चेक बाउंस मामले में उदयपुर निवासी उदयलाल रावत दोषमुक्त, 17 साल पुराने विवाद पर कोर्ट का बड़ा फैसला
जयपुर की एनआई कोर्ट ने 17 साल पुराने चेक बाउंस मामले में आरोपी उदयलाल रावत को दोषमुक्त कर दिया। वित्तीय कंपनी ने 1.31 लाख रुपये के चेक के भुगतान न होने का आरोप लगाया था। अदालत ने पाया कि कंपनी बकाया राशि या फुल एंड फाइनल सेटलमेंट से जुड़े वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सकी। न्यायाधीश रिदम अनेजा ने साक्ष्यों के अभाव में मुकदमा खारिज कर दिया। कानूनी विशेषज्ञ इसे चेक बाउंस मामलों में अहम फैसला मान रहे हैं।
जयपुर : वाहन खरीदने के लिए लिए गए ऋण और उसके भुगतान से जुड़े चेक बाउंस मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनते हुए आरोपी उदयलाल रावत को दोषमुक्त कर दिया है। मामला करीब 17 साल पुराण बताया जा रहा है, जिसमे वित्तीय कंपनी की ओर से बकाया भुगतान को लेकर परिवारवाद दर्ज कराया गया था। यह मामला वल्लभनगर निवासी उदयलाल रावत से जुड़ा है, जिन्होंने वाहन खरीदने के लिए ऋण लिया था। आरोप था की ऋण अदायगी के लिए दिए गए 1.31 लाख रुपये के चेक का भुगतान नहीं हुआ, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की गयी।
परिवाद एक फाइनेंशियल कंपनी के लीगल एग्जीक्यूटिव द्वारा अदालत में पेश किया गया था, जिसमे दवा किया गया की 29 मई 2009 को फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के तहत चेक दिया गया था।
मामले की सुनवाई क्र रही एनआई कोर्ट जयपुर की न्यायाधीश रिदम अनेजा ने पाया की कंपनी की ओर से कोई वैध बकाया राशि या सेटलमेंट से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं किए गए। अदालत ने माना कि विधिक रूप से कोई देय अदायगी सिद्ध नहीं हो सकी, इसलिए मुकदमे को खारिज कर दिया गया।

उदयलाल रावत की ओर से अधिवक्ता आरती खंडेलवाल और मनीषा महावर ने अदालत में तर्क दिया कि:
ऋण की किश्तें पहले ही जमा कर दी गई थीं,
कंपनी ने इसके बावजूद ट्रैक्टर को जब्त कर अवैध रूप से बेच दिया,
बिना बकाया राशि साबित किए चेक का दुरुपयोग किया गया,
परिवाद, शपथ पत्र और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास मौजूद थे,
इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपों को संदेहास्पद माना,
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां सेटलमेंट और बकाया राशि के स्पष्ट दस्तावेजों के बिना चेक मामलों को आगे बढ़ाया जाता है।
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