जयपुर में ‘शिल्प एंड कॉटन फेयर’ का आगाज, देशभर की हस्तशिल्प और सिल्क कलाकारी का संगम
जयपुर के Jawahar Kala Kendra में शिल्प एंड कॉटन फेयर आयोजित, जहां देशभर के कारीगर अपनी हस्तशिल्प और सिल्क कलाकारी प्रदर्शित कर रहे हैं। जानें खास आकर्षण और पारंपरिक कला की झलक।
जयपुर : जवाहर कला केन्द्र के साउथ विंग में इन दिनों ‘शिल्प एंड कॉटन फेयर’ का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में देशभर से आए अवॉर्ड विनिंग आर्टिजन अपने हस्तशिल्प और सिल्क उत्पादों के साथ मौजूद हैं। करीब 100 से अधिक स्टॉल्स पर विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शिल्प और वस्त्रों को प्रदर्शित किया गया है। खास बात यह है कि कारीगर यहां न केवल अपने उत्पाद बेच रहे हैं, बल्कि लोगों को उनके बनने की पूरी प्रक्रिया भी समझा रहे हैं।
मेले में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा सहित कई राज्यों के प्रसिद्ध हस्तशिल्प और वस्त्रों को प्रदर्शित किया गया है। राजस्थान से बाग्रू और सांगानेरी ब्लॉक प्रिंट, कोटा डोरिया साड़ी, ब्लू पॉटरी, लाख की चूड़ियां और मोजड़ी जैसे पारंपरिक उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
यहां आपको मिलेगी हर राज्य की प्रसिद्ध कलाकारी
मेले में उत्तर प्रदेश की चिकनकारी कढ़ाई, पश्चिम बंगाल की कांथा एम्ब्रॉयडरी और बालूचरी साड़ियां, गुजरात की बंधनी और पटोला साड़ियां, कर्नाटक की मैसूर सिल्क, तमिलनाडु की कांचीपुरम सिल्क साड़ियां और ओडिशा की इकत बुनाई जैसे उत्पाद भी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। इन सभी उत्पादों में पारंपरिक हस्तकला और महीन कारीगरी की झलक साफ दिखाई देती है।
फेयर में आए कारीगर अपने-अपने स्टॉल पर लोगों को इन उत्पादों के बनने की प्रक्रिया भी समझाते दिख रहे हैं। उदाहरण के तौर पर ब्लॉक प्रिंटिंग में लकड़ी के हाथ से तराशे गए ब्लॉक्स को प्राकृतिक रंगों में डुबोकर कपड़े पर छापा जाता है। वहीं बंधनी में कपड़े को सैकड़ों छोटे-छोटे बिंदुओं में बांधकर रंगा जाता है, जिससे खूबसूरत पैटर्न बनते हैं।
इसी तरह इकत और पटोला बुनाई में धागों को पहले रंगा जाता है और फिर करघे पर विशेष तकनीक से बुना जाता है, जिससे डिजाइन कपड़े में स्वतः उभरकर सामने आता है। कांचीपुरम और मैसूर सिल्क साड़ियों में रेशम के धागों से महीन और जटिल डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जो इनकी खास पहचान है।
समर और वेडिंग सीजन को ध्यान में रखकर उत्पाद
मेले के आयोजक धर्मेश जांगिड़ ने बताया कि इस फेयर का उद्देश्य देशभर के कारीगरों को एक मंच देना है, ताकि वे अपने हुनर को सीधे लोगों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि इस बार हमने समर और शादी के सीजन को ध्यान में रखते हुए उत्पादों का चयन किया है। यहां घर की सजावट से लेकर परिधान और गिफ्ट आइटम तक कई तरह की चीजें उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेले में शामिल सभी कारीगर अपने-अपने राज्यों में पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं और वर्षों से पारंपरिक शिल्प को जीवित रखने का काम कर रहे हैं।
Ayush Pareek 
