Om Birla No Confidence Motion: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा तक लोकसभा संचालन से हटे ओम बिरला, जानिए क्या है पूरा मामला

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस और INDI गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इसके बाद ओम बिरला ने बड़ा फैसला लेते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा पूरी होने तक लोकसभा की कार्यवाही संचालित न करने का निर्णय लिया है। विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपात और विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप लगाए हैं। जानिए अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है, इसे लाने की प्रक्रिया, आगे संसद में क्या होगा और इसका भारतीय लोकतंत्र पर क्या असर पड़ेगा।

Om Birla No Confidence Motion: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा तक लोकसभा संचालन से हटे ओम बिरला, जानिए क्या है पूरा मामला

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा तक सदन में नहीं बैठेंगे स्पीकर

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस और INDI गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पेश कर दिया है। इसके बाद ओम बिरला ने स्वयं यह निर्णय लिया है कि जब तक इस प्रस्ताव पर चर्चा और निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वे लोकसभा की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे।

यह फैसला संसदीय इतिहास में असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के दौरान भी सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं। बिरला का यह कदम राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 क्यों लाया गया ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव?

कांग्रेस और INDI गठबंधन का आरोप है कि:

  • लोकसभा में विपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया

  • नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कई अहम मुद्दों पर रोका गया

  • 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन जल्दबाज़ी में किया गया

  • सदन के संचालन में निष्पक्षता की कमी रही

विपक्ष का कहना है कि स्पीकर का पद संविधान के अनुसार निष्पक्ष और गैर-पक्षपाती होना चाहिए, लेकिन मौजूदा कार्यशैली से यह विश्वास कमजोर हुआ है।

ओम बिरला का फैसला क्यों अहम है?

ओम बिरला द्वारा यह कहना कि वे अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा तक सदन में नहीं बैठेंगे, कई संकेत देता है:

  1. नैतिक दबाव से बचाव
    स्पीकर खुद पर लगे पक्षपात के आरोपों के बीच निर्णय प्रक्रिया से अलग रहना चाहते हैं।

  2. संवैधानिक गरिमा का संदेश
    यह दिखाने की कोशिश कि स्पीकर पद विवाद से ऊपर है।

  3. राजनीतिक संतुलन
    विपक्ष को यह कहने का मौका न मिले कि स्पीकर स्वयं अपनी कुर्सी बचाने के लिए प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।

इस दौरान लोकसभा की कार्यवाही डिप्टी स्पीकर या पैनल ऑफ चेयरपर्सन द्वारा संचालित की जाएगी।

 अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है? (No-Confidence Motion Explained)

 अविश्वास प्रस्ताव का मतलब

अविश्वास प्रस्ताव वह संसदीय प्रक्रिया है, जिसके जरिए सांसद यह जताते हैं कि उन्हें किसी पदाधिकारी या सरकार पर भरोसा नहीं रहा।

 आमतौर पर यह सरकार के खिलाफ लाया जाता है,
 लेकिन लोकसभा स्पीकर के खिलाफ भी लाया जा सकता है

 स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कैसे आता है?

  • इसे लोकसभा नियम 49 और संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लाया जाता है

  • कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी

  • प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद

    • चर्चा होती है

    • फिर मतदान

यदि बहुमत प्रस्ताव के पक्ष में जाता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है।

 क्या स्पीकर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं?

नहीं।
स्पीकर केवल टाई (बराबरी) की स्थिति में निर्णायक वोट डाल सकते हैं।
लेकिन अपने खिलाफ प्रस्ताव में वोटिंग से वे दूर रहते हैं।

 अब आगे क्या होगा?

  1. नोटिस की वैधता पर फैसला
    लोकसभा सचिवालय यह तय करेगा कि प्रस्ताव नियमों के अनुरूप है या नहीं।

  2. चर्चा की तारीख तय होगी
    आमतौर पर 14 दिन के भीतर।

  3. सदन में बहस
    विपक्ष आरोप रखेगा, सरकार और सत्ता पक्ष जवाब देंगे।

  4. मतदान
    यदि प्रस्ताव गिरता है → ओम बिरला बने रहेंगे स्पीकर
    यदि प्रस्ताव पास होता है → नया स्पीकर चुना जाएगा

 क्या विपक्ष के पास बहुमत है?

वर्तमान लोकसभा में:

  • NDA के पास बहुमत है

  • इसलिए प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है

लेकिन विपक्ष का उद्देश्य सिर्फ पद हटाना नहीं बल्कि:

  • नैरेटिव बनाना

  • लोकतांत्रिक बहस का मुद्दा उठाना

  • 2026–27 की राजनीति के लिए संदेश देना

 लोकतंत्र और संसद की गरिमा पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है:

क्या संसद सिर्फ संख्या का खेल बनकर रह गई है,
या फिर यह आज भी विचार और बहस का मंच है?

स्पीकर का पद लोकतंत्र की रीढ़ माना जाता है।
अगर उसी पर अविश्वास की स्थिति बन जाए, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, पूरी संसदीय व्यवस्था का संकट होता है।

ओम बिरला का सदन संचालन से अलग होना एक संवैधानिक और राजनीतिक संकेत है

  • अविश्वास प्रस्ताव भले ही गिर जाए, लेकिन

    • संसद की कार्यशैली

    • विपक्ष की भूमिका

    • स्पीकर की निष्पक्षता

इन सब पर बहस अब राष्ट्रीय स्तर पर छिड़ चुकी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि
 चर्चा किस दिशा में जाती है
 और क्या संसद फिर से बहस का मंच बन पाती है या नहीं।