economic योगदान उजागर

ब्रिटेन में भारतीय मूल के परिवार सबसे अमीर जातीय समूहों में शामिल हो गए हैं। LSE की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक में Indian-origin households की संपत्ति लगभग दोगुनी हो गई है, जो UK की अर्थव्यवस्था में उनकी मजबूत भागीदारी को दर्शाती है।

ब्रिटेन में भारतीय मूल के घरों की आय और संपत्ति सबसे अधिक — LSE रिपोर्ट में बड़ा Economic योगदान उजागर

ब्रिटेन में भारतीय मूल वाले घरों (Indian-origin households) की आय और संपत्ति सबसे अधिक पाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह खुलासा लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) की एक नई रिपोर्ट में हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि भारतीय समुदाय के घर सबसे अमीर जातीय समूहों में से एक बन चुके हैं, जो ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

 क्या कहती है रिपोर्ट ?

रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक में ब्रिटेन में भारतीय मूल वाले घरों की कुल संपत्ति में धाकड़ वृद्धि हुई है।
2012–14 के दौर में भारतीय घरों की औसत संपत्ति GBP 93,000 थी।
2021–23 के बीच यह लगभग GBP 206,000 तक पहुंच गई — यानी लगभग दोगुना बढ़ोतरी हुई।

यह वृद्धि अन्य जातीय समूहों की तुलना में सबसे तेज़ रही। उदाहरण के लिए,
 White British घरों की संपत्ति GBP 125,000 से GBP 177,000 तक बढ़ी,
जबकि कई अन्य समूहों में संपत्ति उतनी तेज़ नहीं बढ़ी या स्थिर रही।

 क्यों हुआ इतना बड़ा उछाल?

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संपत्ति वृद्धि के मुख्य कारणों में शामिल हैं:

घरों और रियल एस्टेट में निवेश — भारतीय परिवारों में घर के मालिक बनने की दर अधिक रही।

दीर्घकालिक वित्तीय निवेश और स्मार्ट संपत्ति रणनीतियाँ, जिनसे संपत्ति की वास्तविक कीमतों में बढ़ोतरी का लाभ मिला।

इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा आय के स्रोत से ज़्यादा सक्रिय बचत से नहीं, बल्कि मूल्यों में वृद्धि और संपत्ति के मूल्य संवर्द्धन से आया है।

 अन्य समूहों के साथ तुलना

LSE की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संपत्ति वृद्धि की दर सभी समूहों में समान नहीं रही।
 कुछ समूह, जैसे Black African, Black Caribbean और Bangladeshi, के घरों की संपत्ति बहुत कम रही।
 Pakistani समुदाय में median wealth में गिरावट भी देखी गई है।

इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि ब्रिटेन में भारतीय मूल के परिवारों ने आर्थिक रूप में तेजी से तरक्की की है और वे वर्तमान में देश के सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक भागीदारों में से एक बन चुके हैं।