लोकसभा में नारवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर तेज़ राजनीतिक विवाद — FIR भी दर्ज, सत्र में हंगामा
संसद के बजट सत्र में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नारवणे की कथित अप्रकाशित किताब को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि इसी किताब में दर्ज संवेदनशील जानकारियों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में चर्चा से बच रहे हैं। सरकार ने अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देने को नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ बताया। लोकसभा स्पीकर ने Rule 349 का हवाला देते हुए ऐसे संदर्भों पर रोक स्पष्ट की। वहीं दिल्ली पुलिस ने किताब की कथित लीक कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस विवाद से सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और विपक्ष-सरकार के बीच तीखी टकराव की स्थिति बन गई।
नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नारवणे की कथित अप्रकाशित (unreleased) किताब को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद फैल गया है, जिसने लोकसभा में हंगामा, नेताओं की नारेबाज़ी, विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस और FIR जैसी घटनाओं को जन्म दिया है। विवाद का केंद्र बना है राहुल गांधी का दावा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में हिस्सा लेना इसलिए टाल दिया कि उन्हें नारवणे की किताब से सम्बंधित प्रश्नों का सामना करना पड़ेगा।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान संसद में पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नारवणे की कथित Memoir (यादें/किताब) का हवाला देने की कोशिश की, जिसमें कथित तौर पर 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मामलों पर विवरण लिखा है। राहुल ने कहा कि इसी किताब के कारण प्रधानमंत्री लोकसभा में चर्चा से बच रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

सरकार और सत्तापक्ष के नेताओं का तर्क रहा कि उक्त किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है — अर्थात यह अप्रकाशित (unreleased) है — और संसद में एक अप्रमाणित या आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं किताब का हवाला देना नियमों के खिलाफ है। रक्षा मंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने यह भी कहा कि ऐसा करना लोकसभा के नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के विपरीत है।
लोकसभा स्पीकर ने स्पष्ट किया कि नियम Rule 349 के अनुसार कोई सदस्य किसी अप्रकाशित पुस्तक को संसदीय बहस का संदर्भ नहीं बना सकता। इस विवाद के चलते सदन में हंगामा, नारेबाज़ी और व्यवधान देखा गया और मामलों पर चर्चा देर तक चली। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक बहस में रोड़ा बताया जबकि सरकार ने इसे प्रक्रियात्मक उल्लंघन बताया।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है उस अप्रकाशित पुस्तक के सोशल मीडिया पर अवैध रूप से प्रसारित होने के संबंध में, जब कथित प्री-प्रिंट या आउट-ऑफ-स्टॉक की PDF/प्रिंट कॉपी ऑनलाइन घूम रही थी, जबकि इसे सरकारी अथॉरिटीज़ से अनुमति नहीं मिली थी। जांच जारी है कि यह किस प्रकार लीक हुआ और यह सामग्री जैसी दावा की गई वैसी ही वैध है या नहीं।
इस विवाद ने लोकसभा के बजट सत्र को प्रभावित किया, विपक्ष और सरकार के बीच तनातनी बढ़ी और विपक्ष ने सदन के संचालन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस छेड़ दी। कई मामलों में सदन को बरामदगी से पहले स्थगित भी करना पड़ा।
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