जनरल नरवणे ने साफ लिखा है कि सरकार ने चीन के खिलाफ ठोस एक्शन नहीं लिया। PM ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया ?
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की लिखी बातों और सार्वजनिक बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज है। चीन के मुद्दे पर सरकार की रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
लोकसभा में राहुल vs अमित शाह का तीखा टकराव: पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब पर 45 मिनट का हंगामा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सोमवार को 45 मिनट तक भारी हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देकर चीन-डोकलाम विवाद को उठाया, जिस पर अमित शाह और राजनाथ सिंह भड़क गए। स्पीकर ओम बिरला को बीच-बचाव करना पड़ा। मामला इतना गर्म हुआ कि अखिलेश यादव भी कूद पड़े।

क्या हुआ सदन में? टाइमलाइन
1:30 PM - राहुल का हमला शुरू
राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोल रहे थे। उन्होंने जनरल नरवणे की किताब का हवाला देते हुए कहा:
"इस किताब में लिखा है कि चीन ने डोकलाम में घुसपैठ की थी। सरकार इसे दबा रही है। यह 100% authenticated है।"
राहुल ने दावा किया कि:
-
डोकलाम में चीनी सेना घुस आई थी
-
PM मोदी ने इसे छुपाया
-
किताब प्रकाशित ही नहीं होने दी जा रही
1:35 PM - राजनाथ सिंह का पलटवार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए:
"राहुल जी जिस किताब का हवाला दे रहे हैं, वह प्रकाशित ही नहीं हुई है! अप्रकाशित किताब का सदन में जिक्र कैसे हो सकता है?"
राजनाथ ने राहुल से किताब सदन में पेश करने को कहा।
1:40 PM - स्पीकर की पहली चेतावनी
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बीच में टोका:
"सदन के नियमों के अनुसार अप्रकाशित किताब या लेख का हवाला नहीं दिया जा सकता। नेता प्रतिपक्ष आगे बढ़ें।"
1:45 PM - राहुल का जिद्दी रुख
राहुल रुके नहीं। उन्होंने दोबारा किताब पढ़ने की कोशिश की:
"यह लेख PM के चरित्र पर सवाल उठाता है। इसमें न तो चीन की बात है, न PM की। सरकार डर क्यों रही है?"
1:50 PM - अमित शाह एंट्री, आग पर तेल
गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए और तीखा प्रहार किया:
"राहुल गांधी ने खुद विवाद खत्म कर दिया! वे कह रहे हैं किताब छपी नहीं है। जो छपी नहीं, उसका हवाला कैसे? यह राष्ट्रपति के अभिभाषण से संबंधहीन है!"
अमित शाह ने राहुल को "राष्ट्रपति के बयान पर ही बोलने" को कहा।
2:00 PM - 45 मिनट का हंगामा
-
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने राहुल का बचाव किया
-
स्पीकर ने वेणुगोपाल को डांटा: "आप नेता प्रतिपक्ष के वकील नहीं हैं!"
-
अखिलेश यादव भी बीच में कूदे
-
किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई
-
सदन 45 मिनट तक कामकाज ठप
2:15 PM - स्पीकर का अंतिम फैसला
ओम बिरला ने साफ कहा:
"चाहे प्रकाशित हो या न हो, इस विषय पर चर्चा नहीं होगी। अगले स्पीकर अखिलेश यादव को बुलाया जाता है।"
विवाद की जड़: नरवणे की कौन सी किताब?
किताब का नाम: "Four Stars of Destiny" (अनुमानित)
-
लेखक: पूर्व CDS जनरल मनोज मुकुंद नरवणे
-
स्थिति: अप्रकाशित (सरकारी अनुमति लंबित)
-
स्रोत: Caravan मैगज़ीन में लीक हुआ अंश
राहुल ने क्या पढ़ने की कोशिश की?
राहुल के हाथ में Caravan पत्रिका थी, जिसमें नरवणे के लीक हुए संस्मरण प्रकाशित हुए थे। मुख्य दावे:
डोकलाम विवाद (2017) के दौरान:
- चीनी सेना भूटान सीमा में घुस आई थी
- भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की
- PMO ने सेना को "HOLD" का आदेश दिया
- इसका परिणाम: चीन को भारी नुकसान नहीं हुआ
राहुल का मुख्य आरोप:
"जनरल नरवणे ने साफ लिखा है कि सरकार ने चीन के खिलाफ ठोस एक्शन नहीं लिया। PM ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया।"
दोनों पक्षों के तर्क
| राहुल गांधी (कांग्रेस) | अमित शाह-राजनाथ (बीजेपी) |
|---|---|
| किताब 100% authenticated है | किताब अप्रकाशित है, कोट नहीं हो सकता |
| सरकार इसे दबा रही है | Caravan जैसी मैगज़ीन कुछ भी लिख सकती है |
| इसमें PM का चरित्र उजागर हो रहा | राष्ट्रपति अभिभाषण से असंबंधित |
| राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल | सदन के नियमों का उल्लंघन |
संसदीय नियम क्या कहते हैं?
