फरवरी में ही 30°C पार: राजस्थान में बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई चिंता, जून–जुलाई में क्या होगा हाल?

राजस्थान में फरवरी की शुरुआत में ही दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तेज धूप और बदलते मौसम पैटर्न ने आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जून–जुलाई में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

फरवरी में ही 30°C पार: राजस्थान में बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई चिंता, जून–जुलाई में क्या होगा हाल?

राजस्थान में फरवरी की शुरुआत में 30°C तक दिन का पारा.. बढ़ते तापमान ने उठाए अलार्म


राजस्थान में सामान्य तौर पर फरवरी के पहले हफ्ते में हल्की सी ठंडक रहती है, लेकिन इस बार मौसम ने पुरानी परंपरा को तोड़ दिया है। मंगलवार को राज्य के कई हिस्सों में दिन का पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, और तेज़ धूप ने तापमान को काबू से बाहर कर दिया। इस असामान्य गर्मी ने न केवल लोगों की दिनचर्या पर असर डाला है, बल्कि मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच भविष्य के तापमान रुझानों को लेकर चिंताएं भी तेज कर दी हैं।

विधिक मौसम विज्ञान विभाग का डेटा क्या कहता है?

विधिक मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार:

  • जयपुर, कोटा, जोधपुर, बीकानेर जैसे इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 30°C के ऊपर दर्ज किया गया।

  • रात के तापमान में अभी भी ठंडक बनी हुई है, लेकिन दिन में तेज़ धूप और गर्म हवा का असर लगातार बढ़ रहा है।

  • फरवरी के दूसरे सप्ताह में भी सामान्य से 4–6 डिग्री ऊपर तापमान रहने की आशंका जताई गई है।

यह असामान्य तापमान प्राकृतिक मौसमी बदलाव से कहीं अधिक लंबे समय से चल रहे कुप्रभावित जलवायु रुझानों का परिणाम लग रहा है।

भविष्य में जून–जुलाई के लिए चेतावनी

जब फरवरी में ही तापमान 30°C को छू रहा है, तो मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले गर्मी के मौसम — जून और जुलाई — में तापमान और अधिक ऊपर जा सकता है।

 प्रमुख कारण:

1. जलवायु परिवर्तन का असर
वैज्ञानिकों के अनुसार, राजस्थान में तापमान का असामान्य रूप से बढ़ना वैश्विक तापमान वृद्धि और स्थानीय भौगोलिक स्थितियों का संयोजन है।
गर्मी की लहरें अब पहले की तरह ‘मौसमी अस्थाई’ नहीं रहीं, बल्कि दीर्घकालिक घातक रुझान का हिस्सा बन गई हैं।

2. पश्चिमी हवाओं में बदलाव
सर्दियों के मौसम में आने वाली पश्चिमी हवाओं में बदलाव के कारण गर्म हवाओं का प्रभाव पहले की अपेक्षा जल्दी और ज़्यादा समय तक महसूस होता है।

3. भूमिगत तापमान वृद्धि
खनिज और रेतीले इलाके में भूमिगत तापमान भी बढ़ रहा है, जिससे धूप का असर तेज़ महसूस होता है।

गर्मी का सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव

तेज़ धूप और बढ़ते तापमान का असर सिर्फ़ मौसम तक सीमित नहीं है:

 स्वास्थ्य

  • बुज़ुर्ग और बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा

  • बाहर कार्य करने वालों में हीट स्ट्रेस बढ़ना

  • खासकर दिन के 11 बजे से 4 बजे तक की गर्मी बहुत प्रबल

 खेत और पशुपालन

  • बुवाई और सिंचाई के समय पर असर

  • पशुओं में प्यास और थकान

  • पानी की बढ़ती मांग

 रोज़मर्रा की ज़िंदगी

  • स्कूलों में बच्चे जल्दी थक रहे हैं

  • जनता सवेरे–शाम की ओर रूटीन शिफ्ट कर रही है

  • सड़क पर निकलना कठिन

क्या जून–जुलाई में और भी तेज़ी आएगी?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब फरवरी में ही 30°C रिकार्ड हो रहा है, तो:

