IPS से राजनीति तक: के. अन्नामलाई ने क्यों छोड़ी चुनावी जिम्मेदारी? क्या अन्नामलाई पीछे हट रहे हैं?

पूर्व IPS अफसर और तमिलनाडु भाजपा के प्रमुख चेहरे के. अन्नामलाई ने पिता की खराब सेहत के चलते छह विधानसभा क्षेत्रों की चुनावी जिम्मेदारी छोड़ी। जानिए ‘सिंघम’ से राजनीति तक का सफर और इस फैसले के सियासी मायने।

IPS से राजनीति तक: के. अन्नामलाई ने क्यों छोड़ी चुनावी जिम्मेदारी? क्या अन्नामलाई पीछे हट रहे हैं?

के. अन्नामलाई: ‘सिंघम’ से सियासत तक… और अब परिवार के सामने ठहराव

तमिलनाडु की राजनीति में के. अन्नामलाई ऐसा नाम है, जो बहुत कम वक्त में पहचान से आगे बढ़कर प्रतीक बन गया। एक ऐसा चेहरा, जिसने वर्दी उतारी तो पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति में कदम रखा तो सीधे फ्रंटफुट पर खेला। लेकिन अब, 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, अन्नामलाई का एक फैसला सियासी हलकों में नए सवाल खड़े कर रहा है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु भाजपा के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में शामिल अन्नामलाई ने छह विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी पद से खुद को अलग कर लिया है। वजह बताई गई है—पिता की खराब सेहत। लेकिन राजनीति में हर फैसला सिर्फ निजी नहीं माना जाता, इसलिए इस कदम को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है।

वर्दी में ‘सिंघम’, सियासत में आक्रामक आवाज़

के. अन्नामलाई ने कर्नाटक कैडर में आईपीएस रहते हुए जिस तरह काम किया, उसने उन्हें ‘सिंघम’ की छवि दी। माफिया, अवैध खनन और संगठित अपराध के खिलाफ उनकी कार्रवाईयों की चर्चा सिर्फ प्रशासनिक दायरों तक सीमित नहीं रही। 2019 में अचानक नौकरी छोड़ने का फैसला भी उसी तरह चौंकाने वाला था, जैसे बाद में भाजपा जॉइन करना।

2020 में भाजपा में शामिल होते ही अन्नामलाई को “सिर्फ नेता” नहीं, बल्कि मिशन तमिलनाडु का एक अहम मोहरा माना गया। एक ऐसा राज्य, जहां भाजपा की जड़ें कमजोर रही हैं, वहां अन्नामलाई ने आक्रामक राजनीति, तेज बयानबाज़ी और ज़मीनी सक्रियता से पार्टी को नया चेहरा दिया।

कौन हैं के. अन्नामलाई?


के. अन्नामलाई का पूरा नाम अन्नामलाई कुप्पुसामी है.उनका जन्म 4 जून 1984 को तमिलनाडु के करूर जिले में एक कृषक परिवार में हुआ. उन्‍होंने कोयंबटूर के PSG कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग बीटेक किया और फिर IIM लखनऊ से MBA किया. इसके बाद उन्‍होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा (UPSC CSE)में सफलता हासिल की और इस तरह 2011 बैच के IPS अधिकारी बने.उन्‍हें कर्नाटक कैडर आवंटित किया गया.

चुनाव से पहले जिम्मेदारी छोड़ना: संयोग या संकेत?

3 फरवरी 2026 को अन्नामलाई ने साफ कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया है कि उन्हें छह विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी पद से मुक्त किया जाए। उनका कहना है कि पिता डायलिसिस पर हैं, लगातार इलाज चल रहा है और इस समय परिवार को प्राथमिकता देना उनका पहला कर्तव्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे यात्रा की स्थिति में नहीं हैं और फिलहाल कोयंबटूर में रहकर पिता की देखभाल करेंगे।

साफ शब्दों में यह एक निजी और मानवीय फैसला लगता है। लेकिन राजनीति में समय सबसे बड़ा संदर्भ होता है। यह फैसला ऐसे वक्त पर आया है जब भाजपा तमिलनाडु में 41 प्राथमिक सीटों पर फोकस कर रही है और संगठन चुनावी मोड में है।

क्या अन्नामलाई पीछे हट रहे हैं?

यहीं से सवाल शुरू होते हैं।

  • क्या यह सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारी है?

  • या फिर चुनावी रणनीति और संगठनात्मक दबाव के बीच लिया गया एक ब्रेक?

  • क्या अन्नामलाई की भूमिका भविष्य में बदली जाएगी?

फिलहाल अन्नामलाई ने न तो राजनीति से दूरी की बात कही है और न ही किसी पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने सिर्फ चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी छोड़ी है। यानी यह exit नहीं, बल्कि pause है।

तमिलनाडु भाजपा पर असर

अन्नामलाई की सबसे बड़ी ताकत रही है—उनकी व्यक्तिगत पहचान। वे भाजपा के उन नेताओं में हैं, जिनका चेहरा राज्य में पार्टी से बड़ा दिखाई देता है। ऐसे में चुनावी तैयारियों के बीच उनकी सक्रियता कम होना पार्टी के लिए चुनौती जरूर है।

हालांकि पार्टी नेतृत्व इसे अस्थायी कदम मानकर चल रहा है। संगठन में दूसरे नेता जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, लेकिन अन्नामलाई जैसा आक्रामक और लोकप्रिय चेहरा फिलहाल बैकसीट पर जाना स्वाभाविक रूप से खालीपन पैदा करता है।

राजनीति बनाम परिवार: एक अलग छवि

आज की राजनीति में जहां सत्ता और पद प्राथमिकता बन चुके हैं, वहां अन्नामलाई का यह फैसला उनकी छवि को एक अलग रंग देता है। एक ऐसा नेता, जो जरूरत पड़ने पर राजनीति से पहले परिवार को रखता है। यह फैसला उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि कई लोगों की नजर में ज्यादा भरोसेमंद भी बना सकता है।

अन्नामलाई की आईपीएस से राजनीति तक की यात्रा हमेशा चर्चा में रही है। यह कदम उस यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक ठहराव है।

पिता की सेहत, चुनावी समीकरण और पार्टी की रणनीति इन तीनों के बीच उनका अगला कदम तय होगा।

फिलहाल इतना साफ है कि
के. अन्नामलाई राजनीति छोड़ नहीं रहे, लेकिन उन्होंने यह दिखा दिया है कि हर लड़ाई चुनावी नहीं होती। कुछ लड़ाइयां घर के भीतर भी होती हैं—और वो भी उतनी ही अहम होती हैं।