राजस्थान विधानसभा में हंगामा: राइट टू हेल्थ कानून पर सत्ता-विपक्ष में भिड़ंत
राजस्थान विधानसभा में 'राइट टू हेल्थ' कानून को लेकर सत्ता और विपक्ष में तीखी झड़प, कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया। स्पीकर ने सदन में हंगामे पर सख्त चेतावनी दी।
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को राइट टू हेल्थ कानून के नियमों को लेकर सत्ता और विपक्ष में गर्मा-गर्म बहस देखने को मिली। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में जमकर नारेबाजी की और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया।
सवाल पर विवाद, मंत्री ने पिछली सरकार पर तंज कसा
संसद में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने राइट टू हेल्थ एक्ट के नियम लागू न होने पर सवाल उठाए। स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने जवाब देते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने चुनावी लाभ के लिए आचार संहिता से ठीक पहले यह बिल प्रस्तुत किया था। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत जनता को हर तरह का मुफ्त इलाज मिल रहा है, इसलिए इस कानून की अलग से आवश्यकता नहीं है।
विपक्ष ने सरकार पर नियम लागू करने का दबाव डाला
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार से स्पष्टता की मांग की कि क्या वह इस कानून को लागू करना चाहती है या नहीं। जूली ने यह भी सवाल उठाया कि राजस्थान देश का पहला राज्य था जिसने यह कानून लाया, फिर नियम बनाने में देरी क्यों हो रही है।
निजी वाहनों को टोल से राहत पर सरकार का फैसला
हंगामे के बीच डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने बताया कि प्रदेश के स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों को फिलहाल टोल फ्री करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2018 में वसुंधरा राजे सरकार ने निजी वाहनों को टोल मुक्त किया था, लेकिन 2019 में तत्कालीन गहलोत सरकार ने यह फैसला पलट दिया था। वर्तमान सरकार इस मामले में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं रख रही।
स्पीकर ने जताई नाराजगी, कार्यवाही स्थगित करने की चेतावनी
सदन में नारेबाजी कर रहे कांग्रेस विधायकों पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर सदन में हंगामा और असहयोग जारी रहा, तो वह पूरे दिन के लिए कार्यवाही स्थगित कर देंगे। इसके बाद कांग्रेस विधायक वॉकआउट कर सदन से बाहर चले गए।
Saloni Kushwaha 
