शव पर विवाद, पुलिस ने कार्रवाई से इनकार किया — परिवार को घर लौटा दिया
जयपुर में शव सौंपने के मामले पर विवाद। पुलिस प्रक्रिया में देरी, मृत शरीर सम्मान अधिनियम 2023 के नियम। पोस्ट-मॉर्टम SOP। परिजनों की शिकायतें। पूरी रिपोर्ट
राजधानी जयपुर में एक मृतक के शव को परिवार को वापस सौंपने के मामले ने विवाद और सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के अनुसार पुलिस ने शव को अंतिम संस्कार के लिए घर भेज दिया, लेकिन मामले में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की, जिससे परिजनों और सोशल प्लेटफॉर्मों पर चर्चाएँ तेज हो गईं हैं।
कई बार राजस्थान में शव लेने या अंतिम संस्कार से जुड़ी पुलिस व प्रशासन की प्रक्रियाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर, जयपुर के बिंदायका इलाके में पार्क में शव दफनाने को लेकर तीन घंटे तक प्रदर्शन और पुलिस प्रशासन में मोल-भाव का मामला भी सामने आया था, जिसमें स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया था और पुलिस-प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई थी।
राजस्थान में मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023 लागू होने के बाद शव को लेकर नियमों को और सख्त किया गया है; इस कानून के तहत शव का राजनीतिक प्रदर्शन या बिना कारण विरोध में इस्तेमाल करना अब 6 महीने से 5 साल तक की जेल के दंड का कारण बन सकता है, और शव को लेने से इनकार करने पर भी कानूनी सजा का प्रावधान है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है और शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपने से पहले पोस्ट-मॉर्टम/मेडिको-लीगल रिपोर्ट संबंधी नियमों का पालन भी किया जाता है, जो अब राजस्थान में और अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है।

हालांकि स्थानीय समुदाय तथा परिजनों द्वारा यह शिकायत भी उठाया जाता रहा है कि कई बार पुलिस कार्यवाही में लेट रहती है या संदिग्ध परिस्थितियों वाले मामलों में कार्रवाई में देरी होती है, जिससे लोगों में निराशा और सवाल खड़े होते हैं। राजस्थान पुलिस की नई SOP के तहत अब आरोपी फोटो/वीडियो सार्वजनिक नहीं किए जाते और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता पर अधिक ज़ोर दिया जा रहा है।
इस पूरे विवाद में यह मामला मानव अधिकारों, पुलिस कार्यवाही की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया के कड़ाई से पालन का एक नया उदाहरण बन गया है, जिस पर सामाजिक और कानूनी दोनों तरह की बहस जारी है।

