जोधपुर हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी: पहले कलेक्टर ऑफिस, अब न्यायपालिका निशाने पर, डर फैलाने की साजिश?
जोधपुर हाईकोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर खाली कराया। यह पहली घटना नहीं है—इससे पहले राजस्थान के कई जिला कलेक्टर कार्यालयों को भी ऐसे ही धमकी भरे ई-मेल मिल चुके हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या यह साइबर शरारत है या सिस्टम की सुरक्षा परखने की सोची-समझी साजिश?
जोधपुर हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी
पहले कलेक्टर कार्यालय, अब न्यायपालिका निशाने पर – डर फैलाने की साजिश या साइबर शरारत?
राजस्थान के जोधपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद बुधवार को प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन पूरे हाईकोर्ट परिसर को खाली कराया, वकीलों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर की सघन तलाशी ली।
हालांकि प्रारंभिक जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन सवाल अब भी जस का तस है—
आख़िर ये धमकियाँ कौन दे रहा है और बार-बार क्यों दी जा रही हैं?

सिर्फ एक धमकी नहीं, एक पैटर्न
यह पहला मौका नहीं है जब राजस्थान में इस तरह की धमकी सामने आई हो।
पिछले कुछ महीनों में राज्य के कई जिला कलेक्टर कार्यालयों, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों को भी इसी तरह के धमकी भरे ई-मेल मिले थे।
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कभी बम विस्फोट की चेतावनी
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कभी सामूहिक नुकसान की धमकी
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और ज़्यादातर मामलों में ई-मेल या ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल
जांच में कई मामलों में धमकियां फर्जी निकलीं, लेकिन हर बार प्रशासन को पूरा तंत्र सक्रिय करना पड़ा।
आखिर धमकी देने के पीछे मकसद क्या?
सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले को कुछ अहम एंगल से देख रही हैं:

साइबर शरारत या ट्रोलिंग
अक्सर ये मेल
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फर्जी ई-मेल आईडी
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VPN या विदेशी सर्वर
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एन्क्रिप्टेड नेटवर्क
से भेजे जाते हैं।
इसका मकसद सिर्फ डर फैलाना और सिस्टम को परेशान करना हो सकता है।
सिस्टम की परीक्षा
कुछ मामलों में यह देखा गया है कि धमकी देने वाले
यह परखना चाहते हैं कि
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प्रशासन कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है
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सुरक्षा में कहां कमजोरी है
यानी यह एक तरह का सिक्योरिटी स्ट्रेस टेस्ट भी हो सकता है।
किसी फैसले या मामले से जुड़ी नाराज़गी
हाईकोर्ट जैसी संवेदनशील संस्था को धमकी मिलना इस आशंका को भी जन्म देता है कि
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किसी व्यक्ति या समूह को
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किसी न्यायिक फैसले, केस या कार्रवाई से
गहरी नाराज़गी हो सकती है।
हालांकि, अभी तक इसका कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।
कलेक्टर कार्यालयों को क्यों बनाया गया था निशाना?

पिछले मामलों में सामने आया कि जिला कलेक्टर कार्यालयों को मिली धमकियों का उद्देश्य था—
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प्रशासनिक मशीनरी को ठप करना
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जनता में अफरा-तफरी फैलाना
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और सुरक्षा बलों को व्यस्त रखना
अब वही पैटर्न न्यायपालिका तक पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
हर धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
लेकिन हर बार—
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कोर्ट खाली कराना
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सुरक्षा बलों को तैनात करना
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और सामान्य कामकाज ठप करना
यह प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव डालता है।
सवाल यह भी है कि
क्या बार-बार की फर्जी धमकियां असली खतरे की गंभीरता को कमजोर कर रही हैं?
अब आगे क्या?
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साइबर सेल और इंटेलिजेंस एजेंसियां ई-मेल की तकनीकी जांच में जुटी हैं
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IP ट्रेसिंग, सर्वर लोकेशन और पैटर्न एनालिसिस किया जा रहा है
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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी
जोधपुर हाईकोर्ट को मिली धमकी सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक लगातार उभरता खतरा संकेत है।
यह जरूरी है कि—
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धमकी देने वालों तक पहुंचा जाए
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साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाए
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और ऐसे मामलों में सख्त उदाहरण पेश किया जाए
वरना सवाल यही रहेगा—
आज धमकी, कल क्या?
Hindu Solanki 
