जयपुर रामनिवास बाग चंदन चोरी केस: CAG की सख्ती, 90 लाख वसूली के आदेश
जयपुर के रामनिवास बाग से चंदन के पेड़ों की चोरी पर CAG ने कड़ी टिप्पणी की। रिपोर्ट में 90 लाख की वसूली और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जयपुर के रामनिवास बाग से रियासतकालीन चंदन के पेड़ों की चोरी के मामले में अब भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने कड़ा रुख अपनाया है। CAG ने इस पूरे मामले में हुई लापरवाही और जिम्मेदारों को बचाने की कोशिशों पर तल्ख टिप्पणी की है। CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में इस पूरी घटना को 'लीपापोती' करार देते हुए जिम्मेदारों से 90 लाख रुपए की वसूली और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
कैग ने उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को भी कहा, जिन्होंने जांच रिपोर्टों को दबाए रखा। CAG ने साफ लिखा है- सावन-भादौ पार्क (रामनिवास बाग) से 60 साल पुराने तीन चंदन के पेड़ चोरी होना और फिर भी सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड का ठेका बढ़ाते रहना स्पष्ट करता है कि सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत थी।
7 महीने के अंतराल में दो बार चोरी, फिर भी मेहरबानी
कैग रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने सुरक्षा का जिम्मा 'सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड' को दिया था। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक, चोरी होने पर नुकसान की भरपाई एजेंसी को करनी थी, लेकिन जेडीए ने कार्रवाई के बजाय एजेंसी को रिवॉर्ड दिया।
जुलाई 2019 में पहली चोरी
पहली चोरी जुलाई 2019 में हुई थी। चोर दो पेड़ काटकर ले गए थे। दूसरी चोरी जनवरी 2020 में हुई। फिर से एक पेड़ चोरी हो गया। हैरानी तो यह कि 30 गार्ड और सुपरवाइजर तैनात होने के बावजूद तस्कर आराम से 60 साल पुराने भारी पेड़ काटकर ले गए।
17 जून 2019 को सिक्योरिटी एजेंसी को दिया गया था काम
17 जून 2019 को इस कंपनी को एक साल के लिए काम दिया। शर्तों के अनुसार काम अच्छा होने पर इस अनुबंध अवधि को और बढ़ाया जा सकता था। अनुबंध की शर्त संख्या-8 के अनुसार, जेडीए की किसी प्रोपर्टी की सुरक्षा के लिए गार्ड लगे होने के बावजूद चोरी, नुकसान होता है तो उसकी वसूली सुरक्षा एजेंसी से की जा सकेगी। अनुबंध की शर्त संख्या-10 में साफ लिखा है कि काम संतोषजनक नहीं होने पर कंपनी की सेवाएं तत्कल समाप्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
30 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया
सिक्योरिटी एजेंसी ने इस काम के लिए सुपरवाईजर सहित 30 सुरक्षाकर्मियों को नियुक्त किया गया। सिक्योरिटी एजेंसी के गार्ड लगे होने के बावजूद अनुबंध अवधि में रामनिवास बाग परिसर में लगे चंदन के पेड़े चोरी हुए। 26 जुलाई 2019 और 7 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज करवाई गई।
जेडीए अतिरिक्त आयुक्त ने सिक्योरिटी एजेंसी को जिम्मेदार माना था
कैग रिपोर्ट के अनुसार, JDA के अतिरिक्त आयुक्त ने 14 फरवरी 2020 को अपनी रिपोर्ट में चंदन के पेड़ चोरी होने के मामले में सहारा एजेन्सी के सुरक्षाकर्मी की मिलीभगत होने, सुरक्षाकर्मियों का काम संतोषप्रद नहीं होने और उन्हें काम से हटाने की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट के बाद जेडीए के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने 5 मार्च 2020 को सहारा एजेंसी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया। इस नोटिस में चंदन के पेड़ों की कीमत का सही आंकलन करके सुरक्षा एजेंसी से उसकी भरपाई करने की सिफारिश की गई। चोरी हुए पेड़ों के नुकसान की वसूली के बाद ही कंपनी की सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने की रिपोर्ट दी थी।
17 जुलाई 2021 को जेडीए ने चंदन के तीनो पेड़ों के नुकसान की कीमत का आकलन करवाना प्रस्तावित किया था।
वन संरक्षक ने जांच में सिक्योरिटी एजेंसी और जेडीए इंस्पेक्टर को दोषी माना
वन सरंक्षक ने अपनी रिपोर्ट में सिक्योरिटी एजेंसी और जेडीए इंस्पेक्टर को दोषी माना था। 1 फरवरी 2021 को वन संरक्षक ने पूरी घटना पर जेडीए को रिपोर्ट भेजी थी। जेडीए के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ (सीनियर हॉर्टिकल्चरिस्ट) ने चंदन की कीमत 10 हजार प्रति किलो का आकलन किया। 60 साल पुराने चोरी हुए चंदन के एक पेड़ की कीमत 30 लाख बताई गई। तीनों पेड़ों की कीमत 90 लाख रुपए होती है। यह नुकसान सिक्योरिटी एजेंसी से वसूलना था।
बार-बार कार्यकाल बढ़ाने पर कैग की आपत्ति
कैग रिपोर्ट के अनुसार, जेडीए के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने 27 अक्टूबर 2021 को जांच रिपोर्ट में सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसमें सुरक्षाकर्मियों पर नागरिकों से अवैध वसूली, समय पर सुपरवाइजर नहीं लगाने, एजेन्सी के सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही से रामनिवास बाग से चंदन के पेड़ों की अवैध कटाई आदि का जिक्र था।
सिक्योरिटी कंपनी को 17 जून 2019 से 16 जून 2020 तक काम दिया था। गंभीर शिकायतों के बावजूद इसके ठेके की अवधि को बार-बार बढ़ाया गया। यह शर्तों का साफ उल्लंघन था।
Ayush Pareek 
