राजस्थान-गुजरात में प्रति-व्यक्ति आय की खाई चौड़ी, गुजरात 3 लाख पार, राजस्थान अब भी 2 लाख से नीचे
आर्थिक वर्ष 2024-25 के ताज़ा आँकड़ों ने एक बार फिर राजस्थान और गुजरात के बीच विकास के मॉडल में ज़बरदस्त अंतर को उजागर कर दिया है।
जयपुर। आर्थिक वर्ष 2024-25 के ताज़ा आँकड़ों ने एक बार फिर राजस्थान और गुजरात के बीच विकास के मॉडल में ज़बरदस्त अंतर को उजागर कर दिया है। जहाँ गुजरात ने पहली बार प्रति-व्यक्ति आय के मामले में 3 लाख रुपये का आँकड़ा पार कर लिया है, वहीं राजस्थान अभी भी 1.85 लाख रुपये पर ही साँस ले रहा है। यानी गुजरात की प्रति-व्यक्ति आय राजस्थान से करीब 62% अधिक है।
आँकड़े जो हैरान करते हैं
गुजरात (2024-25): ₹3,00,957
राजस्थान (2024-25): ₹1,85,053
अंतर: ₹1,15,904 (लगभग 62.5% अधिक गुजरात में)
राजस्थान में पिछले साल से वृद्धि: 11.04% (₹1,66,647 से ₹1,85,053)
गुजरात पिछले एक दशक में प्रति-व्यक्ति आय में ~90.7% की छलाँग लगा चुका है
क्यों है इतना बड़ा फर्क?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य कारण हैं:
गुजरात: मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग आधार, केमिकल-पेट्रोकेमिकल हब, फार्मा इंडस्ट्री, पोर्ट-आधारित व्यापार, निवेशक-अनुकूल नीतियाँ
राजस्थान: अभी भी कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था (कृषि का GVA में हिस्सा ~25%), औद्योगिक निवेश में कमी, कौशल-आधारित रोज़गार का अभाव
गुजरात की GSDP पिछले एक दशक में लगभग चार गुना बढ़ी, जबकि राजस्थान की अभी दोगुनी से थोड़ा ज़्यादा।
राजस्थान का टारगेट: 2030 तक $350 बिलियन इकॉनमी
राजस्थान सरकार ने ‘राइज़िंग राजस्थान’ के तहत बड़ा लक्ष्य रखा है। राज्य 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 350 बिलियन डॉलर तक ले जाना चाहता है। लेकिन प्रति-व्यक्ति आय के मौजूदा स्तर पर यह लक्ष्य हासिल करने के लिए औसतन 14-15% सालाना वृद्धि की ज़रूरत होगी — जो वर्तमान 8-9% से काफी ज़्यादा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि माइनिंग, सौर ऊर्जा, पर्यटन, सीमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर में तेज़ी लाकर और गुजरात मॉडल से सबक लेकर यह खाई कम की जा सकती है।

