इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में आयोग का गठन — हाई कोर्ट ने संकट की जाँच के लिए समिति बनाई

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले संक्रमण और मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जांच आयोग का गठन किया है। आयोग प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी तय करेगा।

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में आयोग का गठन — हाई कोर्ट ने संकट की जाँच के लिए समिति बनाई

इंदौर : शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी के कारण स्वास्थ्य संकट और मौतों के मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जांच आयोग का गठन किया है, ताकि दूषित पानी के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की विस्तृत जांच की जा सके। यह कदम तब उठाया गया जब इस समस्या से सैकड़ों लोग बीमार पड़े और दर्जनों लोगों की मौतें हुईं।

भागीरथपुरा इलाके में पेयजल में दूषित पानी के मिल जाने के कारण डायरिया और उल्टी-दस्त के संक्रमण का फैलना जारी रहा, जिससे सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हुए और कई लोगों की मौतें हुईं। स्थानीय रहवासी और विपक्षी नेता पहले भी पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति में गंभीर गड़बड़ियाँ होने की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या बनी रही।

हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने पूर्व हाई कोर्ट जज न्यायमूर्ति सुसिल कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया है, जो इस मामले की स्वतंत्र और सम्पूर्ण जांच करेगा। आयोग को कहा गया है कि वह:
 दूषित पानी के स्रोत और प्रकोप के कारणों की पहचान करे,
 प्रशासनिक या तकनीकी चूक का मूल्यांकन करे,
 जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे,
 और लंबे समय में ऐसी समस्या न दोहराई जाए इसके लिये सुझाव पेश करे।
आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह चार सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे।

आयोग को NABL-प्रमाणित लैब से पानी की गुणवत्ता परीक्षण, अस्पताल रिपोर्ट, सरकारी दस्तावेज़, साक्ष्य और गवाहों के बयान इकट्ठा करने का अधिकार भी दिया गया है। यह समिति सिविल कोर्ट के समकक्ष अधिकार के साथ जांच कर सकती है और आवश्यक सरकारी विभागों तथा संस्थाओं को रिकॉर्ड और सबूत उपलब्ध कराने का निर्देश दे सकती है।

भागीरथपुरा में पानी के दूषित होने की समस्या इतनी गंभीर रही कि अस्पतालों में सैकड़ों मरीज भर्ती हुए, कुछ ICU में भी इलाजरत रहे, और मौतों की संख्या लगातार बढ़ती रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पानी में मल-सीवेज के मिश्रण और गंदगी जैसी गंभीर गड़बड़ियाँ थीं, जो स्वास्थ्य के लिये अत्यंत खतरनाक हैं।