बूंदी में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रेलर ने बाइक को कुचला, परिवार के 3 मासूम बच्चों समेत कई की मौत, मातम छाया

बूंदी जिले के डाबी थाना क्षेत्र में एनएच-27 पर ट्रेलर की टक्कर से एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि पिता गंभीर घायल हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

बूंदी में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रेलर ने बाइक को कुचला, परिवार के 3 मासूम बच्चों समेत कई की मौत, मातम छाया

बूंदी में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रेलर की टक्कर से तीन मासूमों की मौत, पिता गंभीर

राजस्थान के बूंदी जिले के डाबी थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। एनएच-27 पर तेज रफ्तार ट्रेलर ने पीछे से एक बाइक को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

कैसे हुआ हादसा?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बाइक पर सवार परिवार एनएच-27 से गुजर रहा था, तभी पीछे से आ रहे एक ट्रेलर ने अनियंत्रित गति में बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार सड़क पर जा गिरे। हादसे में तीनों बच्चों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि पिता मदन बंजारा गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही डाबी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रेलर व बाइक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ट्रेलर चालक की पहचान और दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने में जुटी है। शुरुआती जांच में ट्रेलर की तेज रफ्तार और नियंत्रण खोना मुख्य वजह मानी जा रही है।

इलाके में शोक की लहर

तीन मासूमों की एक साथ मौत से गांव और आसपास के क्षेत्र में गहरा सदमा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-27 पर भारी वाहनों की रफ्तार अक्सर तेज रहती है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। परिजनों के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह हादसा एक बार फिर राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों और दोपहिया चालकों के बीच सुरक्षा दूरी, स्पीड मॉनिटरिंग और सख्त यातायात पालन की जरूरत महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • ओवरस्पीडिंग पर कड़ी निगरानी

  • हाईवे पर स्पीड कैमरे और पेट्रोलिंग

  • दोपहिया सवारों के लिए अलग लेन या चेतावनी संकेत

  • भारी वाहनों की नियमित फिटनेस जांच

जैसे कदम ऐसे हादसों को रोकने में मदद कर सकते हैं।

तीन मासूम जिंदगियों का यूं चला जाना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की क्षति है। सवाल यही है—क्या हर बड़े हादसे के बाद हम कुछ समय शोक मनाकर फिर भूल जाते हैं, या फिर सड़क सुरक्षा को सच में प्राथमिकता बनाएंगे?