लोकसभा नियम 352: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा अभिभाषण तक सीमित होनी चाहिए।
नियम 369: अप्रकाशित दस्तावेज़ों का सदन में हवाला निषिद्ध है।
स्पीकर का अधिकार: चर्चा को सीमित या समाप्त कर सकता है।
राहुल का उल्लंघन:
-
अप्रकाशित किताब का हवाला
-
राष्ट्रपति अभिभाषण से असंबंधित मुद्दा
कांग्रेस समर्थक:
"राहुल सच्चाई बोल रहे थे, इसलिए BJP आग बबूला!"
BJP समर्थक:
"45 मिनट बर्बादी! नियम तोड़ने का नया रिकॉर्ड राहुल ने बनाया!"
नरवणे किताब विवाद की पूरी पृष्ठभूमि
जनरल नरवणे कौन?
-
पूर्व CDS (2019-2022)
-
डोकलाम (2017) और गलवान (2020) संघर्ष के दौरान सक्रिय
-
किताब लिखने के लिए सरकारी अनुमति जरूरी (सुरक्षा नियम)
Caravan मैगज़ीन का खुलासा:
जनवरी 2026 में Caravan ने दावा किया कि नरवणे के संस्मरण लीक हो गए। मुख्य बिंदु:
डोकलाम पर PMO का "HOLD" आदेश
चीनी घुसपैठ रोकने में देरी
सेना को "political compulsions" का सामना
सरकार का रुख:
-
किताब पर सुरक्षा आधारित रोक
-
प्रकाशन से पहले सेंसरशिप जरूरी
-
Caravan के दावों को "झूठा प्रचार"
पिछले संसदीय रिकॉर्ड्स में तुलना
| वर्ष | विवाद | कितने मिनट हंगामा |
|---|---|---|
| 2023 | Adani Hindenburg | 35 मिनट |
| 2024 | Manipur Violence | 52 मिनट |
| 2025 | Waqf Bill | 41 मिनट |
| 2026 | Naravane Book | 45 मिनट |
राजनीति बनाम राष्ट्रहित?
कांग्रेस का नैरेटिव:
राहुल ने "राष्ट्रीय सुरक्षा" पर सवाल उठाया
सरकार जवाब देने के बजाय सदन से भटकाना चाहती है
नरवणे जैसे अफसरों की आवाज दबाई जा रहीबीजेपी का नैरेटिव:
राहुल ने सदन के नियम तोड़े
राष्ट्रपति अभिभाषण को व्यक्तिगत हमले का हथियार बनाया
Caravan जैसी मैगज़ीन के झूठे प्रचार का सहारा लियाअमित शाह-राजनाथ की बौखलाहट के 3 कारण
1. डोकलाम का काला सच
2017 में दुनिया ने देखा था कि कैसे भारतीय सेना ने चीन को पीछे dhakela। लेकिन नरवणे के मुताबिक:
"सेना को पूरा मौका नहीं दिया गया। PMO ने रोक दिया।"
2. गलवान का खुलासा
20 सैनिक शहीद हुए। दुनिया ने कहा "भारत ने चीन को सबक सिखाया"। लेकिन क्या हुआ था असली जंग में?
3. CDS पद की गरिमा
भारत के पहले CDS ने क्या लिखा, यह जानने का हक किसे नहीं?
अमित शाह का गुस्सा इसीलिए था – क्योंकि राहुल ने उसी "चुप्पी के पहरे" को चुनौती दी!
विपक्ष का साथ: समाजवादी पार्टी भी मैदान में
अखिलेश यादव ने सदन में कहा:
"राहुल सही कह रहे हैं। सरकार सच्चाई क्यों छुपा रही? जनरल साहब को बोलने का हक है।"
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल:
"45 मिनट हंगामा इसलिए हुआ क्योंकि BJP के पास जवाब नहीं था।"
कानूनी सवाल: क्या प्रकाशन रोकना संवैधानिक है?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19)
-
पूर्व सैन्य अधिकारी भी नागरिक है
-
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर मनमानी सेंसरशिप नहीं चल सकती
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले:
1967: "सुरक्षा के नाम पर पूर्व अफसरों को चुप नहीं कराया जा सकता"
2019: "रिटायर्ड जजों की किताबें प्रकाशित हो सकती हैं"
तो नरवणे के साथ भेदभाव क्यों?
लोकतंत्र में सच्चाई छुपाना सबसे बड़ा अपराध
राहुल गांधी ने सही सवाल उठाया। BJP ने सही जवाब नहीं दिया।
5 बड़े सवाल जो अनुत्तरित हैं:
-
नरवणे की किताब में ऐसी क्या बात है जो प्रकाशित नहीं हो सकती?
-
डोकलाम में PMO ने सेना को क्यों रोका?
-
चीनी घुसपैठ को छुपाने का मकसद क्या था?
-
राष्ट्रीय सुरक्षा का सच जनता से क्यों छुपाया जा रहा?
-
लोकतंत्र में सेंसरशिप कब तक चलेगी?
Hindu Solanki 

