सिंगोड़िया गांव के नवचिकित्सकों का बाटाडू में भव्य सम्मान, शिक्षा और परिश्रम की मिसाल बने युवा डॉक्टर
सिंगोड़िया गांव के नवचिकित्सकों डॉ. लक्ष्मण, खेताराम, डॉ. पार्वती और डॉ. हरचन्द सियाग का बाटाडू में सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। समारोह ने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा, परिश्रम और जनसेवा के महत्व को रेखांकित किया।
बाटाडू में उम्मीदों की सफ़ेद कोट वाली सुबह, सिंगोड़िया के लाल बने पूरे इलाके की शान
बाटाडू कस्बे की गलियों में आज कुछ अलग ही रौनक थी। चेहरे पर मुस्कान, हाथों में फूल-मालाएं और आंखों में गर्व का भाव—मौका था सिंगोड़िया गांव के नवचिकित्सकों के सम्मान का। चिकित्सकीय शिक्षा पूरी कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले डॉ. लक्ष्मण, खेताराम, डॉ. पार्वती और डॉ. हरचन्द सियाग के स्वागत में आयोजित समारोह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक खुशी और सपनों का उत्सव बन गया।

भव्य स्वागत समारोह में तहसीलदार श्री डालूराम, डॉ. सम्यक बंसल, समाजसेवी अशोक गोदारा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। माल्यार्पण, शुभकामनाएं और तालियों की गूंज के बीच नवचिकित्सकों का अभिनंदन किया गया। समारोह स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर यह भाव साफ झलक रहा था कि यह सफलता सिर्फ चार युवाओं की नहीं, बल्कि पूरे गांव की है।
समारोह को संबोधित करते हुए समाजसेवी अशोक गोदारा ने कहा कि “सिंगोड़िया गांव से एक ही दादा के दो पोतों का चिकित्सक बनना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि बताती है कि गांव की मिट्टी में भी वह ताकत है, जो डॉक्टर, इंजीनियर और अफसर तैयार कर सकती है।” उनके शब्दों में अनुभव भी था और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश भी।
उन्होंने कहा कि यह सफलता उन ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। सही मार्गदर्शन, कठिन परिश्रम और परिवार का सहयोग—यही इस उपलब्धि की असली पूंजी है। सिंगोड़िया गांव अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सेवा की पहचान बनता जा रहा है।

समारोह के दौरान ग्रामीणों ने नवचिकित्सकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उम्मीद जताई कि ये युवा डॉक्टर भविष्य में समाज और क्षेत्र की सेवा में अपनी भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में मौजूद बुजुर्गों की आंखों में संतोष था, तो युवाओं के चेहरों पर नए सपनों की चमक।
बाटाडू का यह आयोजन साबित कर गया कि जब गांव अपने बच्चों की मेहनत को सम्मान देता है, तो वह सिर्फ उपलब्धि का जश्न नहीं मनाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता भी रोशन करता है। आज सिंगोड़िया के ये नवचिकित्सक सफ़ेद कोट में सिर्फ डॉक्टर नहीं बने—वे पूरे इलाके की उम्मीद और प्रेरणा बन गए।

Hindu Solanki 
