बर्फ, बंदूक और भरोसा: क्या भगवान को भी सुरक्षा की ज़रूरत है? केदारनाथ में ITBP की तैनाती पर बड़ा सवाल
बर्फबारी के बीच केदारनाथ धाम में ITBP जवानों की तैनाती ने आस्था और व्यवस्था के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या भगवान की रक्षा इंसानों को करनी पड़ रही है, या यह श्रद्धालुओं की सुरक्षा का सवाल है? पढ़िए पूरी पड़ताल।
बर्फ, बंदूक और भरोसा: केदारनाथ में तैनात ITBP और आस्था का सवाल
केदारनाथ धाम इन दिनों बर्फ की मोटी चादर ओढ़े हुए है। चारों तरफ़ सन्नाटा, जमा देने वाली ठंड और आसमान से गिरती बर्फ। इसी खामोशी के बीच, मंदिर परिसर और आसपास हथियारों से लैस ITBP के जवान डटे हुए हैं—पूरी मुस्तैदी के साथ। तस्वीरें सामने आती हैं तो एक सवाल अपने-आप उठता है: क्या भगवान को भी सुरक्षा की ज़रूरत होती है?

यह सवाल आस्था पर हमला नहीं करता, बल्कि सोच को कुरेदता है।
केदारनाथ केवल एक मंदिर नहीं है, वह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। 2013 की आपदा के बाद से इस धाम की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर सरकारें ज़्यादा सतर्क हुई हैं। प्राकृतिक आपदाओं का खतरा, दुर्गम भौगोलिक स्थिति, सीमावर्ती इलाका और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु—ये सब वजहें हैं जिनके चलते ITBP जैसे बलों की तैनाती की जाती है।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही गहरा है।
जब हम कहते हैं कि “भगवान सबकी रक्षा करते हैं”, तो फिर यह दृश्य मन में द्वंद्व पैदा करता है—अगर भगवान की रक्षा के लिए बंदूकधारी जवान खड़े हैं, तो फिर भगवान किसकी रक्षा करेंगे?
क्या यह हमारी आस्था की कमी है, या हमारी व्यवस्था की मजबूरी?
असल में, यहां सुरक्षा भगवान के लिए नहीं, भगवान तक पहुंचने वाले इंसानों के लिए है। ITBP के जवान मंदिर की रक्षा नहीं कर रहे, वे उस व्यवस्था की रक्षा कर रहे हैं जिसमें श्रद्धालु सुरक्षित रहें, कोई अप्रिय घटना न हो, और आपदा की स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। आधुनिक राज्य व्यवस्था में आस्था को भी प्रशासनिक ढांचे के भीतर सुरक्षित रखना पड़ता है।
फिर भी, यह दृश्य कई लोगों को असहज करता है।
क्योंकि मंदिरों के आसपास बंदूकें, वर्दी और पहरा—आस्था की उस शांति से टकराते हैं, जिसकी कल्पना लोग करते हैं। यह टकराव बताता है कि आज का समाज भगवान पर भरोसा तो करता है, लेकिन सिस्टम पर ज़्यादा निर्भर है।
यह भी सच है कि आज धर्म केवल आध्यात्मिक विषय नहीं रहा। वह भीड़, राजनीति, पर्यटन और सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है। जहां भीड़ है, वहां व्यवस्था चाहिए। जहां व्यवस्था है, वहां सुरक्षा बल होंगे। और जहां सुरक्षा बल होंगे, वहां ऐसे सवाल उठेंगे।
शायद सही सवाल यह नहीं है कि भगवान को सुरक्षा की ज़रूरत है या नहीं,
सही सवाल यह है कि क्या हम इतने असुरक्षित हो गए हैं कि अपनी आस्था को भी बंदूक के साये में जीना पड़ रहा है?

केदारनाथ में बर्फ के बीच खड़े ITBP के जवान हमें यही याद दिलाते हैं कि आस्था और सुरक्षा आज साथ-साथ चल रहे हैं—चाहे यह तस्वीर हमें सहज लगे या बेचैन करे।
Hindu Solanki 
