श्रीगंगानगर में किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट को मंजूरी, किसानों को मिलेगा बेहतर दाम
श्रीगंगानगर में किन्नू उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने 5 करोड़ रुपए की लागत से किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट को मंजूरी दी है।
राजस्थान सरकार ने गंगानगरी के किन्नू उत्पादक किसानों के लिए बड़ी पहल करते हुए श्रीगंगानगर में किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत इस परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। प्लांट की स्थापना और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उद्यान विभाग को सौंपी गई है, जिसने प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
‘अपनी उपज, अपना उद्योग’ अभियान के बाद मिली रफ्तार
स्थानीय स्तर पर किन्नू प्रसंस्करण उद्योग की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। जागरूकता और प्रस्ताव तैयार होने के बाद सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया। अब प्रशासनिक स्तर पर औपचारिकताएं पूरी कर परियोजना को जमीन पर उतारने की तैयारी की जा रही है।
पंजाब मॉडल पर होगा विकास
प्रस्तावित प्लांट में किन्नू के छिलके और बीज अलग कर पल्प तैयार किया जाएगा। इस पल्प का उपयोग विभिन्न खाद्य और मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण में किया जा सकेगा। योजना है कि इसे पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज के मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जाए, जहां प्रोसेसिंग के बाद पल्प निजी कंपनियों को आपूर्ति किया जाता है।
हालांकि, यह अभी तय नहीं हुआ है कि प्लांट पूरी तरह सरकारी क्षेत्र में स्थापित होगा या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर। अंतिम निर्णय राज्य सरकार स्तर पर लिया जाएगा।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
श्रीगंगानगर जिले की पहचान किन्नू उत्पादन से जुड़ी है। प्रोसेसिंग प्लांट शुरू होने के बाद किन्नू पल्प आधारित उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। वर्तमान में जिले में किन्नू से संबंधित इकाइयां मुख्यतः वैक्सिंग तक सीमित हैं, जिससे फल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। नई परियोजना से स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बी और सी ग्रेड किन्नू भी बिकेगा
इस प्लांट का सबसे बड़ा लाभ किसानों को होगा। अभी ए ग्रेड किन्नू तो आसानी से बाजार और निर्यात में खप जाता है, लेकिन बी और सी ग्रेड के फलों को बेचने में किसानों को कठिनाई होती है। कई बार कम कीमत या खरीदार न मिलने के कारण नुकसान उठाना पड़ता है। प्रोसेसिंग प्लांट शुरू होने के बाद इन ग्रेड के किन्नू की भी खरीद होगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सकेगा।
कई उत्पादों के निर्माण की संभावना
किन्नू पल्प से मुरब्बा, फ्रूट केक, हलवा, कैंडी, चटनी, हाई फाइबर सेवई, वर्मीसेली और हेल्थ ड्रिंक्स जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यह फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। वहीं छिलकों से बायोएंजाइम जैसे पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।
इस पहल से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि श्रीगंगानगर में कृषि आधारित उद्योगों के विकास को भी नई दिशा
Saloni Kushwaha 
