रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा, मजबूत साझेदारी की नई दिशा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनका यह दो दिवसीय दौरा भारत-रूस के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर लेकर आया है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा, मजबूत साझेदारी की नई दिशा

नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनका यह दो दिवसीय दौरा भारत-रूस के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर लेकर आया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पुतिन का विमान लगभग 6:35 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सम्मान में शाम को ही निजी डिनर की मेजबानी करेंगे, जो पिछले साल मॉस्को में मोदी को दिए गए निमंत्रण का जवाब होगा।

यह दौरा 2021 के बाद पुतिन का भारत का पहला आधिकारिक दौरा है, जो यूक्रेन संकट के बाद उच्च स्तरीय द्विपक्षीय संपर्कों को बहाल करने का संकेत देता है। दिल्ली में पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है, जिसमें विशेष सुरक्षा दस्ते और ड्रोन निगरानी शामिल है।

दौरे का विस्तृत कार्यक्रम

पुतिन का दौरा मुख्य रूप से 5 दिसंबर को केंद्रित होगा, जब 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के तहत महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी। यहां प्रमुख कार्यक्रमों की सूची

5 दिसंबर, सुबह 11:00 बजे: राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर और राष्ट्रीय गान के साथ स्वागत।

11:30 बजे: राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि। पुतिन फूलमाला चढ़ाएंगे और स्मृति सभा में भाग लेंगे।

11:50 बजे: हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता। यहां रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर फोकस होगा।

दोपहर 1:50 बजे: संयुक्त प्रेस वक्तव्य। दोनों नेता मीडिया को संबोधित करेंगे।

3:40 बजे: भारत मंडपम में भारत-रूस बिजनेस फोरम। भारतीय और रूसी उद्योगपतियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर।

शाम 7:00 बजे: राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा स्टेट बैनक्वेट। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन।

पुतिन 5 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे भारत से रवाना हो जाएंगे, जिससे यह लगभग 30 घंटे का दौरा होगा।

प्रमुख चर्चा के मुद्दे: रक्षा से ऊर्जा तक मजबूती

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-रूस की 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को मजबूत करना है, जो 25 वर्ष पूरे कर चुकी है। अपेक्षित चर्चाओं में शामिल हैं:

रक्षा सहयोग: S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अगली खेप, Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की खरीद, ब्रह्मोस मिसाइल का अपग्रेड संस्करण और S-500 सिस्टम पर संभावित डील। रूस ने हाल ही में भारत के साथ सैन्य-लॉजिस्टिक समझौते को मंजूरी दी है।

आर्थिक साझेदारी: द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य। रूसी तेल की आपूर्ति बढ़ाना, छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (SMR) पर सहयोग और व्यापार असंतुलन को दूर करना।

अन्य क्षेत्र: अंतरिक्ष, तकनीक, फार्मा, केमिकल्स और टेक्सटाइल्स में सहयोग। रूस के RT चैनल का भारत में लॉन्च भी एजेंडे में।

25 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद है, जो एशियाई भू-राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिमी नजरों में दौरा: संतुलन की राजनीति

पुतिन का दौरा पश्चिमी देशों की निगाह में है, खासकर यूक्रेन युद्ध के बीच। भारत ने हमेशा तटस्थ रुख अपनाया है, और पीएम मोदी ने 'युद्ध का समय नहीं' का संदेश दिया है। अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से दबाव के बावजूद, भारत रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है। क्रेमलिन ने इसे 'व्यापक एजेंडा' बताया है, जिसमें वैश्विक मुद्दे भी शामिल हैं।

यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक संतुलन में भारत की भूमिका को रेखांकित करेगा। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।