कौन थे दादा साहब फाल्के ? जिनके नाम पर दिया जाता है पुरस्कार

भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार उन कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है जिन्होंने फिल्म उद्योग में आजीवन योगदान दिया हो। यह पुरस्कार 1969 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाता है। जानिए कौन थे दादा साहेब फाल्के और क्यों उनके नाम पर यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया जाता है।

कौन थे दादा साहब फाल्के ? जिनके नाम पर दिया जाता है पुरस्कार

भारतीय सिनेमा की दुनिया में जब सर्वोच्च सम्मान की बात होती है, तो दादा साहेब फाल्के पुरस्कार का सबसे पहले लिया जाता है।  यह पुरस्कार भारतीय फिल्म उद्योग में आजीवन योगदान देने वाले कलाकारों और तकनिकी विशेषज्ञों को दिया जाता है। आइए जानते हैं कि दादा साहेब फाल्के कौन थे और उनके नाम पर यह प्रतिष्ठित सम्मान क्यों दिया जाता है।

दादा साहेब फाल्के को भारतीय सिनेमा का जनक (Father of Indian Cinema) कहा जाता है। उन्होंने भारत की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्माण वर्ष 1913 में किया था। उस समय भारत में फिल्म निर्माण की कोई स्थापित व्यवस्था नहीं थी, लेकिन उन्होंने सीमित संसाधनों में भारतीय सिनेमा की नींव रखी। उन्होंने अपने जीवनकाल में दर्जनों फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया और भारतीय फिल्म उद्योग को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।

उनके नाम पर पुरस्कार क्यों दिया जाता है?

भारतीय सिनेमा में उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए भारत सरकार ने उनके नाम पर सर्वोच्च फिल्म सम्मान शुरू किया। यह पुरस्कार उन कलाकारों और फिल्मकारों को दिया जाता है जिन्होंने सिनेमा के विकास में लंबा और महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1969 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदान किया जाता है। यह सम्मान भारतीय फिल्म उद्योग (Indian Film Industry) से जुड़े कलाकारों, निर्देशकों, संगीतकारों, तकनीशियनों और अन्य फिल्म कर्मियों को दिया जाता है, जिन्होंने जीवनभर सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया हो।

क्यों खास है यह सम्मान?

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार को भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इसे प्राप्त करना किसी भी कलाकार या फिल्मकार के लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।