डॉलर मजबूत, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, आम लोगों की बढ़ी चिंता
भारतीय रुपया पहली बार 1 डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे पहुंच गया है। डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर रुपये पर दिख रहा है।
वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच भारतीय रुपया पहली बार 1 डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे पहुंच गया। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। रुपये में आई इस गिरावट ने सरकार, कारोबारियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों कमजोर हो रहा है रुपया?
बाजार खुलते ही रुपये पर दबाव साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपया 95.80 के आसपास था, लेकिन कुछ ही समय में यह 96 के स्तर से नीचे फिसल गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने और वैश्विक तनाव बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ रही है और निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
पिछले कुछ हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला है। निवेशक जब भारतीय शेयर बेचकर रुपये को डॉलर में बदलते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होने लगता है।
इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपये की स्थिति और कमजोर होती है।
आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। विदेशों से आने वाले सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पाद और खाद्य सामग्री महंगी हो सकती हैं।
अगर कोई छात्र विदेश में पढ़ाई कर रहा है या विदेश यात्रा की योजना बना रहा है, तो उसे अब पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।
शेयर बाजार में कौन फायदे में, कौन नुकसान में?
गिरते रुपये का असर शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टर पर अलग तरीके से पड़ सकता है।
आईटी और फार्मा जैसी कंपनियां, जो विदेशों में सेवाएं और उत्पाद बेचती हैं, उन्हें फायदा मिल सकता है क्योंकि उन्हें डॉलर में अधिक कमाई होगी।
Saloni Kushwaha 
