कानपुर Lamborghini केस में बड़ा एक्शन: पुलिस कमिश्नर ने SHO को लाइन-हाजिर किया
कानपुर में ₹10–12 करोड़ की Lamborghini हादसे के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। FIR में आरोपी का नाम तुरंत न जोड़ने पर ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन-हाजिर किया गया। पुलिस जांच जारी है, CCTV और गवाहों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में रविवार को हुए लैम्बोर्गिनी कार हादसे के बाद पुलिस ने अहम कार्रवाई करते हुए ग्वालटोली थाने के SHO (थाना प्रभारी) संतोष कुमार गौड़ को लाइन-हाजिर (सस्पेंड) कर दिया है। यह फैसला कानपुर पुलिस कमिश्नर, Raghubir Lal के निर्देश पर लिया गया, क्योंकि प्रथम जांच में थाना प्रभारी की बड़ी लापरवाही पाई गई थी।
8 फरवरी 2026 को कानपुर के Rev-3 मॉल के पास VIP रोड पर करीब ₹10–12 करोड़ की Lamborghini Revuelto कार बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़े लोगों, ऑटो-रिक्शा और बाइक में टकरा गई। इससे कम से कम छह लोग घायल हुए।

घटना के बाद वाहन को पुलिस ने जब्त कर लिया, और FIR दर्ज की गई। शुरुआत में अपराध में “अज्ञात व्यक्ति” का नाम लिया गया था, जिससे विवाद भी बढ़ा।
कानपुर पुलिस कमिश्नर ने बताया कि SHO ने घटना के बाद सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया और आरोपी शिवम मिश्रा का नाम FIR में तुरंत नहीं शामिल किया। शुरुआती तौर पर FIR में अनजान ड्राइवर ही शामिल हुआ था, जबकि सीसीटीवी वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों से यह स्पष्ट था कि कार शिवम मिश्रा चला रहा था। इसी वजह से SHO की लापरवाही मानकर उसे तुरंत लाइन-हाजिर किया गया।

पुलिस के अनुसार, जांच में प्रारंभिक साक्ष्यों से यह संकेत मिला कि शिवम मिश्रा (तम्बाकू कारोबारी के पुत्र) ही कार चला रहा था और उसका नाम FIR में शामिल किया गया है, हालांकि अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
लेकिन शिवम मिश्रा के वकील का दावा है कि हादसे के समय वह खुद ड्राइव नहीं कर रहा था और उनका ड्राइवर (मोहान) गाड़ी चला रहा था। अदालत में एक आवेदन भी दाखिल किया गया है, जिसमें यह दावा रखा गया है कि शिवम को अपराधी नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि वह गाड़ी नहीं चला रहा था।
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा है कि
लैम्बोर्गिनी जब्त कर, जांच जारी है,
CCTV फुटेज और अन्य सबूतों पर काम चल रहा है,
आरोपी का नाम FIR में जोड़ा गया है,
अगर आगे की जांच में कुछ और सामने आता है तो कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
घटना ने सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों में न्याय, वीआईपी ट्रीटमेंट और कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ी चर्चा शुरू कर दी है। कुछ लोग पुलिस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, तो कुछ वकील के दावों पर भी सवाल उठा रहे हैं। कुल मिलाकर मामला अभी जांच के अधीन है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
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