मंत्री अविनाश गहलोत का सियासी सफरनामा, पालिका अध्यक्ष पराजय से मंत्री पद तक
अविनाश गहलोत की राजनीतिक यात्रा संघर्ष और सफलता की मिसाल है। 2010 में बीजेपी जॉइन करने के बाद उन्होंने संगठन में लगातार काम किया। शुरुआत में नगर पालिका चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2018 में जैतारण से पहली बार विधायक बने और 2023 में दोबारा जीत हासिल की। वर्तमान में वे भजनलाल शर्मा सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री हैं। उनकी साफ छवि और संगठनात्मक पकड़ ने उन्हें प्रदेश राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई है।
अविनाश ने 2010 में भारतीय जनता पार्टी ज्यॉइन की थी और फिर लगातार पार्टी संगठन के लिए काम करते रहे. बाद में पार्टी ने उन्हें जैतारण विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वह पार्टी की उम्मीदों पर लगातार खरे भी उतरे. उन्होंने जैतारण विधानसभा सीट से 2018 और 2023 दोनों ही चुनावों में जीत हासिल की. पर क्या आप जानते हैं, राजस्थान की जैतारण विधानसभा सीट प्रदेश की उन सीटों में आती हैं, जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सबसे ज्यादा पकड़ हैं और पार्टी यहाँ लगभग 30 वर्षो से जीतती आ रही हैं. यही से अविनाश गहलोत ने भी जीत दर्ज की, जो प्रदेश की भजन लाल शर्मा सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री हैं.
अविनाश गहलोत का जन्म 9 दिसंबर 1981 को में हुआ था
इनके पिता का नाम ओंकार सिंह और माता का नाम स्नेहलता देवी है
अविनाश ने प्रीति कुमारी से शादी की
जिनसे उनका एक बेटा और एक बेटी है
अविनाश गहलोत जाति से राजपूत है
गहलोत पर कोई भी आपराधिक मामला नहीं है
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर से स्नातक किया
राजस्थान के महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय से एलएलबी किया
अविनाश गहलोत की राजनीतिक यात्रा वर्ष 2010 से शुरू हुई. सन 2010 वे भारतीय जनता पार्टी ज्यॉइन कर ली थी. पार्टी ने उन्हें व्यवस्था सम्बन्धी काम दे दिया. हालांकि 2010 अविनाश नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा पर पराजय हाथ लगी. बाद में उनकी रूचि राजनीति में बढ़ती चली गई. वह कांग्रेस के विरुद्ध बोलते थे. पार्टी ने उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें वर्ष 2013 में राजस्थान के जैतारण विधानसभा चुनाव क्षेत्र का मीडिया प्रभारी बना दिया. इसके बाद वर्ष 2014 में वह राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी भाजपा युवा मोर्चा का सदस्य बन गए. जबकि वर्ष 2016 में भाजपा के युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष बन गए. बाद में वर्ष 2018 में वह भारतीय जनता पार्टी के जैतारण विधान सभा के नमो एप के संयोजक बन गए. उसी वर्ष राजस्थान विधान सभा का भी चुनाव होना था और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें जैतारण विधान सभा से टिकट दिया. उसके बाद वे पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा और फिर किस्मत ने उनका साथ दिया. वे पार्टी के विश्वास पर खरे उतरे और उनकी जीत हो गई.
इस चुनाव में अविनाश गहलोत ने कांग्रेस के दिलीप चौधरी को 12,188 वोटो से पराजित किया
इस चुनाव में अविनाश को 65,607 तो दिलीप चौधरी को 53,419 वोट पड़े
जीत के बाद वे पहली बार 2018 में जैतारण से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे
जैतारण विधानसभा क्षेत्र पहले पाली जिले में पड़ता था पर अब यह ब्यावर जिले का हिस्सा है
इस क्षेत्र में सीमेंट की बड़ी बड़ी फैक्टरियां स्थापित है
2013 में जैतारण विधानसभा सीट पर बीजेपी का ही अधिकार था
जब राजस्थान में 2023 का विधान सभा चुनाव हुआ
तब एक बार फिर से पार्टी ने अविनाश गहलोत को अपना उम्मीदवार बनाया
इस बार फिर से अविनाश पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरे
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सुरेंद्र गोयल को लगभग 14,000 वोटो से पराजित किया
इस चुनाव में अविनाश को 66,277 मत पड़े तो कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेंद्र गोयल को 52,751 मत पड़े
जैतारण विधान सभा क्षेत्र, राजस्थान में बीजेपी का गढ़ माना जाता है. पार्टी यहाँ तीन दशक में केवल एक बार छोड़कर लगातार जीत रही है. 2023 राजस्थान विधान सभा में पार्टी की जीत के बाद अविनाश गहलोत को भजन लाल शर्मा मंत्रिमंडल में स्थान मिला और उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग दिया गया. वर्तमान में अविनाश गहलोत राजस्थान के जैतारण विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक हैं एवं प्रदेश की भजन लाल शर्मा सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के पद पर आसीन हैं....2023 विधानसभा चुनाव के समय अविनाश गहलोत के द्वारा घोषित चल-अचल मिलाकर कुल संपत्ति 1,26,76,390 करोड़ है. इसके साथ ही उनपर 24,22,048 लाख का कर्ज भी है.
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