अगर आप अफीम (पोस्त) की खेती कर रहे हैं — तो सावधान!

अजमेर जिले के भिनाय थाना क्षेत्र में पुलिस ने फसल की आड़ में की जा रही अवैध अफीम की खेती का पर्दाफाश किया है। खेत से 156 किलो से ज्यादा अफीम के हरे पौधे जब्त कर किसान को गिरफ्तार किया गया है। NDPS एक्ट में मामला दर्ज।

अगर आप अफीम (पोस्त) की खेती कर रहे हैं — तो सावधान!

अगर आप अफीम (पोस्त) की खेती कर रहे हैं — तो सावधान!
यह सिर्फ़ खेती का मामला नहीं, सीधे कानून, जेल और ज़िंदगी से जुड़ा विषय है। भारत में अफीम की खेती पर सख़्त क़ानूनी नियंत्रण है और ज़रा-सी चूक आपको गंभीर अपराध की श्रेणी में खड़ा कर सकती है।

 अफीम की खेती: अनुमति है या अपराध?

भारत में अफीम (पोस्त) की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं, लेकिन यह बिना सरकारी लाइसेंस के करना सीधा अपराध है।
देश में केवल कुछ चुनिंदा राज्यों—जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश—के सीमित क्षेत्रों में ही सरकारी निगरानी में लाइसेंसधारी खेती की अनुमति दी जाती है।

इस खेती की निगरानी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) करता है। खेत से लेकर अफीम के संग्रह तक हर कदम पर सरकारी नियंत्रण रहता है।

 कौन-सा कानून लागू होता है?

अफीम की अवैध खेती पर NDPS Act, 1985 (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट) लागू होता है।

NDPS Act की अहम धाराएं:

  • धारा 8: बिना अनुमति अफीम/पोस्त उगाना प्रतिबंधित

  • धारा 18: अफीम से जुड़े अपराधों के लिए सजा

  • धारा 15/17: उत्पादन, भंडारण, बिक्री या तस्करी

 सजा कितनी सख़्त है?

अगर आप बिना लाइसेंस अफीम की खेती करते पकड़े गए, तो सजा मात्रा पर निर्भर करती है:

  • छोटी मात्रा:

    • 1 साल तक की जेल या जुर्माना

  • व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity):

    • 10 से 20 साल की सख़्त जेल

    • 1 से 2 लाख रुपये तक जुर्माना

  •  ज़मानत बेहद मुश्किल, कई मामलों में Non-Bailable

NDPS मामलों में आरोपी को खुद साबित करना पड़ता है कि वह निर्दोष है, जो सामान्य कानून से अलग है।

 किसान अक्सर कहां गलती कर बैठते हैं?

  • बिना जानकारी जंगली पोस्त उग जाना

  • लाइसेंस की शर्तों से ज़्यादा खेती

  • उत्पादन की सही मात्रा जमा न कराना

  • अफीम को निजी इस्तेमाल या बेचने की कोशिश

  • खेत में पाए गए पौधों की सूचना समय पर न देना

इनमें से कोई भी गलती आपको अपराधी बना सकती है, भले इरादा कुछ भी हो।

 जांच और कार्रवाई कैसे होती है?

  • राजस्व विभाग, पुलिस और CBN की संयुक्त कार्रवाई

  • ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेज और गुप्त सूचना

  • खेत नष्ट किए जाते हैं

  • FIR, गिरफ्तारी और NDPS कोर्ट में मुकदमा

 कानून क्या संदेश देता है?

सरकार का साफ़ रुख है—
अफीम कोई सामान्य फसल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।
 ड्रग्स की एक छोटी कड़ी भी बड़े नेटवर्क को जन्म दे सकती है।

ऐसा ही एक मामला अजमेर से सामने आया है 

अजमेर जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही सख़्त मुहिम के तहत पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। भिनाय थाना क्षेत्र में फसल की आड़ लेकर की जा रही अवैध अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ इलाके में हड़कंप मचा दिया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि नशे का कारोबार अब किस तरह खेती-किसानी की जमीन में पैठ बना रहा है।

कैसे हुआ खुलासा

भिनाय थाना प्रभारी ओमप्रकाश मीणा के अनुसार, पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि बडला खेड़ा लामगरा इलाके में एक किसान अपने खेत में सामान्य फसल के बीच चोरी-छिपे अफीम की खेती कर रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी।

खेत की तलाशी में चौंकाने वाला सच

जब पुलिस ने देवलिया कला निवासी श्योजी गोस्वामी पुत्र सुगन पुरी के खेत की बारीकी से जांच की, तो सामान्य फसल के बीच अफीम के हरे पौधे पाए गए। पहली नजर में यह आम खेती जैसा लग रहा था, लेकिन गहराई से जांच करने पर यह पूरा खेत अवैध मादक पदार्थ उत्पादन का अड्डा निकला।

156 किलो 300 ग्राम अफीम के हरे पौधे जब्त

पुलिस ने मौके से कुल 156 किलो 300 ग्राम अफीम के हरे पौधे जब्त किए। यह मात्रा NDPS एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। इसके बाद आरोपी किसान श्योजी गोस्वामी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया। जब्त मादक पदार्थ को नियमानुसार सील कर कब्जे में ले लिया गया है।

NDPS एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट, 1985 की धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस कानून के तहत बिना लाइसेंस अफीम की खेती करना गंभीर गैर-जमानती अपराध है, जिसमें लंबी जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि:

  • क्या आरोपी अकेले यह खेती कर रहा था या

  • इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है?

  • अफीम को कहां सप्लाई किया जाना था?

इलाके में डर और चर्चा

इस कार्रवाई के बाद ग्रामीण इलाके में चर्चा तेज है। लोग हैरान हैं कि किस तरह खेती की आड़ में नशे का कारोबार फल-फूल रहा था। पुलिस को आशंका है कि ऐसे और भी खेत हो सकते हैं, जहां इसी तरह की अवैध गतिविधियां चल रही हों।

प्रशासन का साफ संदेश

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक शुरुआत है।

“अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। चाहे किसान हो या कोई और, कानून तोड़ने वाले को बख्शा नहीं जाएगा।”

बड़ा सवाल

यह मामला कई सवाल खड़े करता है—

  • क्या ग्रामीण इलाकों में अफीम की खेती फिर से पैर पसार रही है?

  • क्या नशे का नेटवर्क किसानों को मोहरा बना रहा है?

  • और क्या निगरानी तंत्र को और सख़्त करने की ज़रूरत है?

अजमेर की यह कार्रवाई एक चेतावनी है—अफीम की खेती सिर्फ खेत में नहीं, सीधे जेल की राह दिखाती है।

 क्या करें ताकि मुसीबत से बचें?

  • बिना लाइसेंस कभी अफीम/पोस्त न उगाएं

  • खेत में संदिग्ध पौधे दिखें तो तुरंत पटवारी/तहसील/पुलिस को सूचना दें

  • सोशल मीडिया या दलालों के बहकावे में न आएं

  • किसी भी NDPS मामले में कानूनी सलाह तुरंत लें

अफीम की खेती कोई साधारण कृषि कार्य नहीं, बल्कि कानूनी बारूद है।
एक गलत कदम—और सालों की मेहनत, ज़मीन, आज़ादी सब दांव पर लग सकता है।

सावधानी ही सुरक्षा है। कानून जानिए, खुद को बचाइए।