भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंदन से मां वाग्देवी की मूर्ति वापस लाने का रास्ता साफ

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला फैसले के बाद धार स्थित मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा फिर चर्चा में है। जानिए राजा भोज, भोजशाला विवाद, ब्रिटिश म्यूजियम में रखी प्रतिमा और कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी।

भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंदन से मां वाग्देवी की मूर्ति वापस लाने का रास्ता साफ

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले ने एक बार फिर सदियों पुराने विवाद और मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अदालत के इस फैसले को ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इससे लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की राह मजबूत हुई है।

राजा भोज ने बसाया था ‘विद्या की काशी’

इतिहासकारों के अनुसार, परमार वंश के प्रतापी राजा राजा भोज ने 1034 ईस्वी में धार में एक विशाल शिक्षा केंद्र की स्थापना की थी, जिसे ‘सरस्वती सदन’ कहा जाता था। यह स्थान संस्कृत, दर्शन, वेद और व्याकरण की शिक्षा का बड़ा केंद्र माना जाता था। इसी परिसर में विद्या की देवी मां वाग्देवी (सरस्वती) की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी।

खिलजी के हमले के बाद बदला स्वरूप

1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के हमले के दौरान भोजशाला का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। बाद में दिलावर खान और महमूद खिलजी के शासनकाल में टूटे हुए अवशेषों और स्तंभों से वहां मस्जिद का निर्माण किया गया, जिसे आगे चलकर ‘कमाल मौला मस्जिद’ के नाम से जाना गया। इसी दौर में मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा इतिहास के अंधेरे में गुम हो गई।

अंग्रेजों के दौर में मिली प्रतिमा

साल 1875 में ब्रिटिश शासन के दौरान भोजशाला परिसर में खुदाई हुई, जिसमें मां वाग्देवी की खंडित प्रतिमा बरामद हुई। इसके कुछ साल बाद ब्रिटिश अधिकारी मेजर किनकेड इस प्रतिमा को इंग्लैंड ले गए। वर्तमान में यह प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित रखी गई है।

1961 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने ब्रिटिश म्यूजियम जाकर इस प्रतिमा का अध्ययन किया था। उन्होंने पुष्टि की थी कि यह वही मूल प्रतिमा है, जो धार की भोजशाला में स्थापित थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि भोजशाला का मूल स्वरूप वाग्देवी मंदिर का था और हिंदुओं की पूजा परंपरा वहां लगातार बनी रही। कोर्ट ने 2003 की उस व्यवस्था को भी खारिज कर दिया, जिसके तहत परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी।

इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ब्रिटिश म्यूजियम से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए आवश्यक कूटनीतिक और कानूनी प्रयास करे।

अब आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार को ब्रिटेन सरकार और ब्रिटिश म्यूजियम से औपचारिक बातचीत करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर कानूनों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर भारत अपना दावा मजबूत कर सकता है।

फिलहाल भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिकृति स्थापित है, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मूल प्रतिमा की वापसी की मांग और तेज हो गई है।