राजस्थान विधानसभा में अफसर नदारद: सदन में सवाल, जवाब देने वाला कोई नहीं, सरकार की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न

राजस्थान विधानसभा में विभागीय अधिकारियों की गैरहाजिरी पर विधानसभा अध्यक्ष तक को नाराजगी जतानी पड़ी। सदन में अफसर नहीं पहुंचे तो जवाबदेही कैसे तय होगी? सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल।

राजस्थान विधानसभा में अफसर नदारद: सदन में सवाल, जवाब देने वाला कोई नहीं, सरकार की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न

राजस्थान विधानसभा में अफसर नदारद, सवालों के घेरे में सरकार की कार्यशैली

जयपुर।
राजस्थान विधानसभा में इन दिनों एक ऐसा दृश्य सामने आ रहा है, जो न सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकार की प्रशासनिक गंभीरता पर भी गहरी चोट करता है। हालात यह हैं कि सदन में जिन विभागों से जुड़े सवाल लगाए जा रहे हैं, उन्हीं विभागों के जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष को खड़े होकर कहना पड़ा— “एक-दो लोग ही आए हैं।”

यह कोई साधारण टिप्पणी नहीं है, बल्कि व्यवस्था के प्रति बढ़ती लापरवाही का सार्वजनिक स्वीकार है।

सदन चले तो कैसे चले?

विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच होता है। यहीं जनता के सवाल सरकार से पूछे जाते हैं और यहीं जवाबदेही तय होती है। लेकिन जब विभागीय अधिकारी ही सदन में मौजूद नहीं होंगे, तो—

  • सवालों का संतोषजनक जवाब कौन देगा?

  • नीतियों की खामियों पर स्पष्टीकरण कैसे मिलेगा?

  • जनता की समस्याएं रिकॉर्ड में कैसे जाएंगी?

साफ है, अगर अफसर ही गैरहाजिर हैं तो विभाग जमीन पर काम कैसे कर रहे होंगे—यह सवाल खुद-ब-खुद उठता है।

अध्यक्ष की नाराज़गी, सिस्टम की पोल

विधानसभा अध्यक्ष का खड़े होकर अधिकारियों की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करना यह दर्शाता है कि मामला अब सामान्य नहीं रहा। यह महज़ एक दिन या एक विभाग की बात नहीं है। कई बार देखा गया है कि सदन के दौरान अधिकारी देर से पहुंचते हैं, या बिल्कुल नहीं आते।

यह लापरवाही किसकी शह पर हो रही है—अफसरों की अपनी मनमानी या सरकार की ढीली पकड़?

सरकार चला रहे हैं या टाइम पास?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार वाकई शासन चला रही है या फिर सब कुछ औपचारिकता बनकर रह गया है?
विधानसभा सत्र का खर्च करोड़ों में होता है—जनता के टैक्स का पैसा। अगर उसी सदन में अधिकारी उपस्थित नहीं हैं, तो यह सीधा-सीधा जनता के पैसे का अपमान है।

क्या यह माना जाए कि:

  • अफसरों को सदन की अहमियत का डर नहीं रहा?

  • या फिर उन्हें भरोसा है कि गैरहाजिरी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी?

जवाबदेही तय कब होगी?

विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन अगर जवाब देने वाला सिस्टम ही गायब हो, तो विपक्ष भी सिर्फ शोर मचाकर रह जाता है। ऐसे में जिम्मेदारी सरकार की बनती है कि—

  • गैरहाजिर अधिकारियों पर कार्रवाई हो

  • विभागीय जवाबदेही तय की जाए

  • यह स्पष्ट किया जाए कि सदन सर्वोच्च है, औपचारिक मंच नहीं

राजस्थान विधानसभा में अधिकारियों की अनुपस्थिति कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन के टूटने का संकेत है। अगर यही हाल रहा, तो सवाल सिर्फ अफसरों पर नहीं, पूरी सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर उठेंगे।

जनता यह जानना चाहती है—
क्या सरकार वाकई शासन कर रही है, या फिर लोकतंत्र को “टाइम पास” समझ लिया गया है?