मेड़ता में ज्वेलर की चाकू से हत्या: सोने की बढ़ती कीमतों के बीच अपराधियों का बढ़ा हौसला, बाजार बंद

नागौर जिले के मेड़ता शहर में आधी रात को ज्वेलर पंकज सोनी की चाकू से हत्या कर दी गई, जबकि उन्हें बचाने आए दो कारीगर गंभीर रूप से घायल हो गए। बढ़ती सोने की कीमतों के बीच सराफा कारोबारियों पर हमलों और चोरी की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों ने बाजार बंद कर आरोपियों की गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग की है।

मेड़ता में ज्वेलर की चाकू से हत्या: सोने की बढ़ती कीमतों के बीच अपराधियों का बढ़ा हौसला, बाजार बंद

रात 12:30… जब सोना भारी था और ज़िंदगी हल्की कर दी गई

मेड़ता शहर आमतौर पर इतनी देर रात शांत हो जाता है कि गलियों में अपने ही कदमों की आवाज़ डराने लगती है। ब्रह्मपुरी इलाके में स्थित छोटी-सी सराफा दुकान के भीतर उस रात भी वही रोज़मर्रा का दृश्य था—
पंकज सोनी, उम्र करीब 40 साल।
सामने काउंटर के पास बैठे पश्चिम बंगाल से आए दो कारीगर—संदीप और संजय।

तीनों शायद दिनभर की थकान के बाद हिसाब-किताब समेट रहे थे। किसी को अंदेशा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में सोने की कीमत नहीं, इंसानी जान की कीमत तय होने वाली है।

अचानक दरवाज़ा खुला… और सब बदल गया

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात करीब 12:30 बजे दो युवक दुकान में दाखिल हुए।
न चेहरा ढका हुआ,
न किसी तरह की हड़बड़ी।

हाथ में चाकू था।
कोई बहस नहीं, कोई चेतावनी नहीं।

पहला वार सीधे पंकज सोनी पर किया गया।
एक के बाद एक…
इतनी तेजी से कि संभलने का मौका ही नहीं मिला।

जब संदीप और संजय अपने मालिक को बचाने आगे बढ़े, तो बदमाशों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा।
चाकू अब सिर्फ डराने का हथियार नहीं था—
वह मारने के इरादे से चल रहा था।

कुछ ही मिनटों में दुकान, जो दिन में चमकते गहनों से भरी रहती थी, खून से सनी हुई थी।

मौत मौके पर ही

पंकज सोनी ने वहीं दम तोड़ दिया।
संदीप और संजय गंभीर हालत में तड़पते रहे।
शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे, तब तक बदमाश अंधेरे में गायब हो चुके थे।

घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर उन्हें अजमेर रेफर किया गया।

यह सिर्फ लूट नहीं थी… सवाल यहीं से शुरू होते हैं

यह वारदात कई सवाल खड़े करती है—

  • अगर मकसद सिर्फ लूट था, तो इतनी बेरहमी क्यों?

  • दुकान में कोई बड़ी डकैती की सूचना नहीं मिली।

  • हमला सीधे जान लेने के इरादे से किया गया।

यानी यह घटना सिर्फ चोरी या लूट नहीं लगती,
यह हत्या में बदल चुकी आपराधिक सोच का संकेत देती है।

सोने की बढ़ती कीमत और बढ़ता अपराध

पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हैं।
और इसके साथ-साथ—

  • मेड़ता

  • आसोप

  • गंगानी

  • आसपास के ग्रामीण इलाके

इन क्षेत्रों में सराफा दुकानों पर चोरी, लूट और रेकी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

व्यापारी खुद मानते हैं कि—

“अब बदमाशों में डर नहीं रहा, लालच बढ़ गया है।”

जहां पहले चोरी होती थी,
अब चाकू और हत्या तक बात पहुंचने लगी है।

यह बदलाव अचानक नहीं आया—
यह लगातार कमजोर होती कानून व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसले का नतीजा है।

व्यापारियों का गुस्सा: बाजार बंद, शव लेने से इनकार

पंकज सोनी की हत्या के बाद मेड़ता का सराफा बाजार पूरी तरह बंद है।

परिजन, समाज के लोग और व्यापारी—

  • आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी

  • मृतक परिवार को मुआवजा

  • सराफा व्यापारियों की सुरक्षा व्यवस्था

की मांग पर अड़े हुए हैं।

परिजनों ने साफ कह दिया है—

“जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, शव नहीं उठाएंगे।”

यह सिर्फ शोक नहीं,
यह डर और गुस्से का विस्फोट है।

क्या यह सिस्टम की नाकामी नहीं?

यह सवाल अब हर किसी के मन में है—

  • क्या रात में व्यापार करना अपराध हो गया है?

  • क्या व्यापारी अपनी दुकान में भी सुरक्षित नहीं?

  • क्या अपराधियों को कानून का डर खत्म हो चुका है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि—

  • रात की गश्त न के बराबर है

  • सीसीटीवी का नेटवर्क अधूरा है

  • पुराने मामलों में आरोपियों पर सख्ती नहीं हुई

और यही वजह है कि
चोरी अब हत्या में बदल रही है।

यह मामला सिर्फ पंकज सोनी का नहीं है

यह घटना एक व्यक्ति की हत्या नहीं,
यह पूरे व्यापारिक समुदाय पर हमला है।

अगर आज सराफा व्यापारी असुरक्षित है,
तो कल कोई और।

आज चाकू ज्वेलर पर चला है,
तो कल किसी और पेशे पर।

अंत में वही सवाल…

क्या सोने की कीमतें बढ़ने के साथ
इंसानी जान सस्ती होती जा रही है?

क्या अपराधियों को अब यह भरोसा हो गया है कि
वे हत्या करके भी बच निकलेंगे?

और अगर आज मेड़ता में यह हुआ है,
तो क्या कल किसी और शहर की बारी है?