  • मई–जून में तापमान 42–45°C तक पहुंच सकता है

  • खासकर बीकानेर, जैसलमेर, पाली, नागौर जैसे जिले में अधिक गर्मी

  • कभी-कभी हीट वेव अलर्ट जारी होना भी संभव

यह अनुमान सिर्फ अनुमान नहीं—त्वरित पर्यावरणीय परिवर्तन के साक्ष्य पर आधारित है।

राजस्थान सरकार और प्रशासन की तैयारियाँ

राजस्थान सरकार ने पहले ही गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए:

हीट वेव अलर्ट सिस्टम सक्रिय किया है
 स्कूलों में टाइम टेबल में बदलाव के निर्देश दिए हैं
 ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति तेज़ की जा रही है
 स्वास्थ्य विभाग को एडवाइजरी जारी की गई है

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह काफ़ी नहीं है—
“हाँ, मौजूदा तैयारियाँ मददगार हैं, लेकिन दीर्घकालिक जलवायु समंजन नीति की ज़रूरत अब पहले से ज़्यादा है।”

विशेषज्ञों की राय

 मौसम वैज्ञानिक कहते हैं:

“अगर फरवरी से ही अधिक गर्मी का पैटर्न शुरू हो रहा है, तो हमें जून–जुलाई के लिए गंभीर स्थितियों की तैयारी करनी पड़ेगी। यह सिर्फ़ राजस्थान की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन का स्थानीय असर है।”

राजस्थान में अभी से महसूस हो रही तेज़ धूप और बढ़ता तापमान इस साल की गर्मी की शुरुआत का संकेत हो सकता है।
अगर मौजूदा रुझान जारी रहा, तो आने वाले महीनों—ख़ासकर जून और जुलाई—में तापमान 40°C के पार जाने की पूरी संभावना है।
यह सिर्फ़ मौसम का खेल नहीं—यह जलवायु परिवर्तन की याद है।

और सवाल यही है:

क्या हम सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ने वाले तापमान को देखेंगे, या इससे निपटने के लिए ठोस तैयारी भी करेंगे?

राजस्थान में सबसे ज़्यादा गर्मी कई वैज्ञानिक और भौगोलिक वजहों से पड़ती है। आसान भाषा में, लेकिन पुख़्ता तथ्यों के साथ समझो 

 1. थार मरुस्थल — गर्मी का सबसे बड़ा स्रोत

राजस्थान का बड़ा हिस्सा थार डेज़र्ट में आता है।

  • रेत दिन में बहुत जल्दी और बहुत ज़्यादा गरम होती है

  • रात को ठंडी हो जाती है, लेकिन दिन की तपिश बेहद तेज़ होती है

  • रेत गर्मी को रोकती नहीं, लौटा देती है — इसलिए तापमान तेजी से बढ़ता है

 2. समुद्र से दूरी — नमी नहीं, राहत नहीं

राजस्थान समुद्र से बहुत दूर है।

  • समुद्र वाले इलाकों में नमी और हवा तापमान को संतुलित करती है

  • राजस्थान में यह प्राकृतिक “कूलिंग सिस्टम” नहीं है

  • इसलिए गर्मी सीधे और बेरोकटोक असर दिखाती है

 3. साफ आसमान + तेज़ धूप

राजस्थान में साल के ज़्यादातर दिन:

  • आसमान साफ

  • बादल कम

  • सूरज की किरणें सीधे ज़मीन पर

नतीजा  धूप ज़्यादा, छाया कम

 4. लू (Hot Winds) — आग उगलती हवाएं

मई–जून में चलने वाली लू:

  • पाकिस्तान के रेगिस्तानी इलाकों से होकर आती है

  • पहले से गरम होती है

  • नमी बिल्कुल नहीं होती

ये हवाएं शरीर की नमी भी खींच लेती हैं, इसलिए गर्मी दोगुनी महसूस होती है

 5. हरियाली की भारी कमी

  • पेड़ कम → नमी कम → ठंडक नहीं

  • शहरों में कंक्रीट, सड़कें, छतें गर्मी जमा करती हैं

  • इसे कहते हैं Urban Heat Island Effect

जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जैसे इलाकों में इसका असर सबसे ज़्यादा दिखता है।

 6. जलवायु परिवर्तन — हालात और बिगड़ते हुए

पिछले 20–25 साल में:

  • गर्मी जल्दी शुरू हो रही है

  • तापमान रिकॉर्ड टूट रहे हैं

  • हीटवेव की अवधि बढ़ रही है

यानि राजस्थान की प्राकृतिक गर्मी अब मानव गतिविधियों से और तेज़ हो गई है।