सोशल मीडिया फ्रेंडशिप के बाद घर बुलाकर बंधक बनाने व लूट के मामले में दो आरोपियों को जमानत

जयपुर में सोशल मीडिया के जरिए हुई दोस्ती कथित लूट और विवाद में बदल गई। फरियादी ने आरोप लगाया कि घर बुलाकर बंधक बनाकर एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए और नकदी व टैबलेट छीने गए। वहीं बचाव पक्ष ने इसे शादी के दबाव और आपसी विवाद का मामला बताया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद युवती समेत दो आरोपियों को जमानत दे दी। पढ़ें पूरा मामला।

सोशल मीडिया फ्रेंडशिप के बाद घर बुलाकर बंधक बनाने व लूट के मामले में दो आरोपियों को जमानत

सोशल मीडिया दोस्ती से विवाद तक: जयपुर में कथित लूट मामले में दो आरोपियों को जमानत

जयपुर। सोशल मीडिया के जरिए हुई दोस्ती, शादी के प्रस्ताव और कथित लूटपाट के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में जयपुर की एक अदालत ने राहत देते हुए एक युवती समेत दो आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत के इस आदेश के बाद मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन रिश्तों की विश्वसनीयता और उनसे जुड़े जोखिमों पर बहस छेड़ दी है।

अदालत ने दी जमानत

मामले की सुनवाई न्यायाधीश संजय कुमार मीना की अदालत में हुई। अदालत ने नादौती (करौली) निवासी ओमप्रकाश योगी और बिहार की एक युवती को जमानत प्रदान की। दोनों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता मांगीलाल चौधरी और रोशन भंडारी ने पैरवी की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने का आदेश पारित किया।

(गौरतलब है कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है; मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।)

क्या है आरोप?

फरियादी राजेश कुमार गौड़ ने आरोप लगाया कि उनकी सोशल मीडिया पर एक युवती से दोस्ती हुई। बातचीत के बाद युवती ने उन्हें घर बुलाया, जहां कथित रूप से उन्हें बंधक बनाकर ऑनलाइन एक लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। साथ ही टैबलेट और नकदी भी छीनने का आरोप लगाया गया है।

बचाव पक्ष का पक्ष

वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अदालत में अलग तस्वीर पेश की गई। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि फरियादी ने सोशल मीडिया पर अपनी युवावस्था की तस्वीर लगा रखी थी, जबकि मुलाकात के दौरान उनकी वास्तविक उम्र लगभग 50 वर्ष पाई गई।

बचाव पक्ष के अनुसार, युवती ने इस आधार पर शादी से इनकार कर दिया था। आरोप यह भी लगाया गया कि फरियादी पिछले करीब छह महीने से युवती पर विवाह का दबाव बना रहे थे। विवाद बढ़ने पर झगड़ा हुआ और मौके पर पहुंचे ओमप्रकाश योगी को भी मामले में शामिल कर लिया गया।

सोशल मीडिया रिश्तों पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले रिश्तों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन प्रोफाइल में गलत या अधूरी जानकारी, भावनात्मक जुड़ाव में जल्दबाज़ी और पारदर्शिता की कमी कई बार गंभीर विवाद का कारण बनती है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कई बार यह आपसी विवाद होता है तो कई बार आपराधिक साजिश भी सामने आती है।

अब इस मामले में आगे की सुनवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोप किस हद तक साबित होते हैं।