77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर भारत ने दिखाया सैन्य ताकत और टेक्नोलॉजी का जलवा
भारत ने 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ से दुनिया को दिखाई सैन्य ताकत, मिसाइल तकनीक, ऑपरेशन सिंदूर और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का संदेश।
कर्तव्य पथ पर भारत ने दिखाया सैन्य ताकत और टेक्नोलॉजी का जलवा
भारत ने 77वाँ गणतंत्र दिवस दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बेहद भव्य और प्रेरणादायक तरीके से मनाया, जिसमें सेना, वायुसेना और नौसेना की ताकत के साथ-साथ देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और समारोह की अध्यक्षता की, जिसमें यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लिएन विशेष अतिथि के रूप में शामिल रहे।

प्रमुख आकर्षण और घटनाक्रम
ऑपरेशन सिंदूर का Tableau: इस बार परेड में ‘Operation Sindoor’ को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जो भारतीय सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का प्रतीक है। इसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के सफल अभियानों को एक तीन-सेवा (tri-services) झांकी के रूप में कर्तव्य पथ पर दिखाया गया।

फ्लाईपास्ट और एयर शो: वायुसेना ने विशेष ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ में राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों के साथ शानदार फ्लाईपास्ट किया, जिसे दर्शकों ने तालियों से नवाजा।
मिसाइल और हथियार प्रदर्शनी:
BrahMos सुपरसोनिक मिसाइल
S-400 वायु रक्षा प्रणाली
DRDO के LR-AShM हाइपरसोनिक मिसाइल
Akash व मिसाइल सिस्टम
T-90 और अर्जुन टैंक

इन सबका प्रदर्शन परेड में प्रमुख रूप से शामिल हुआ, जिससे भारत की रक्षा तकनीक और युद्ध क्षमताओं की गहराई दिखी।
संस्कृति और विविधता: सैन्य ताकत के साथ ही देश की संस्कृति और विविधता को भी झांकियों और कल्चरल प्रोग्राम्स के माध्यम से दर्शाया गया।

परेड का अर्थ और संदेश
इस बार की परेड सिर्फ परम्परागत उत्सव नहीं थी — यह भारत की रक्षा शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय संप्रभुता का संदेश दुनिया को देने वाली थी। ऑपरेशन सिंदूर जैसा थीम दर्शाता है कि भारत आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ निर्णायक रूप से खड़ा है।

क्या फायदा हुआ?
भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान की विश्व स्तर पर छवि मजबूत हुई।
घरेलू रक्षा उत्पादन, मिसाइल तकनीक और वायुसेना की उन्नत क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।
जनता में राष्ट्रीय गर्व और आत्मविश्वास बढ़ा, और युवाओं को सेना और टेक्नोलॉजी में करियर के लिए प्रेरणा मिली।

क्या नुकसान या आलोचना?
इस तरह की भव्य सैन्य प्रदर्शन पर कुछ आलोचनाएँ भी उठती हैं कि आर्थिक संसाधनों को सामाजिक सेवाओं या शिक्षा में खर्च होना चाहिए, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसे प्रदर्शन आवश्यक हैं ताकि देश की रणनीतिक क्षमताओं का प्रभावी संदेश दुनिया को मिले।

