रणथंभौर में बढ़े बाघ, नए सफारी पार्क की तैयारी शुरू
सवाई माधोपुर में बाघों की संख्या 76 पार। रणथंभौर पर बढ़ते दबाव के बीच IOC जमीन पर नया सफारी पार्क बनाने का प्रस्ताव भेजा गया।
सवाई माधोपुर में बाघों की संख्या 76 से ज्यादा पहुंच गई है। क्षमता से ज्यादा टाइगर अब इनके लिए चुनौती बन चुका है। ऐसे में अब इन बाघों के लिए नए ठिकानें की तलाश की जा रही है। इसके लिए रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे आईओसी प्लांट की जमीन मांगी गई है। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय को 23 साल से बंद पड़ी प्लांट की जमीन देने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। तीन महीने (जनवरी) पहले कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इसका प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय को भेजा था। दावा किया जा रहा है कि यदि सबकुछ ठीक रहा और ये जमीन मिल गई तो यहां बाघों के लिए सफारी पार्क तैयार किया जाएगा।
100 बीघा जमीन मांगी, बूढ़े-बीमार बाघ होंगे शिफ्ट
जानकारी के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व 1700 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है। 2015 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) की ओर से हुई स्टडी में सामने आया कि 50 बाघों की स्थिति में ये टाइगर रिजर्व सेफ रहता है। न तो इनके बीच टेरिटरी फाइट रहती और न ही इनके लिए जगह कम पड़ती है। लेकिन, अब जिस हिसाब से ये संख्या बढ़ रही है कि उसके अनुसार यहां टेरिटोरियल फाइट बढ़ गई है।
इन सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए इसकी 100 बीघा जमीन मांगी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय से एनओसी मिल जाने के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी तय करेगी कि यहां कितने बाघ रखे जाएंगे और कब काम शुरू होगा। प्रस्ताव के अनुसार यह पार्क रणथंभौर से अलग होगा और यहां घायल व बुजुर्ग बाघों को रखा जाएगा। इससे उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी और मुख्य क्षेत्र पर दबाव कम होगा।
सालों से बंद पड़ा प्लान, 8 फीट ऊंची दीवार, डेवलप हो गया जंगल
आईओसी प्लांट क्षेत्र में चारों तरफ करीब आठ फीट ऊंची दीवार है। लंबे समय से बंद रहने के कारण यहां जंगल विकसित हो चुका है। प्रस्ताव के अनुसार यहां नेचुरल हैबिटेट जैसा माहौल रखा जाएगा। एनक्लोजर का साइज और संख्या मंजूरी के बाद तय होंगे। प्रस्तावित पार्क में एक समय में दो से तीन बाघ रखे जा सकेंगे। इनमें घायल और बुजुर्ग बाघों को रखने की योजना है। बाघों को ट्रेंकुलाइज करने के बाद यहां शिफ्ट किया जाएगा। मेडिकल और निगरानी के लिए रणथंभौर का वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल ही सेवाएं देगा।
इसके अलावा वन विभाग द्वारा 500-500 हेक्टेयर के ग्रासलैंड विकसित किए गए हैं, जिससे शिकार प्रजातियों जैसे सांभर और चीतल की संख्या बढ़ सके। इसके साथ ही मुकुंदरा टाइगर हिल्स की तरह बड़े एनक्लोजर बनाने की जरूरत बताई गई है, ताकि घायल बाघों की देखभाल और निगरानी की जा सके।
रिजर्व और सफारी में ये रहेगा फर्क
रणथंभौर में वर्तमान में दिन में दो सुबह और दो दोपहर की शिफ्ट में सफारी होती है, हर शिफ्ट करीब तीन घंटे की होती है। एनटीसीए गाइडलाइन के अनुसार एक पारी में 144 वाहन सफारी पर जा सकते हैं, जिससे दैनिक क्षमता सीमित रहती है। वहीं कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि आईओसीएल क्षेत्र में टाइगर सफारी पार्क विकसित किया जाए। एनटीसीए गाइडलाइन के अनुसार रणथंभौर में सफारी वाहनों की संख्या तय है।
नए पार्क में एक घंटे की सफारी सूरज निकलने से सूरज ढलने तक कराई जा सकेगी और करीब 200 गाड़ियां संचालित हो सकती हैं। अन्य स्थानों जैसे नाहरगढ़ और गिर की तरह यहां सूरज निकलने से सूरज ढलने तक सफारी चलाने की संभावना बताई गई है।
अब तक 24 बाघ हो चुके हैं शिफ्ट
बाघों की संख्या बढ़ने के साथ उनके बीच टेरेटरी को लेकर संघर्ष की स्थिति बन रही है। कई बार बाघ जंगल से बाहर निकल रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संपर्क की घटनाएं बढ़ रही हैं। वन विभाग इसे नियंत्रित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। जंगल से बाहर निकलने वाले बाघों पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर लगाए जा रहे हैं। हाल ही में टी 2407 बाघ को कॉलर लगाया गया है। इसके अलावा रणथंभौर-कैलादेवी और रामगढ़ विषधारी इंदरगढ़ लाखेरी कॉरिडोर को विकसित किया जा रहा है, जिससे बाघों को सुरक्षित मूवमेंट का रास्ता मिल सके।
वहीं इनकी बढ़ती संख्या को कंट्रोल करने के लिए बाघों को शिफ्ट करने का प्लान तैयार किया गया था। साल 2007 में पहली बार रणथम्भौर से सरिस्का के लिए बाघों को शिफ्ट किया गया था। अब तक 24 बाघ-बाघिन सरिस्कर, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी में शिफ्ट किए जा चुके हैं।
Ayush Pareek 
