शहीद ए आजम भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की 96वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित

सूरतगढ़ में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की 96वीं पुण्यतिथि पर भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। भगत सिंह चौक पर बड़ी संख्या में लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को याद किया। इस दौरान देशभक्ति नारों से माहौल गूंज उठा। वक्ताओं ने युवाओं को शहीदों के आदर्श अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

शहीद ए आजम भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की 96वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित

सूरतगढ़ में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की 96वीं पुण्यतिथि पर भगत सिंह चौक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नागरिकों ने एकत्रित होकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की और “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरे क्षेत्र को गूंजायमान कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस दौरान विधायक डूंगर राम गेदर, पीसीसी सदस्य परशुराम भाटिया, मदन ओझा, महावीर भोजक, लक्ष्मण शर्मा, रमेश पारीक, काजल छाबड़ा और योगेश स्वामी सहित कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस मौके पर वक्ताओं ने शहीदों के जीवन और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। कामरेड मदन ओझा और महावीर भोजक ने युवाओं और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नशे से दूर रहने और देशभक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में बिरमा देवी नायक, दीपक, शीला, ओम राजपुरोहित, किशन स्वामी, सुरेंद्र शर्मा, रामेश्वर तिवारी, ओमप्रकाश कालवा, महेंद्र निर्माण, जितेंद्र शर्मा, नरेश भोजक, कविश जोशी, भवानी सिसोदिया, गुलजारी सुकीजा, सोनू कच्छावा, सनी शर्मा, सरदार रोमी, सुभाष चंद्र, भवानी शंकर भोजक, जेपी गिला, ओंकार सिंह, शक्ति सिंह भाटी, आनंद ओझा, पूसा पुरी, लोकतंत्र सेनानी मुरलीधर उपाध्याय, करनीदान सिंह राजपूत, खुबचंद सिंधी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” और “शहीदों का यह बलिदान याद करेगा हिंदुस्तान” जैसे नारों से माहौल देशभक्ति से भर गया।

नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों ने भी सुबह से ही भगत सिंह चौक की सफाई और व्यवस्था संभालकर कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया। आयोजन में रमेश पारीक और महावीर भोजक की सक्रिय भूमिका रही।

यह आयोजन न केवल शहीदों के बलिदान को याद करने का अवसर बना, बल्कि समाज को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश भी देता नजर आया।