पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का निधन: राजस्थान की राजनीति ने खोया एक अनुभवी और जमीन से जुड़ा नेता

राजस्थान के पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे कैंसर से जूझ रहे थे और चेन्नई में इलाज चला था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहरा शोक जताया। आज दोपहर पैतृक गांव में अंतिम संस्कार होगा।

पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का निधन: राजस्थान की राजनीति ने खोया एक अनुभवी और जमीन से जुड़ा नेता

अलवर।
राजस्थान की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का आज सुबह करीब 7 बजे निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और इलाज के लिए चेन्नई में उपचाररत थे। हाल के दिनों में स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद के बीच उन्हें अलवर स्थित निवास पर लाया गया था, जहां आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर 12:30 बजे उनके किशनगढ़बास के पास स्थित पैतृक गांव में पूरे राजकीय व सामाजिक सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक, सामाजिक और ग्रामीण क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।

राजनीतिक जीवन: जमीन से जुड़ा जननेता

हेमसिंह भड़ाना को राजस्थान की राजनीति में एक साफ-सुथरी छवि, सहज व्यवहार और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता था।
वे लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहे और पूर्व मंत्री के रूप में सरकार में जिम्मेदार पद संभाल चुके थे। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने—

  • ग्रामीण विकास

  • किसान हित

  • क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे

  • आमजन की समस्याओं

को प्राथमिकता दी।

सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में उन्हें अक्सर “सुनने वाला नेता” कहा जाता था—जो जनता की बात को गंभीरता से सुनता और समाधान की कोशिश करता था।

बीमारी से संघर्ष और अंतिम समय

परिवारिक सूत्रों के अनुसार, हेमसिंह भड़ाना पिछले काफी समय से कैंसर का इलाज करवा रहे थे।
इलाज के दौरान उन्हें चेन्नई ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचार चला। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव के बीच कुछ दिन पहले उन्हें अलवर स्थित आवास पर शिफ्ट किया गया था।

उनकी स्थिति पर राज्य सरकार भी लगातार नजर बनाए हुए थी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया शोक

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूर्व मंत्री के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा—

“पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें।”

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि जब हेमसिंह भड़ाना अस्पताल में भर्ती थे, उस दौरान उन्होंने स्वयं उनकी कुशलक्षेम पूछी थी और डॉक्टरों को बेहतर से बेहतर इलाज के निर्देश दिए थे।

राजनीतिक जगत में शोक की लहर

पूर्व मंत्री के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर—

  • “एक सरल और सुलझे हुए नेता”

  • “ग्रामीण राजनीति की मजबूत आवाज”

  • “जनता के बीच रहने वाला जनसेवक”

जैसे शब्दों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।

कई नेताओं ने उनके साथ के राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि भड़ाना विचारधारा से ऊपर उठकर संवाद में विश्वास रखने वाले नेता थे।

क्षेत्र के लिए क्या मायने रखता है उनका जाना?

किशनगढ़बास और अलवर क्षेत्र में हेमसिंह भड़ाना का प्रभाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी रहा।
उनका जाना—

  • क्षेत्रीय नेतृत्व में एक खालीपन

  • अनुभवी मार्गदर्शक की कमी

  • और राजनीति में शालीनता की एक आवाज का कम होना

माना जा रहा है।

हेमसिंह भड़ाना का निधन सिर्फ एक पूर्व मंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की राजनीति के एक अनुभवी, शांत और जमीन से जुड़े अध्याय का अंत है।
उनका जीवन संघर्ष, सेवा और संवाद का उदाहरण रहा। आज उनका पार्थिव शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो जाएगा, लेकिन उनकी स्मृति और योगदान क्षेत्र की राजनीति और समाज में लंबे समय तक जीवित रहेंगे।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।