जोधपुर में खाद्य सुरक्षा से खिलवाड़! पैरों से गूंथा जा रहा था मैदा , फिर जो हुआ ............
फेनी बनाने के लिए मैदा हाथों की बजाय पैरों से गूथा जा रहा था। जोधपुर में खाद्य सुरक्षा से खिलवाड़!
जोधपुर का एक वायरल वीडियो हमारे खाद्य सुरक्षा तंत्र की असलियत को नंगा कर देता है, जिसमें एक मिठाई केंद्र पर फेनी बनाने के लिए मैदा को हाथों से नहीं, बल्कि नंगे पैरों से गूंथा जा रहा है।

यह सिर्फ एक दुकान की गंदगी का मामला नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जिसमें आम लोगों की सेहत को सबसे सस्ती चीज़ माना जाता है और मुनाफे के सामने स्वच्छता और मानक दोनों बौने हो जाते हैं। सवाल सिर्फ उस दुकानदार से नहीं, सीधा सरकार और जिम्मेदार एजेंसियों से है –

क्या खाद्य सुरक्षा नियम सिर्फ कागज़ों और विज्ञापनों तक सीमित हैं, कि वे ज़मीन पर भी लागू होते हैं? जब तक निरीक्षण केवल शिकायत या वायरल वीडियो के बाद होते रहेंगे, तब तक ऐसे न जाने कितने सेंटर, मिठाई की दुकानें और छोटे-छोटे कारखाने आम जनता को बीमार करते रहेंगे और कोई जिम्मेदार अधिकारी सच में कटघरे में खड़ा नहीं होगा। अब समय है कि सरकार न केवल ऐसे सेंटरों पर सख्त कार्रवाई करे, बल्कि जिले–जिले में नियमित औचक निरीक्षण, लाइसेंस की अनिवार्यता, भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे ठोस कदम उठाए, ताकि जनता की सेहत की कीमत ‘सस्ता माल, गंदी जगह’ वाली मानसिकता से नहीं, बल्कि इंसानी गरिमा और अधिकार के पैमाने से तय हो।
वही
FSSAI की नाकामी के 7 कारण
1. कमजोर जनशक्ति:
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एक FSO को 500+ दुकानों की निगरानी
2. भ्रष्टाचार का साम्राज्य:
छोटे विक्रेता = सख्त कार्रवाई
बड़े ब्रांड/उद्योग = समझौता3. कानूनी खामियां:
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गिरफ्तारी प्रावधान लगभग शून्य
4. लैब अभाव:
5. प्रक्रियात्मक विफलता:
6. स्ट्रीट वेंडर्स पर शून्य नियंत्रण:
7. जनता का कम विश्वास:
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2024 सर्वे: अधिकांश उपभोक्ताओं को FSSAI पर भरोसा नहीं
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अब सवाल बड़ा है जोधपुर से सामने आया शर्मनाक वीडियो पूरे देश को झकझोर रहा है। फीणी उद्योग में एक कर्मचारी पैरों से मैदा गूंथते हुए दिखा, जबकि दूसरा आराम से बातें कर रहा था । वीडियो वायरल होने के बाद 110-200 किलो आटा नष्ट किया गया । लेकिन असली सवाल यह है - क्या FSSAI सच में सो रहा है? ऐसे कितने दुकान और सेंटर हैं जहां कोई ध्यान नहीं देता?

