छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती: पराक्रम, सुशासन और स्वराज के महानायक को देशभर में नमन

देशभर में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। 17वीं सदी में जन्मे शिवाजी महाराज ने स्वराज की स्थापना कर भारतीय इतिहास में स्वाभिमान और साहस की नई मिसाल कायम की। रायगढ़ किले पर हुए उनके राज्याभिषेक से मराठा शासन को औपचारिक रूप मिला। उनकी गुरिल्ला युद्धनीति, प्रशासनिक कुशलता और धार्मिक सहिष्णुता आज भी प्रेरणा देती है। महाराष्ट्र सहित देशभर में शोभायात्राएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती: पराक्रम, सुशासन और स्वराज के महानायक को देशभर में नमन

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर देशभर में श्रद्धा, गर्व और उत्साह के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर उनके अद्वितीय पराक्रम, प्रशासनिक कुशलता और स्वराज की स्थापना के लिए किए गए संघर्ष को याद किया जा रहा है।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 17वीं सदी में जन्मे शिवाजी महाराज ने अत्याचार और विदेशी शासन के दौर में स्वराज का सपना देखा और उसे साकार कर दिखाया। कम उम्र से ही उन्होंने युद्धनीति, कूटनीति और प्रशासनिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक शक्तिशाली मराठा शक्ति का निर्माण किया।

शिवाजी महाराज ने अपने शासन में जनता की सुरक्षा, महिलाओं के सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कई किलों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया, जिनमें रायगढ़ किला विशेष रूप से ऐतिहासिक महत्व रखता है, जहां उनका राज्याभिषेक हुआ और मराठा शासन को औपचारिक रूप मिला।

मुगल शासन के दौर में उन्होंने रणनीतिक युद्धनीति से अपने शत्रुओं को चुनौती दी और तत्कालीन सम्राट औरंगज़ेब की शक्तिशाली सेना के सामने भी अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखी। उनकी गुरिल्ला युद्ध शैली आज भी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।

आज महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में शिवाजी जयंती पर शोभायात्राएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, श्रद्धांजलि सभाएँ और युवाओं के लिए प्रेरणादायक आयोजन किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों द्वारा उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को साझा कर नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व का संदेश दिया जा रहा है।

इतिहासकारों का मानना है कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि दूरदर्शी शासक, कुशल प्रशासक और जनता के सच्चे रक्षक थे। उनकी जीवन गाथा आज भी साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देती है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर पूरा देश उन्हें नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प ले रहा है।